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'अब तक किए हर काम से बिल्कुल अलग', रुक्मिणी वसंत ने टॉक्सिक में अपने किरदार को बताया सबसे अहम

Rukmini Vasanth on Toxic: टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स के म्यूज़िक लॉन्च पर रुक्मिणी वसंत ने फिल्म का हिस्सा बनने और मेलिसा की दुनिया में कदम रखने के अपने एक्सपीरियंस के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके अब तक के किए गए काम से बिल्कुल अलग है. टॉक्सिक को अपने लिए खास बताते हुए रुक्मिणी ने कहा, “टॉक्सिक मेरे लिए, और इस फिल्म का हिस्सा रहे हर इंसान के लिए बेहद स्पेशल फिल्म है. ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जिनके बारे में मैं बात कर सकती हूं. जिस दुनिया में हम रहते हैं, उसका एक्सपैंसिव होना, फिल्म का स्केल… पहली बार जब मैंने इसके बारे में सुना था, तभी इसका स्केल मुझे बहुत इम्प्रेस कर गया था.”

हर किरदार का ग्रे शेड भी बहुत शानदार

हालांकि, रुक्मिणी ने बताया कि उन्हें फिल्म की तरफ सिर्फ इसका स्केल और ग्रैंड्योर ही नहीं खींच लाया, बल्कि इसके किरदारों की कॉम्प्लेक्सिटी ने भी उन्हें काफी एक्साइट किया. उन्होंने कहा, “फिल्म के स्केल और इस दुनिया की ग्रैंड्योर के साथ-साथ, हर किरदार का ग्रे शेड भी बहुत शानदार है. हर किरदार इतना रॉ और इतना ह्यूमन है.”

रुक्मिणी ने बताया कि वह यह जानने को लेकर काफी एक्साइटेड थीं कि टॉक्सिक की इस बड़ी दुनिया में मेलिसा की जगह क्या है और उसका बाकी किरदारों के साथ कनेक्शन कैसा है. उन्होंने कहा, “मैं यह डिस्कवर करने को लेकर बहुत एक्साइटेड थी कि मेलिसा इस दुनिया में कहां फिट होती है और बाकी किरदार एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं. यह सब किस तरह आपस में जुड़ा हुआ है, इसे लेकर मैं बहुत क्यूरियस थी.”

यह भी एक बहुत शानदार एक्सपीरियंस था मेरे लिए

एक्टर ने यह भी माना कि यश के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिलना उनके लिए एक्साइटिंग एक्सपीरियंस था. रुक्मिणी ने कहा, “यश सर की फैनगर्ल होना और फिर उनके साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिलना, मेरे लिए यह भी एक बहुत शानदार एक्सपीरियंस था.”

जब रुक्मिणी से पूछा गया कि टॉक्सिक को उनके लिए इतना खास क्या बनाता है, खासकर तब जब ऑडियंस ने उन्हें इससे पहले ऐसी दुनिया या किरदार में नहीं देखा है, तो उन्होंने कहा, “यह अब तक मैंने जो भी काम किया है, उससे बिल्कुल अलग है. मुझे लगता है कि इसमें एक यूनिकनेस है और उनके किरदार में एक खास तरह का ‘जे ने से क्वा’ है.”

गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स में यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी नजर आएंगे. फिल्म 26 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है.

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Expaliner: 90's का 15 अगस्त होता था खास, झंडा फहराने के बाद टीवी के सामने क्यों जुटता था पूरा परिवार?

Independence Day Special: आज 15 अगस्त का मतलब सिर्फ स्कूल में झंडारोहण या छुट्टी नहीं रह गया है. मोबाइल, सोशल मीडिया और ओटीटी के दौर में देशभक्ति से जुड़ा कंटेंट हर समय आसानी से मिल जाता है. लेकिन 90 के दशक में ऐसा नहीं था. उस दौर में एंटरटेनमेंट के लिए लिमिटेड ऑप्शन होते थे, जिसमें से एक टीवी था. खासकर 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे मौकों पर दूरदर्शन का माहौल ही अलग ही होता था. सुबह झंडारोहण और देशभक्ति कार्यक्रमों के बाद परिवार की नजर टीवी पर टिक जाती थी. 

