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Shweta Tiwari संग शादी की अफवाहों पर भड़के Vishal Aditya Singh, ट्रोलर्स को लताड़ा

बॉलीवुड और टीवी जगत में कई बार श्वेता तिवारी और विशाल आदित्य सिंह के अफेयर और शादी की खबरें सामने आई हैं। अब इन खबरों पर विशाल आदित्य सिंह का गुस्सा फूटा है। उन्होंने ऐसी बातें फैलाने वालों को खरी-खोटी सुनाते हुए अपनी भड़ास निकाली है।

सोशल मीडिया और अफवाहों पर जताया गुस्सा

टेली चक्कर से खास बातचीत के दौरान विशाल ने कहा कि आज सोशल मीडिया का जमाना है और कोई भी कुछ भी बोल देता है। उन्होंने कहा कि सामने आकर बोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। विशाल के मुताबिक, श्वेता तिवारी उनकी बहुत अच्छी दोस्त हैं। उन्हें तिवारी जी या मॉम बोलने में कोई झिझक नहीं होती, क्योंकि उनके बीच बहुत अच्छी समझ और दोस्ती है। इसे भी पढ़ें: आराध्या बच्चन फेक न्यूज मामले में High Court ने पूछा क्या परिवार का सरनेम और साख ट्रेडमार्क है?

ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब

ट्रोलर्स को जवाब देते हुए विशाल ने कहा कि हाथी अपनी चाल चलता रहता है और कुत्ते भौंकते रहते हैं। लोग चाहे जो भी कहें, इससे उनका रिश्ता खराब नहीं होने वाला। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि श्वेता की भी अपनी एक फैमिली है, वे दो बच्चों की मां हैं और उनकी जिंदगी में पहले ही काफी मुश्किलें रही हैं। इसे भी पढ़ें: सुपरस्टार Yash की फिल्म Toxic को मिला A सर्टिफिकेट, 26 अगस्त को सिनेमाघरों में होगी रिलीज

अपनों के मजे लेने पर जताया दुख

विशाल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि एक लड़का होने के नाते उनके लिए ऐसी खबरें ज्यादा असर नहीं करतीं, लेकिन श्वेता के लिए यह सही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख तब पहुंचता है जब उनके अपने और पहचान के लोग ही ऐसी बातों का मजाक उड़ाते हैं।

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Expaliner: 37 साल बाद फिर ‘बंटवारा’, धर्मेंद्र की फिल्म के बाद अब सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ क्या दोहरा पाएगी पुराना जादू?

Batwara vs Batwara 1947: बॉलीवुड के दमदार एक्टर सनी देओल इन दिनों अपनी मच अवेटेड फिल्म ‘बंटवारा 1947’ को लेकर सुर्खियों में हैं. लंबे इंतजार के बाद ये फिल्म आज यानी 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म की रिलीज से पहले ही इसे लेकर दर्शकों के बीच काफी एक्साइटमेंट देखने को मिल रही थी. अब फिल्म के शुरुआती रिव्यू और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं, जिनमें फिल्म को लेकर पॉजिटिव बातें सुनने को मिल रही हैं.

लेकिन सनी देओल की इस फिल्म के साथ सिर्फ कहानी, परफॉर्मेंस और बॉक्स ऑफिस का सवाल नहीं जुड़ा है. इसके साथ देओल परिवार की एक पुरानी सिनेमाई याद भी जुड़ी हुई है. दरअसल, साल 1989 में सनी देओल के पिता और दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र की फिल्म ‘बंटवारा’ रिलीज हुई थी. ऐसे में अब करीब 37 साल बाद उसी नाम से जुड़ी फिल्म के साथ सनी देओल दर्शकों के बीच पहुंचे हैं. हालांकि दोनों फिल्मों की कहानियां और समय-काल अलग हैं, लेकिन एक जैसा नाम होने की वजह से इनकी तुलना होना हो रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ अपने पिता की फिल्म की तरह दर्शकों के दिलों में जगह बना पाएगी?

धर्मेंद्र की ‘बंटवारा’ ने बनाई थी खास पहचान

साल 1989 में रिलीज हुई धर्मेंद्र स्टारर ‘बंटवारा’ उस दौर की पॉपुलर फिल्मों में शामिल थी. फिल्म में धर्मेंद्र के साथ बॉलीवुड के कई बड़े कलाकार नजर आए थे. इसकी स्टारकास्ट अपने आप में काफी मजबूत थी. फिल्म में विनोद खन्ना, डिंपल कपाड़िया, पूनम ढिल्लन, मोहसिन खान, शम्मी कपूर, आशा पारेख, कुलभूषण खरबंदा, अमरीश पुरी और अमृता सिंह जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई दिए थे.

