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Ashok Leyland का शुद्ध लाभ बढ़कर 667.77 करोड़ रुपये हुआ, आय 13,069 करोड़ के पार

वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली कंपनी अशोक लेलैंड लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 1.5 प्रतिशत बढ़कर 667.77 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 657.72 करोड़ रुपये था। अशोक लेलैंड ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में एकीकृत परिचालन आय बढ़कर 13,069.59 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 11,708.54 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के निदेशक मंडल ने अपनी ब्रिटेन स्थित अनुषंगी ऑप्टारे पीएलसी में 2.5 करोड़ पाउंड (करीब 325 करोड़ रुपये) तक और हिंदुजा हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के शेयर में द्वितीयक खरीद के जरिये 500 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है। समीक्षाधीन तिमाही में उसका कुल खर्च बढ़कर 12,314.66 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 10,920.53 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार, आलोच्य तिमाही के दौरान उसने अब तक का सबसे अधिक 48,763 वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री की जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 44,238 इकाई था।

अशोक लेलैंड के चेयरमैन धीरज हिंदुजा ने कहा कि कंपनी ने अनुशासित क्रियान्वयन और प्रभावी लागत प्रबंधन के दम पर एक और मजबूत तिमाही दर्ज की है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रमुख क्षेत्रों में मांग मजबूत बनी हुई है और भविष्य की संभावनाएं भी उत्साहजनक हैं। हमारा मानना है कि ‘परिवर्तन’ जैसी सरकारी पहल से वाहनों के बेड़े के आधुनिकीकरण में और तेजी आएगी तथा वाणिज्यिक वाहन उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा।’’ हिंदुजा ने कहा कि कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली अनुषंगी स्विच मोबिलिटी को लगातार अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने वृद्धि के स्रोतों में विविधता लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और रक्षा कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं।’’ अशोक लेलैंड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शेनु अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पहली तिमाही में भारतीय वाणिज्यिक वाहन उद्योग में मजबूती बनी रही। उन्होंने कहा कि यह उद्योग की मजबूत बुनियाद और भारतीय वाणिज्यिक वाहन उद्योग में निरंतर वृद्धि की क्षमता को दर्शाता है। अग्रवाल ने कहा, ‘‘हालांकि, बढ़ती सामग्री लागत चिंता का विषय बनी हुई है।

कंपनी बेहतर मूल्य प्राप्ति, लागत में कड़ाई से कटौती, उत्पाद एवं कारोबारी मिश्रण में सुधार और अवसर के अनुरूप उत्पाद का भंडार तैयार करने सहित कई पहलों पर काम कर रही है।

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Finance Ministry ने सलाहकार सेवाओं की खरीद में अत्यधिक टर्नओवर की शर्त हटाने को कहा

वित्त मंत्रालय ने सरकारी संस्थाओं को सलाहकार सेवाओं की खरीद में अत्यधिक ऊंचे कारोबार और वेतनभोगी कर्मचारियों की शर्तें लगाने से बचने की सलाह देते हुए कहा है कि ऐसी शर्तों से प्रतिस्पर्धा अनावश्यक रूप से सीमित हो सकती है। मंत्रालय ने 22 जुलाई को जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा है कि सरकारी ऑनलाइन खरीद मंच (जीईएम) के जरिए सलाहकार सेवाओं की खरीद करने वाली एजेंसियों को निविदा में न्यूनतम कर्मचारियों की ऐसी संख्या तय करनी चाहिए जो काम को संतोषजनक ढंग से पूरा करने के लिए आवश्यक श्रमशक्ति के अनुरूप हो। व्यय विभाग के खरीद नीति प्रभाग की तरफ से जारी ज्ञापन में कहा गया, ‘‘बिना पर्याप्त औचित्य के अनुपातहीन रूप से अधिक कर्मचारियों की संख्या की शर्तें प्रतिस्पर्धा को अनावश्यक रूप से सीमित कर सकती हैं।’’ वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग ने कहा कि पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान जीईएम मंच पर जारी सलाहकार सेवाओं की खरीद संबंधी निविदाओं के नमूना अध्ययन में पात्रता एवं योग्यता संबंधी मानदंडों को लेकर कुछ मुद्दे सामने आए।