90's में 15 अगस्त का अलग था माहौल

90 के दशक में में हर घर में इंटरनेट, स्मार्टफोन और ओटीटी प्लेटफॉर्म नहीं होते थे. ज्यादातर परिवारों के लिए टीवी ही मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया होता था. चैनलों की संख्या भी बहुत कम थी। ऐसे में जब कोई खास दिन आता था तो लोगों को टीवी पर दिखाए जाने वाले खास प्रोग्राम का इंतजार रहता था.  15 अगस्त की सुबह स्कूलों और अलग-अलग जगहों पर झंडारोहण होता था. बच्चे तिरंगा लेकर कार्यक्रमों में शामिल होते थे. घर लौटने के बाद नाश्ता और खाना होता था.

इसके बाद फिर टीवी का नंबर आता था. सभी लोग एक साथ बैठकर दूरदर्शन पर देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम, गाने और फिल्में देखते थे. वहीं, कुछ लोगों के घरों में तो टीवी भी नहीं होती थी, ऐसे में लोग एक  घर में जमा होते थे. यही वजह है कि उस समय स्वतंत्रता दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय त्योहार नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने का मौका भी होता है. 

दूरदर्शन की फिल्मों का रहता था इंतजार

उस दौरा में टीवी पर दूरदर्शन का बोल बाला चलता था, क्योंकि टीवी पर बस यही चैनल आता था. वहीं, उस समय किसी फिल्म को टीवी पर दिखाया जाना भी एक बड़ा इवेंट जैसा लगता था. आज एक फिल्म पसंद नहीं आई तो कुछ ही सेकंड में दूसरी फिल्म या सीरीज लगाई जा सकती है. लेकिन उस दौर में ऐसे ऑप्शन नहीं होते थे. टीवी पर कोई फेमस फिल्म आने वाली होती थी तो लोग उसका इंतजार करते थे. 15 अगस्त पर देशभक्ति फिल्में स्ट्रीम की जाती थी और लोग साथ बैठकर देखते थे.

AI GENERATED Photograph: (AI GENERATED)

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देशभक्ति फिल्मों से जुड़ी भावनाएं

बता दें, तब 15 अगस्त पर दिखाई जाने वाली फिल्मों में सिर्फ युद्ध और सैनिकों की कहानी नहीं होती थी. इन फिल्मों में देश के लिए कुर्बानी, परिवार, दोस्ती और मुश्किलों से लड़ने जैसी बातें भी दिखाई जाती थीं. यही वजह है कि ये फिल्में लोगों को पसंद आती थीं. इनमें मनोज कुमार की ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ और ‘क्रांति’ से लेकर ‘बॉर्डर’ और ‘तिरंगा’ तक कई फिल्मों ने लोगों के दिल में खास जगह बनाई है. फिल्मों में देशभक्ति दिखाई जाती थी, लेकिन टीवी पर बार-बार आने की वजह से ये फिल्में हर घर तक पहुंच गईं.

खासकर ‘बॉर्डर’ लोगों को खूब पसंद आई. 1997 में आई इस फिल्म के गाने, डायलॉग और युद्ध के सीन आज भी याद किए जाते हैं. 15 अगस्त पर ऐसी फिल्में टीवी पर देखना लोगों के लिए पुरानी यादों को फिर से जीने जैसा होता था. आज की बात करे तो टीवी तो लोग देखते ही नहीं है क्योंकि ओटीटी पर इतने ज्यादा ऑप्शन हैं कि जो फिल्में देखने का मन करे लोग वो देखते हैं. इतना ही नहीं, मूवीज के अलावा देशभक्ति सीरीज भी हैं.