फिल्म की कहानी में रिश्तों, परिवार, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों के बीच पैदा होने वाले तनाव को दिखाया गया था. उस दौर में फैमिली ड्रामा और बड़े सितारों वाली फिल्मों को दर्शकों का खूब प्यार मिलता था. ‘बंटवारा’ भी इसी वजह से दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रही. सबसे बड़ी बात ये थी कि उस समय धर्मेंद्र का स्टारडम अपने चरम पर था. उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और एक्शन से लेकर इमोशनल सीन्स तक को दर्शक काफी पसंद करते थे. यही वजह रही कि फिल्म को लेकर दर्शकों में खास क्रेज देखने को मिला.

अब 37 साल बाद सनी देओल की बारी

अब कहानी 37 साल आगे बढ़ चुकी है. सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ आज सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. फिल्म का बैकग्राउंड भारत के इतिहास के बेहद महत्वपूर्ण और दर्दनाक दौर यानी 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन से जुड़ा है. भारत का विभाजन सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि इसने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी थी. परिवार बिछड़ गए लोगों को अपना घर और जमीन छोड़कर पलायन करना पड़ा और इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा और मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया. इसी ऐतिहासिक बैकग्राउंड को फिल्म में कहानी के सेंटर में रखा गया है. ऐसे टॉपिक को पर्दे पर पेश करना आसान नहीं होता क्योंकि इसमें इतिहास, इमोशंस और मानवीय त्रासदी को संतुलित तरीके से दिखाने की चुनौती होती है.

सनी देओल के लिए भी खास है फिल्म

सनी देओल को बॉलीवुड में उनकी दमदार आवाज, इंटेंस स्क्रीन प्रेजेंस और देशभक्ति से जुड़े किरदारों के लिए खास तौर पर जाना जाता है. ‘गदर’ जैसी फिल्मों में उन्होंने जिस तरह के किरदार निभाए हैं, उन्होंने दर्शकों के बीच उनकी एक अलग पहचान बनाई है. ऐसे में ‘बंटवारा 1947’ जैसी ऐतिहासिक बैकग्राउंड वाली फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक तौर पर ज्यादा हैं. सनी देओल की पॉपुलेरिटी फिल्म के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट मानी जा रही है. फिल्म के जरिए एक बार फिर सनी देओल ऐसे टॉपिक के साथ दर्शकों के सामने आए हैं, जिसमें देश, इतिहास, परिवार और भावनाओं का मेल देखने को मिलता है.

क्या पिता की फिल्म का जादू दोहरा पाएंगे सनी?

यही सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है. 37 साल पहले धर्मेंद्र की ‘बंटवारा’ और अब सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ के बीच एक लंबा अंतर है. इस दौरान हिंदी सिनेमा पूरी तरह बदल चुका है. 1989 के समय फिल्मों की रिलीज, प्रमोशन, दर्शकों तक पहुंच और बॉक्स ऑफिस का तरीका आज से बिल्कुल अलग था. उस दौर में किसी फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा आधार सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ और लंबे समय तक चलने वाला प्रदर्शन हुआ करता था.

आज के दौर में फिल्म की सफलता सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से तय नहीं होती. सोशल मीडिया पर चर्चा, ऑनलाइन रिव्यू, ऑडियंस रिएक्शन और पहले वीकेंड का प्रदर्शन भी काफी मायने रखता है. इसलिए दोनों फिल्मों की सीधी तुलना करना आसान नहीं होगा. फिर भी एक ही परिवार और एक जैसे नाम की वजह से दर्शकों के बीच यह तुलना होना आम बात है.

सिर्फ नाम है एक जैसा

वहीं ये भी समझना जरूरी है कि ‘बंटवारा’ और ‘बंटवारा 1947’ को एक ही कहानी की फिल्म नहीं माना जा सकता. दोनों के बीच कई दशकों का अंतर है और दोनों की कहानी का फोकस भी अलग है. 1989 की फिल्म में जहां पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक संघर्षों को प्रमुखता दी गई थी, वहीं ‘बंटवारा 1947’ का आधार विभाजन के दौर की घटनाएं और उससे जुड़े मानवीय पहलू हैं. इस लिहाज से सनी देओल की फिल्म अपने आप में एक अलग कहानी लेकर आई है. ऐसे में फिल्म को सिर्फ धर्मेंद्र की पुरानी फिल्म के आधार पर जज करना सही नहीं होगा.

FAQ

1. ‘बंटवारा 1947’ कब रिलीज हुई है?
सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है.

2. क्या ‘बंटवारा 1947’ धर्मेंद्र की फिल्म ‘बंटवारा’ का सीक्वल है?
नहीं, दोनों फिल्मों की कहानियां अलग हैं. दोनों के नाम एक जैसे होने की वजह से इनकी तुलना की जा रही है.

3. धर्मेंद्र की ‘बंटवारा’ कब रिलीज हुई थी?
धर्मेंद्र स्टारर ‘बंटवारा’ साल 1989 में रिलीज हुई थी. फिल्म में उनके साथ विनोद खन्ना, डिंपल कपाड़िया और अमरीश पुरी जैसे कलाकार नजर आए थे.