अध्ययन में अपेक्षाकृत अधिक कारोबार की शर्तें लगाए जाने और प्रस्तावित प्रमुख कर्मचारियों की योग्यता एवं अनुभव की तुलना में सलाहकार फर्म के अनुभव को अधिक महत्व दिए जाने के मामले सामने आए। इसमें यह भी पाया गया कि बोलीदाता के वेतनभोगी कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या को पात्रता मानदंड बनाया गया, जो परियोजना के क्रियान्वयन के लिए वास्तव में आवश्यक श्रमशक्ति से काफी अधिक थी। विभाग ने कहा, ‘‘निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि पात्रता और योग्यता संबंधी ऐसे मानदंड सलाहकार सेवाओं की खरीद में प्रतिस्पर्धा को अनुचित रूप से सीमित कर सकते हैं।’’ ज्ञापन में विभाग ने खरीद एजेंसियों को पात्रता और योग्यता संबंधी मानदंड तय करते समय ‘सलाहकार सेवाओं की खरीद नियमावली, द्वितीय संस्करण, 2025’ के प्रावधानों का पालन करने की सलाह दी है।

यह कार्यालय ज्ञापन सभी केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को जारी किया गया है।

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  Sports

शुभमन गिल ने पूरे किए कप्तानी का एक साल, 600th Test में कप्तानी कर रचेंगे इतिहास; Shubman Gill on WTC Goals

 भारत के कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि भले ही उनकी कप्तानी में टीम अभी तक कोई ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाई है, लेकिन वह इस भूमिका में पूरी तरह सहज हैं और उन्हें विश्वास है कि टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है। गिल की कप्तानी में पहली टेस्ट सीरीज (इंग्लैंड में) 2-2 से ड्रॉ रही। इसके बाद भारत घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका से सीरीज हार गया, हालांकि गर्दन की चोट के कारण गिल उस सीरीज के बड़े हिस्से में नहीं खेल सके। भारत ने घरेलू टेस्ट सीरीज में अफगानिस्तान को आसानी से हराया था जो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) का हिस्सा नहीं थी।

लेकिन गिल ने कहा कि वह बड़े लक्ष्य पर ध्यान दे रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गिल ने कहा, ‘‘मैं कप्तानी की भूमिका में बहुत सहज हूं। पिछले एक साल में जिस तरह हमारी टीम आगे बढ़ी है, उसे देखकर मुझे काफी संतोष मिलता है। मुझे लगता है कि हम सही दिशा में सही कदम उठा रहे हैं। ’’ हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत फिलहाल विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है और फाइनल में पहुंचने के लिए टीम को मजबूत प्रदर्शन करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य लक्ष्य अगले साल होने वाले डब्ल्यूटीसी फाइनल में पहुंचना है। हमारे पास अभी लगभग नौ टेस्ट मैच हैं और क्वालीफाई करने के लिए हमें इनमें से छह या सात मैच जीतने होंगे। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ यह सीरीज हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हमने इसकी अच्छी तैयारी की है। ’’ श्रीलंका के खिलाफ यह मुकाबला भारत का 600वां टेस्ट मैच होगा। इस ऐतिहासिक मौके पर टीम की कप्तानी करते हुए वह मंसूर अली खान पटौदी (भारत के 100वें टेस्ट) और विराट कोहली (500वें टेस्ट) जैसे दिग्गजों की सूची में शामिल हो जाएंगे। गिल ने कहा, ‘‘अपने देश के लिए किसी भी टेस्ट मैच में कप्तानी करना बहुत बड़ा सम्मान है।

भारत के 600वें टेस्ट में टीम का नेतृत्व करना मेरे लिए गर्व की बात है और स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा करना इसे और भी खास बना देता है। ’’ गिल के बचपन के कोच सुखविंदर टिंकू ने कहा, ‘‘मैं बिलकुल भी हैरान नहीं हूं कि शुभमन बतौर कप्तान अच्छा कर रहा है। शुभमन हमेशा से सीखने के इच्छुक रहे हैं। जब वह छोटे थे, तब मुझे उन्हें कोई बात दो बार समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। वह बहुत तेज और सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे। ’’

गिल ने श्रीलंका के गॉल की परिस्थितियों पर कहा कि यहां पुरानी गेंद से स्पिनरों की भूमिका काफी अहम होती है, जैसा कि भारत में भी कई जगह देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ी समानता यह है कि गेंद पुरानी होने पर स्पिनरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि भारत में अलग-अलग तरह की मिट्टी की पिचें हैं। गॉल में हाल के मैच में अच्छी उछाल देखने को मिली है जो भारत की लाल मिट्टी वाली पिच जैसी है। अगर आप मुंबई जैसी जगह पर खेलते हैं तो यहां की परिस्थितियां काफी मिलती-जुलती लगती हैं।

Fri, 14 Aug 2026 18:07:03 +0530

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