देशभक्ति गानों का था क्रेज

फिल्मों के अलावा 90 के दशक में लोगों को देशभक्ति गाने भी काफी पसंद थे. आज भी 15 अगस्त के मौके पर कई पुराने गाने सुनाई देते हैं. ‘संदेसे आते हैं’, ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’, ‘मेरे देश की धरती’ और ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे गाने तो लोगों की यादों का हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि उस समय लोगों के पास  म्यूजिक सुनना का ऑप्शन नहीं होता था. लोग बस टीवी पर ही गाना सुन पाते थे. वहीं, फिल्मों के बीच आने वाले गाने भी लोगों को पसंद आते थे.

बच्चों के लिए कैसा रहता था स्वतंत्रता दिवस?

90's के बच्चों के लिए 15 अगस्त का मतलब सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि स्कूल के खास कार्यक्रम भी होते थे. बच्चे देशभक्ति गानों पर डांस करते थे, भाषण देते थे और तिरंगा लेकर कार्यक्रम में हिस्सा लेते थे. घर आने के बाद टीवी पर फिल्मों और गानों के जरिए वो देशभक्ति वाला माहौल फिर देखने को मिलता था. उस समय आज की तरह मोबाइल और इंटरनेट पर हजारों वीडियो देखने का ऑप्शन नहीं था. इसलिए टीवी पर आने वाली फिल्मों की इंपोर्टेंस काफी ज्यादा होती थी. 

Independence Day Special Photograph: (AI Generated)

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कितना बदला गया समय

90’s और आज के समय का स्वतंत्रता दिवस मनाने का तरीका काफी बदल गया है. 90 के दशक में 15 अगस्त का मतलब स्कूल में झंडारोहण, देशभक्ति गीत, परेड और टीवी पर दूरदर्शन के खास कार्यक्रम हुआ करता था. परिवार एक साथ बैठकर देशभक्ति फिल्में और गाने देखते थे. जिन घरों में टीवी नहीं होता था, वहां लोग पड़ोसियों के घर जमा हो जाते थे. आज के दौर में इंटरनेट, सोशल मीडिया और ओटीटी ने इसे काफी बदल दिया है. लोग देशभक्ति पोस्ट शेयर करने के साथ फिल्मों, वेब सीरीज और ऑनलाइन कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं। यानी जश्न का तरीका बदला है, लेकिन देश के प्रति जुड़ी भावनाएं आज भी वही हैं.

FAQs

1. 90s में 15 अगस्त कैसे मनाया जाता था?
झंडारोहण, देशभक्ति कार्यक्रमों और टीवी पर फिल्में देखकर लोग जश्न मनाते थे.

2. 90s में 15 अगस्त पर टीवी पर क्या आता था?
दूरदर्शन पर देशभक्ति गाने, कार्यक्रम और फिल्में दिखाई जाती थीं.

3. 90s में कौन सी देशभक्ति फिल्में पसंद थीं?
लोगों को टीवी पर ‘उपकार’, ‘क्रांति’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्में देखने को मिलती थी.

4. 90s में देशभक्ति गानों का इतना क्रेज क्यों था?
टीवी और रेडियो ही मनोरंजन के बड़े साधन होते थे, ऐसे में गाने आसानी से लोगों तक पहुंच जाते थे.

5. आज 15 अगस्त मनाने का तरीका कैसे बदला है?
अब इंटरनेट, ओटीटी, सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट ने मनोरंजन के विकल्प बढ़ा दिए हैं.

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  Sports

Galle Test: टीम इंडिया के सामने Playing 11 की पहेली, 3 स्पिनर या पेसर्स पर कोच Morne Morkel का बड़ा बयान

गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले पहले टेस्ट से दो दिन पहले सबसे ज्यादा चर्चा पिच को लेकर हो रही है। आमतौर पर गॉल की पिच को स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पिच पर जमकर पानी डाला गया है और फिलहाल यह सूखी या पहले ही दिन से गेंद को तेजी से घुमाने वाली सतह नहीं दिख रही है।

भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने भी पिच को अच्छी बताया है। उनका मानना है कि मैच आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव आएगा और गेंदबाजों को बाद के दिनों में अधिक मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयारी की है और अब सबसे जरूरी चीज मानसिक मजबूती, लंबे समय तक बल्लेबाजी करना और सही जगह पर गेंद डालना है।

मोर्केल के मुताबिक, अगर भारत पहले बल्लेबाजी करता है तो उसे बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा। वहीं पहले गेंदबाजी करने की स्थिति में गेंदबाजों को लगातार सही क्षेत्र में गेंद डालकर दबाव बनाना होगा। उनका मानना है कि गॉल में परंपरागत तौर पर पहले दो दिन बल्लेबाजों के लिए बेहतर होते हैं, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम के लिए फैसला काफी अहम रहेगा।

यही स्थिति भारतीय टीम के सामने अंतिम ग्यारह को लेकर भी बड़ी पहेली खड़ी कर रही है। तीन स्पिन गेंदबाजों के साथ उतरना फिलहाल ज्यादा मजबूत विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे टीम को बल्लेबाजी में भी गहराई मिलती है। हेड कोच गौतम गंभीर आमतौर पर गेंदबाजी संयोजन के लिए बल्लेबाजी की मजबूती से समझौता करना पसंद नहीं करते हैं।

मौजूदा समीकरण में रवींद्र जडेजा प्रमुख हरफनमौला खिलाड़ी के तौर पर लगभग तय माने जा रहे हैं, जबकि मोहम्मद सिराज तेज गेंदबाजी की अगुआई कर सकते हैं। कुलदीप यादव का खेलना भी लगभग तय माना जा रहा है। दूसरे तेज गेंदबाज के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ के बीच मुकाबला है, जिसमें प्रसिद्ध कृष्णा फिलहाल थोड़ा आगे दिखाई दे रहे हैं।

मोर्ने मोर्केल ने कहा कि कुलदीप यादव आक्रामक गेंदबाज हैं, जबकि रवींद्र जडेजा अपने अनुभव और सटीक गेंदबाजी के कारण बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक तीनों की गेंदबाजी शैली अलग है और जरूरत के हिसाब से कप्तान शुभमन गिल उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

गौरतलब है कि गॉल में पिछला टेस्ट जून 2025 में श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेला गया था। उस मुकाबले में दोनों टीमों ने 450 से ज्यादा रन के स्कोर बनाए थे। चार शतक और चार अर्धशतक भी लगे थे। श्रीलंका के प्रमुख स्पिनर प्रभात जयसूर्या पहली पारी में 48 ओवर गेंदबाजी करने के बावजूद एक भी विकेट नहीं ले सके थे और दूसरी पारी में भी उन्हें केवल एक विकेट मिला था।

भारत ए की पिछले महीने इसी मैदान पर हुई दो मुकाबलों की श्रृंखला से भी बल्लेबाजों के लिए अच्छी परिस्थितियों के संकेत मिले थे। तेज गेंदबाजों को भी यहां गेंदबाजी में मदद मिली थी। गुरनूर बराड़ ने दूसरे मुकाबले में 10 विकेट लेकर खासा प्रभावित किया था। उन्होंने अगस्त के पहले सप्ताह में टीम से जुड़ने के बाद अभ्यास में लगातार तेज गेंदबाजी की है और टेस्ट पदार्पण के करीब पहुंच गए हैं।

हालांकि, फिलहाल उनका इंतजार थोड़ा और बढ़ सकता है। गॉल में मुकाबला शुरू होने से पहले सभी की नजर टॉस पर रहेगी। इस मैदान पर हाल के वर्षों में पहली और चौथी पारी के स्कोर में बड़ा अंतर देखने को मिला है। ऐसे में पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर बनाना भारत और श्रीलंका दोनों के लिए सफलता का सबसे अहम मंत्र हो सकता है, क्योंकि जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ेगा, स्पिनरों के लिए पिच पर गेंद पकड़ने और ज्यादा घूमने की संभावना बढ़ सकती है।
Fri, 14 Aug 2026 20:32:26 +0530

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