गर्मियों में ठंडक और पोषण का मेल 'खरबूजे की खीर', जानें बनाने की विधि
नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में लोग परेशान हैं कि क्या खाएं, क्या नहीं? गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाली मौसमी चीजों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खरबूजे की खीर एक खास मीठा है। जो न सिर्फ स्वाद में हल्की और ताजगी भरी बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
खरबूजे की खीर दूध, चावल और पके हुए खरबूजे के गूदे से तैयार की जाती है। इसका स्वाद हल्का मीठा और क्रीमी होता है, जो गर्मियों में ठंडक का अहसास देता है। लोग इसे घरों में आसानी से बना सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, खरबूजा गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक वरदान माना जाता है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत तक पानी पाया जाता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। गर्मी में जब पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तब खरबूजा इस कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, खरबूजे में विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी बेहतर रखते हैं। फाइबर की मौजूदगी कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है।
आयुर्वेद में खरबूजे को ठंडा प्रभाव वाला फल माना गया है, जो शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और पेट को ठंडक देता है। यह त्वचा के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इसमें मौजूद विटामिन ए और सी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह आंखों की सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खरबूजा कम कैलोरी वाला फल है, जो वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
खरबूजे की खीर भी फायदेमंद होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले दूध को उबालकर उसमें चावल मिलाए जाते हैं और इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसके बाद इसमें कंडेंस्ड मिल्क मिलाकर मिठास बढ़ाई जाती है। अंत में पके हुए खरबूजे के गूदा को डालकर मिश्रण को अच्छी तरह पकाया जाता है। तैयार खीर को ठंडा करके फ्रिज में रखा जाता है और परोसते समय इसे केसर और बादाम से सजाया जाता है। गर्मियों में यह खीर न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा देने का भी काम करती है।
--आईएएनएस
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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सिर्फ 4 सिलेंडरों पर ही मिलेगी सब्सिडी, जानें क्यों सरकार ने लिया ऐसा फैसला?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना यानी PMUY के लाभार्थियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अब लाभार्थियों को सिर्फ पहले चार रिफिल पर ही प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलेगा. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की मानें को उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में चार रिफिल सिलेंडर की खपत होती थी, जिस वजह से ये फैसला किया गया है. बता दें, पहले PMUY के लाभार्थियों को साल में नौ रिफिल पर डीबीटी मिलता था.
PMUY beneficiary will receive the direct benefit transfer of Rs 300 a cylinder on the first four refills. According to Ministry of Petroleum and Natural Gas each year broadly the average annual consumption of a typical Ujjwala household is about four refills a year. Earlier PMUY…
— ANI (@ANI) June 8, 2026
सब्सिडी वाले LPG सिलिंडरों की संख्या को घटाकर किया 4
सोमवार को केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सालाना मिलने वाली सब्सिडी वाले गैस सिलिंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार कर दी. सरकार का कहना है कि ये बदलाव परिवारों द्वारा औसतन इस्तेमाल की जाने वाली गैस की मात्रा को देखते हुए किया है.
साल 2016 में शुरू हुई थी योजना
उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में हुई ती. इस योजना के तहत लाभार्थियों को हर साल 14.2 किलो वाले 12 एलपीडी के सिलेंडर मिलते थे. वह भी 12. पिछले साल सरकार ने इस कोटे को घटाकर सालाना 9 सिलेंडर कर दिया. सरकार ने इसे अब और कम करके चार कर दिया है.
उज्ज्वला लाभार्थियों के सालाना इस्तेमाल की मात्रा के अनुरूप फैसला
न्यूज एजेंसी पीटीआई की मानें तो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण मल खनूजा ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की नई संख्या मोटे तौर पर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों द्वारा सालाना इस्तेमाल की जाने वाली गैस की औसत मात्रा के अनुरूप है.
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