संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी, बांग्लादेश में आतंकवादी सेल बनाने की कोशिश कर रहा अल-कायदा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है. यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है.
आतंकवादी नेटवर्क खड़ा करने के आधार पर चिंता
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुआ हमला एक्यूआईएस से जुड़ा था. साथ ही, संगठन द्वारा बांग्लादेश को आतंकवादी नेटवर्क खड़ा करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है. इस पृष्ठभूमि में निगरानी टीम ने चेतावनी दी है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का खतरा और अधिक बढ़ गया है.
लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी. इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है.
संगठन ने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क स्थापित किए
एक्यूआईएस की स्थापना वर्ष 2014 में अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने की थी. रिपोर्ट में कहा गया है, एक्यूआईएस एक बिखरे हुए समूह से विकसित होकर एक क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन का रूप लेता जा रहा है." इसमें आगे कहा गया कि संगठन ने लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क स्थापित कर लिए हैं तथा अब वह बड़े संगठित ढांचों के बजाय छोटे, विकेंद्रीकृत और बिखरे हुए सेल के माध्यम से काम कर रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के आकलन में इस घटनाक्रम को दक्षिण एशिया के सुरक्षा माहौल में व्यापक गिरावट से जोड़ा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आतंकवादी खतरे का स्तर कुल मिलाकर लगभग समान बना हुआ है, लेकिन साहेल क्षेत्र और दक्षिण एशिया में इसमें वृद्धि हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने से क्षेत्रीय तनाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. इसमें तालिबान प्रशासन पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन जारी रखने का आरोप लगाया गया है. टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ हमले बढ़ा दिए हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हुई है.
पूरे क्षेत्र में बढ़ सकती है सुरक्षा चुनौतियां
तालिबान लगातार आतंकवादी संगठनों को शरण देने के आरोपों से इनकार करता रहा है. हालांकि, सदस्य देशों को चिंता है कि यह संघर्ष चरमपंथी संगठनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में सक्रिय कई आतंकवादी संगठनों की संचालन क्षमता पड़ोसी देशों और मध्य एशिया के लिए लगातार खतरा बनी हुई है. इसमें कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएस-के) के खिलाफ अभियानों और अन्य संगठनों को नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद तालिबान आतंकवाद की समस्या को पूरी तरह दबाने में सफल नहीं हो पाया है.
एक्यूआईएस इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है, जिसे कई हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है. माना जाता है कि एक्यूआईएस के नेता अब भी काबुल में मौजूद हैं और उन्हें कथित रूप से अफगान पहचान पत्र भी जारी किए गए हैं. इससे तालिबान और संगठन के बीच करीबी सहयोग के संकेत मिलते हैं.
--आईएएनएस
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‘चिप्स टू स्टार्टअप्स’ प्रोग्राम में 68,000 से अधिक छात्रों को मिला प्रशिक्षण, डिजाइन इकोसिस्टम भी मजबूत हुआ
नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अब तक ‘चिप्स टू स्टार्टअप्स’ (सी2एस) कार्यक्रम के तहत 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि सी2एस कार्यक्रम का लक्ष्य सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले बीटेक, एमटेक और पीएचडी स्तर के 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवर तैयार करना है।
सीटूएस कार्यक्रम के तहत देशभर के 332 शैक्षणिक संस्थानों को सिनॉप्सिस, कैडेंस, सीमेंस ईडीए, एन्सिस, कीसाइट, सिलवाको, रेनैसास-अल्टियम, एएमडी-जिलिंक्स, एस्टरक्वांटा, कॉम्पकार्टा, कैड्रे और एएमडी-जिलिंक्स जैसी कंपनियों के उन्नत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भाग लेने वाले संस्थानों ने अब तक 254 चिप डिजाइन सफलतापूर्वक ‘टेप-आउट’ किए हैं। इनमें 175 डिजाइन एससीएल, मोहाली में 180एनएम टेक्नोलॉजी नोड पर और 79 डिजाइन विदेशों में स्थित सेमीकंडक्टर फाउंड्री में तैयार किए गए हैं।
आंध्र प्रदेश में सी2एस कार्यक्रम के तहत 23 शैक्षणिक संस्थानों को उन्नत ईडीए टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है, जिनका कुल उपयोग 4.34 लाख से अधिक टूल घंटे रहा है।
प्रसाद ने आगे कहा कि ये परियोजनाएं फिलहाल डिजाइन और विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इनके सेमीकंडक्टर फाउंड्री में टेप-आउट सहित प्रोटोटाइप वैलिडेशन की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (ईएचटीपी) ने भारत के निर्यात-केंद्रित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
ईएचटीपी इकाइयों की संख्या बढ़कर 79 हो गई है और वित्त वर्ष 2025-26 में इनका निर्यात 11,100 करोड़ रुपए से अधिक हो गया।
ईएचटीपी योजना भारत से इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख योजना है। एसटीपीआई, ईएचटीपी योजना के तहत सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के माध्यम से वैधानिक सेवाएं उपलब्ध कराता है। सरकार ने बताया कि ईएचटीपी योजना के तहत कोई फंड आवंटन नहीं किया जाता है।
पात्र ईएचटीपी इकाइयों को मिलने वाले प्रोत्साहन और वित्तीय लाभ ‘विदेश व्यापार नीति 2023’ के प्रावधानों के तहत निर्धारित होते हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
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