इंदौर में पुलिसकर्मियों ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा, कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने किया शुभारंभ, शहर में गूंजा एकता का संदेश
इंदौर: स्वतंत्रता दिवस के जश्न से पहले देशभर में तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रभक्ति का रंग देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर निकाली जा रही तिरंगा यात्राओं में आम नागरिकों से लेकर नेता, अभिनेता, युवा और बच्चे तक उत्साह के साथ शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को इंदौर कमिश्नरेट पुलिस की ओर से भी तिरंगा यात्रा निकाली गई।
बता दें कि यात्रा के दौरान हाथों में तिरंगा और दिल में देशभक्ति का जज्बा लिए पुलिस जवानों ने शहर की सड़कों पर राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। सुरक्षा जवानों ने बाइक रैली निकालकर माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया और लोगों को एकता, अखंडता व राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
बता दें कि तिरंगा यात्रा की शुरुआत इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चलकर की। उनके पीछे इंदौर कमिश्नरेट के तमाम अधिकारी हाथ में तिरंगा लेकर चलते हुए दिखाई दिए। इसके बाद शहर के सभी थानों की पुलिस बाइक पर राष्ट्रीय ध्वज बांधकर देशभक्ति के गीतों की धुन पर बाइक रैली की शुरू हुई। जो शहरों के मुख्य मार्गों और चौराहों से निकली।
वीर सेनानियों के बलिदान को याद करने के लिए निकाली गई तिरंगा रैली
इस खास अवसर पर पुलिस कमिश्नर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सेनानियों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से यह तिरंगा रैली आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हम सभी संकल्प लेते हैं कि देश की उन्नति और तरक्की में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि बाइक तिरंगा रैली इंदौर के पलासिया स्थित आज तक कमिश्नर ऑफिस से शुरू हुई। रैली गीता भवन, रीगल चौराहा और राजवाड़ा होते हुए वापस कमिश्नर ऑफिस पहुंची। पूरे रैली मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर पुलिस जवानों का स्वागत किया।
15 अगस्त 2026: लाल किले से पहली बार क्यों गूंजेगा 'वंदे मातरम्'? जानिए इस बार क्या रहेगा खास...
Independence Day 2026: इस साल का स्वतंत्रता दिवस समारोह पहले जैसा नहीं होगा. दरअसल, देश इस साल अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस साल लाल किले की प्राचीर से एक नई परंपरा जुड़ने जा रही है. ये पहले बार है जब आजादी के बाद किसी प्रधानमंत्री के भाषण से ठीक पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की सामूहिक प्रस्तुति होगी और वह भी इसके सभी छह छंदों के साथ होगी.
जानकारी के मुताबिक अब तक लाल किले के मुख्य आयोजन में आधिकारिक तौर पर सिर्फ राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया जाता रहा है. लेकिन इस बार से समारोह से पहले वंदे मातरम् की प्रस्तुति होगी. बता दें वंदे मातरम् आजादी की लड़ाई का एक बड़ा प्रेरणा-स्रोत रहा है.
इस बार यह बदलाव क्यों हो रहा है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है साल का संयोग. 2026 में वंदे मातरम् के रचे जाने को 150 साल पूरे हो रहे हैं. आज देश के करोड़ों लोगों के लिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ये रचना राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुकी है. बता दें ये कभी 'आनंदमठ' उपन्यास का हिस्सा था. इस बार 150वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता में इस फैसले की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि स्वाधीनता संग्राम के दौरान इस गीत ने लाखों लोगों में जोश भरा था और अब इसकी विरासत को सम्मान देने के लिए इसे लाल किले की प्राचीर से पहली बार गाया जाएगा.
???? स्वतंत्रता की संध्या, सुरों के संग ????????
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) August 14, 2026
स्वतंत्रता दिवस संध्या पर इंडिया गेट पर
Symphony Band की भव्य संगीतमय प्रस्तुति।
आइए और देशभक्ति की भावना से भरपूर इस संध्या का हिस्सा बनें।
????स्थान: इंडिया गेट
???? समय: 15 अगस्त 2026,
शाम 6 बजे
???? Symphony of Freedom????????
Join us on… pic.twitter.com/EPi92un7mc
क्या वंदे मातरम् को कानूनी दर्जा भी मिला है?
हां, इस साल 1971 के 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम' में संशोधन करते हुए वंदे मातरम् को भी उसी तरह का कानूनी संरक्षण दिया गया है जैसा अब तक सिर्फ राष्ट्रगान को हासिल था. यानी अब अगर कोई जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालता है या इसका अपमान करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकेगी.
इस साल के समारोह की थीम क्या रहेगी?
सरकार ने इस बार के आयोजन के लिए दो प्रमुख विषय तय किए हैं. पहला वंदे मातरम् के 150 वर्ष और दूसरा 'विकसित भारत @2047' के सपने को साकार करने में युवा शक्ति की भूमिका. यानी समारोह की झलक में देश की विरासत और भविष्य, दोनों को साथ लाने की कोशिश दिखेगी.
समारोह में और क्या खास होगा?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
- ध्वजारोहण के साथ परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी जाएगी.
- समारोह स्थल पर फूलों की बारिश की जाएगी.
- 150वीं वर्षगांठ के मौके पर वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर विशेष ध्वज लेकर आसमान में उड़ान भरेगा.
- संभावित बारिश को ध्यान में रखते हुए लाल किले परिसर की नालियों और सीवेज व्यवस्था की भी विशेष सफाई करवाई जा रही है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो.
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