Billionaire West Ham co-owner accused of abusing his power and preying on women for sex. #BBCNews
David Sullivan described the allegations made in a BBC Panorama documentary as "false" and said he was "absolutely not the person the media has decided to paint me as". Sullivan said he planned to sue the BBC. He “categorically denies” the claims. For information and support, search BBC Action Line.
रोटी तक EMI पर लेने को मजबूर हुए ईरानी:अमेरिका-ईरान जंग का असर, तेल 430% तो अंडे 345% महंगे हो गए
मैंने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन लिया। अगले दिन पैसा देने गया तो बिल दोगुना हो चुका था।’ तेहरान के 52 साल के सरकारी कर्मचारी मेहदी की यह बात ईरान में महंगाई की तस्वीर को बयां करती है। तेहरान, इस्फहान, अहवाज और मशहद के लोगों से बात करने पर पाया कि उनकी आवाजों में अब बमों से ज्यादा रसोई का डर दिख रहा है। मेहदी ने बताया कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि अब तनख्वाह महीने के बीच में ही खत्म हो जाती है। कई इलाकों में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि लोग रोटी, राशन, और सुपरमार्केट पैकेज तक ईएमआई में खरीद रहे हैं। इजराइल और अमेरिका के हमलों के बाद कुछ ईरानियों को लगा था कि सरकार गिर जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सरकार समर्थक हों या विरोधी, सभी युद्ध, महंगाई और अनिश्चितता से टूट रहे हैं। युद्ध के बाद से देश में कुकिंग ऑयल 430%, अंडे 345%, चावल 287% और दूध 139% तक महंगे हो गए हैं। अब विरोधी बोले- बातचीत ही देश बचाने का आखिरी रास्ता कई अब युद्ध को बदलाव का रास्ता नहीं मान रहे। वे बातचीत को देश बचाने का आखिरी साधन समझने लगे हैं। सरकार विरोधी तेहरान की 44 साल की पर्यावरण विशेषज्ञ लीदा, ने कहा कि वे बातचीत के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ईरान ने बहुत जानें गंवाईं। इंफ्रास्ट्रक्चर टूटा। युद्ध देश हित में नहीं है। विश्लेषक एली के मुताबिक यह विरोधियों के लिए कड़वा हिसाब लगाने का समय है। उन्हें मानना पड़ रहा है कि उम्मीदों के उलट यह शासन बचा रहा। इंटरनेट लौटा तो पता चला कि घर के 12 लोग मारे जा चुके हैं ईरान में युद्ध शुरू होते ही इंटरनेट बंद हो गया था। मई के अंत तक लोग दुनिया से भी कटे रहे और एक-दूसरे से भी। जब इंटरनेट लौटा, तो राहत नहीं आई। सोशल मीडिया पर टूटे घरों, बिछड़े परिवारों और दहशत की कहानियां उमड़ पड़ीं। इन्हीं में हामेद मिर्जाई की कहानी सबसे दर्दनाक है। उन्होंने लिखा कि मार्च में तेहरान के रेसालत स्क्वायर पर इजराइली हमला हुआ। इसमें उनकी पत्नी, माता-पिता समेत 12 लोग मारे गए। इसकी जानकारी उन्हें इंटरनेट शुरू होने के बाद मिल पाई। दवाएं भी राशन की तरह दे रही हैं फार्मेसियां जंग से पहले ही महंगाई से जूझ रहा है ईरान ईरान में बढ़ती महंगाई और मुद्रा संकट के खिलाफ दिसंबर 2025 में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के चलते सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया था। महंगाई के खिलाफ इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे बड़े शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन उस वक्त तेज हुए, जब ईरान की मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें काफी बढ़ गईं थीं। ईरान के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा रही, जबकि खाने की चीजों की कीमतें 70 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी थीं। ----------------- ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू:ईरान बोला- अब इजराइल पर हमले नहीं होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरी खबर पढ़ें…
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