शुभमन गिल ने पूरे किए कप्तानी का एक साल, 600th Test में कप्तानी कर रचेंगे इतिहास; Shubman Gill on WTC Goals
भारत के कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि भले ही उनकी कप्तानी में टीम अभी तक कोई ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज नहीं जीत पाई है, लेकिन वह इस भूमिका में पूरी तरह सहज हैं और उन्हें विश्वास है कि टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है। गिल की कप्तानी में पहली टेस्ट सीरीज (इंग्लैंड में) 2-2 से ड्रॉ रही। इसके बाद भारत घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका से सीरीज हार गया, हालांकि गर्दन की चोट के कारण गिल उस सीरीज के बड़े हिस्से में नहीं खेल सके। भारत ने घरेलू टेस्ट सीरीज में अफगानिस्तान को आसानी से हराया था जो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) का हिस्सा नहीं थी।
लेकिन गिल ने कहा कि वह बड़े लक्ष्य पर ध्यान दे रहे हैं। श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गिल ने कहा, ‘‘मैं कप्तानी की भूमिका में बहुत सहज हूं। पिछले एक साल में जिस तरह हमारी टीम आगे बढ़ी है, उसे देखकर मुझे काफी संतोष मिलता है। मुझे लगता है कि हम सही दिशा में सही कदम उठा रहे हैं। ’’ हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत फिलहाल विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है और फाइनल में पहुंचने के लिए टीम को मजबूत प्रदर्शन करना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मुख्य लक्ष्य अगले साल होने वाले डब्ल्यूटीसी फाइनल में पहुंचना है। हमारे पास अभी लगभग नौ टेस्ट मैच हैं और क्वालीफाई करने के लिए हमें इनमें से छह या सात मैच जीतने होंगे। इसलिए श्रीलंका के खिलाफ यह सीरीज हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है और हमने इसकी अच्छी तैयारी की है। ’’ श्रीलंका के खिलाफ यह मुकाबला भारत का 600वां टेस्ट मैच होगा। इस ऐतिहासिक मौके पर टीम की कप्तानी करते हुए वह मंसूर अली खान पटौदी (भारत के 100वें टेस्ट) और विराट कोहली (500वें टेस्ट) जैसे दिग्गजों की सूची में शामिल हो जाएंगे। गिल ने कहा, ‘‘अपने देश के लिए किसी भी टेस्ट मैच में कप्तानी करना बहुत बड़ा सम्मान है।
भारत के 600वें टेस्ट में टीम का नेतृत्व करना मेरे लिए गर्व की बात है और स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा करना इसे और भी खास बना देता है। ’’ गिल के बचपन के कोच सुखविंदर टिंकू ने कहा, ‘‘मैं बिलकुल भी हैरान नहीं हूं कि शुभमन बतौर कप्तान अच्छा कर रहा है। शुभमन हमेशा से सीखने के इच्छुक रहे हैं। जब वह छोटे थे, तब मुझे उन्हें कोई बात दो बार समझाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। वह बहुत तेज और सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते थे। ’’
गिल ने श्रीलंका के गॉल की परिस्थितियों पर कहा कि यहां पुरानी गेंद से स्पिनरों की भूमिका काफी अहम होती है, जैसा कि भारत में भी कई जगह देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ी समानता यह है कि गेंद पुरानी होने पर स्पिनरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि भारत में अलग-अलग तरह की मिट्टी की पिचें हैं। गॉल में हाल के मैच में अच्छी उछाल देखने को मिली है जो भारत की लाल मिट्टी वाली पिच जैसी है। अगर आप मुंबई जैसी जगह पर खेलते हैं तो यहां की परिस्थितियां काफी मिलती-जुलती लगती हैं।
मेडिकल नामांकन में पारदर्शिता के लिए झारखंड सरकार ने लागू की नई एसओपी, फर्जी प्रमाण-पत्र मिले तो होगी कार्रवाई
रांची, 14 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में मेडिकल, डेंटल और आयुष कॉलेजों में नामांकन में फर्जीवाड़े पर अब सख्त कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि फर्जी या गलत प्रमाण-पत्र के आधार पर नामांकन पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी का एडमिशन तत्काल रद्द किया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने नीट- यूजी और नीट-पीजी के जरिए नामांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है।
इसके तहत अभ्यर्थियों के स्थानीय निवासी, जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का ऑनलाइन सत्यापन करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा। यह जानकारी शुक्रवार को विभाग की ओर से जारी आधिकारिक नोट में दी गई है। नई व्यवस्था के तहत झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद के स्तर पर उच्चस्तरीय जांच समितियां गठित की गई हैं।
एमबीबीएस, एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों के लिए समिति में रिम्स और सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के नामांकन प्रभारी, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि तथा पर्षद के विशेष कार्य पदाधिकारी शामिल होंगे। इसी तरह बीडीएस और एमडीएस तथा आयुष पाठ्यक्रमों के लिए भी अलग समितियां गठित की गई हैं। राज्य स्तरीय जांच के अलावा रिम्स रांची और संबंधित मेडिकल कॉलेजों में भी संस्थान स्तर पर समितियां बनाई गई हैं। इन समितियों में निदेशक, प्राचार्य या डीन को अध्यक्ष, अधीक्षक को सदस्य और नामांकन प्रभारी को सदस्य सचिव बनाया गया है।
ये समितियां अभ्यर्थियों के मूल प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच करेंगी। एसओपी के अनुसार जाति, आय, स्थानीय निवासी और दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का सत्यापन संबंधित सरकारी ऑनलाइन पोर्टल से किया जाएगा। यदि ऑनलाइन जांच में कोई प्रमाण-पत्र संदिग्ध मिलता है तो उसे संबंधित जिले के उपायुक्त के पास भेजा जाएगा। जिला प्रशासन को ऐसे मामलों का भौतिक सत्यापन कर 10 कार्य दिवसों के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी। जांच पूरी होने तक संबंधित अभ्यर्थी को केवल औपबंधिक नामांकन दिया जाएगा।
प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के बाद ही नामांकन को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी अभ्यर्थी का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है तो संबंधित कॉलेज के प्राचार्य उसका नामांकन तत्काल रद्द करेंगे। इसके साथ ही अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नामांकन के दौरान जमा किए जाने वाले सभी डिजिटल और भौतिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का भी प्रावधान किया गया है। इससे भविष्य में किसी अभ्यर्थी के प्रमाण-पत्रों की दोबारा जांच की जा सकेगी। यह नई एसओपी रिम्स रांची सहित राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल, डेंटल, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी महाविद्यालयों में लागू होगी।
--आईएएनएस
एसएनसी/पीएम
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