4. ‘बंटवारा 1947’ की कहानी किस दौर पर आधारित है?
फिल्म की कहानी 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान विभाजन की बैकग्राउंड पर आधारित है और उस दौर के मानवीय संघर्षों को दिखाती है.

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  Sports

Galle Test: टीम इंडिया के सामने Playing 11 की पहेली, 3 स्पिनर या पेसर्स पर कोच Morne Morkel का बड़ा बयान

गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले पहले टेस्ट से दो दिन पहले सबसे ज्यादा चर्चा पिच को लेकर हो रही है। आमतौर पर गॉल की पिच को स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पिच पर जमकर पानी डाला गया है और फिलहाल यह सूखी या पहले ही दिन से गेंद को तेजी से घुमाने वाली सतह नहीं दिख रही है।

भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने भी पिच को अच्छी बताया है। उनका मानना है कि मैच आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव आएगा और गेंदबाजों को बाद के दिनों में अधिक मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयारी की है और अब सबसे जरूरी चीज मानसिक मजबूती, लंबे समय तक बल्लेबाजी करना और सही जगह पर गेंद डालना है।

मोर्केल के मुताबिक, अगर भारत पहले बल्लेबाजी करता है तो उसे बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा। वहीं पहले गेंदबाजी करने की स्थिति में गेंदबाजों को लगातार सही क्षेत्र में गेंद डालकर दबाव बनाना होगा। उनका मानना है कि गॉल में परंपरागत तौर पर पहले दो दिन बल्लेबाजों के लिए बेहतर होते हैं, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम के लिए फैसला काफी अहम रहेगा।

यही स्थिति भारतीय टीम के सामने अंतिम ग्यारह को लेकर भी बड़ी पहेली खड़ी कर रही है। तीन स्पिन गेंदबाजों के साथ उतरना फिलहाल ज्यादा मजबूत विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे टीम को बल्लेबाजी में भी गहराई मिलती है। हेड कोच गौतम गंभीर आमतौर पर गेंदबाजी संयोजन के लिए बल्लेबाजी की मजबूती से समझौता करना पसंद नहीं करते हैं।

मौजूदा समीकरण में रवींद्र जडेजा प्रमुख हरफनमौला खिलाड़ी के तौर पर लगभग तय माने जा रहे हैं, जबकि मोहम्मद सिराज तेज गेंदबाजी की अगुआई कर सकते हैं। कुलदीप यादव का खेलना भी लगभग तय माना जा रहा है। दूसरे तेज गेंदबाज के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ के बीच मुकाबला है, जिसमें प्रसिद्ध कृष्णा फिलहाल थोड़ा आगे दिखाई दे रहे हैं।

मोर्ने मोर्केल ने कहा कि कुलदीप यादव आक्रामक गेंदबाज हैं, जबकि रवींद्र जडेजा अपने अनुभव और सटीक गेंदबाजी के कारण बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक तीनों की गेंदबाजी शैली अलग है और जरूरत के हिसाब से कप्तान शुभमन गिल उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

गौरतलब है कि गॉल में पिछला टेस्ट जून 2025 में श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेला गया था। उस मुकाबले में दोनों टीमों ने 450 से ज्यादा रन के स्कोर बनाए थे। चार शतक और चार अर्धशतक भी लगे थे। श्रीलंका के प्रमुख स्पिनर प्रभात जयसूर्या पहली पारी में 48 ओवर गेंदबाजी करने के बावजूद एक भी विकेट नहीं ले सके थे और दूसरी पारी में भी उन्हें केवल एक विकेट मिला था।

भारत ए की पिछले महीने इसी मैदान पर हुई दो मुकाबलों की श्रृंखला से भी बल्लेबाजों के लिए अच्छी परिस्थितियों के संकेत मिले थे। तेज गेंदबाजों को भी यहां गेंदबाजी में मदद मिली थी। गुरनूर बराड़ ने दूसरे मुकाबले में 10 विकेट लेकर खासा प्रभावित किया था। उन्होंने अगस्त के पहले सप्ताह में टीम से जुड़ने के बाद अभ्यास में लगातार तेज गेंदबाजी की है और टेस्ट पदार्पण के करीब पहुंच गए हैं।

हालांकि, फिलहाल उनका इंतजार थोड़ा और बढ़ सकता है। गॉल में मुकाबला शुरू होने से पहले सभी की नजर टॉस पर रहेगी। इस मैदान पर हाल के वर्षों में पहली और चौथी पारी के स्कोर में बड़ा अंतर देखने को मिला है। ऐसे में पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर बनाना भारत और श्रीलंका दोनों के लिए सफलता का सबसे अहम मंत्र हो सकता है, क्योंकि जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ेगा, स्पिनरों के लिए पिच पर गेंद पकड़ने और ज्यादा घूमने की संभावना बढ़ सकती है।
Fri, 14 Aug 2026 20:32:26 +0530

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