Explainer: खनिज, जमीन और अधिकार की लड़ाई... माइंस एंड मिनरल्स बिल पर केंद्र से क्यों भिड़े हेमंत सोरेन?
Mines and Minerals Bill 2026: संसद का मानसून सत्र खत्म हो गया है. इस सत्र में करीब 11 बिल पास हुए. वैसे तो संसद में जो बिल पेश होकर कानून बनते हैं, उनकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होती है. उसका स्वागत और उसका विरोध भी राष्ट्रीय स्तर पर होती है. लेकिन इस सत्र में पास हुए एक बिल का विरोध दिल्ली से दूर झारखंड में हुआ. बिल है- खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026. सीएम हेमंत सोरेन ने इस कानून का विरोध करते हुए प्रधामंत्री मोदी, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने खनन क्षेत्र में नियमों को आसान बनाने और महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में कई बड़े बदलाव किए हैं. नए प्रावधानों के तहत खनिज-युक्त जमीन की पहचान और उसे नियंत्रित करने में केंद्र की भूमिका बढ़ेगी, जबकि राज्य सरकारों की ओर से खनिज अधिकारों या ऐसी जमीन पर अलग से टैक्स या सेस लगाने की शक्ति सीमित होगी. इसके अलावा, कैप्टिव खानों से खनिज बेचने की 50% सीमा हटा दी गई है, जिससे कंपनियां अपनी जरूरत से ज्यादा खनिज बाजार में बेच सकेंगी. खनन पट्टाधारकों को मौजूदा पट्टे में लिथियम, कोबाल्ट और सोने जैसे अतिरिक्त खनिज शामिल करने की भी अनुमति होगी, जिसके लिए अलग से भुगतान नहीं करना पड़ेगा.
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CM सोरेन का क्या है तर्क?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी विधेयक के विरोध में सहयोग करने की अपील की है. सोरेन ने खास तौर पर प्रस्तावित धारा 9-D पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि इसके लागू होने से राज्य सरकारों के खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने के अधिकार पर केंद्र की शर्तें और सीमाएं लागू हो जाएंगी. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इसका असर पहले लगाए गए सेस के बकाया दावों पर भी पड़ सकता है.
झारखंड पर क्या फर्क पड़ेगा?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 से राज्य की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है. उनका मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि नए प्रावधानों से खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और उनसे राजस्व जुटाने की उसकी क्षमता सीमित हो सकती है. सोरेन का तर्क है कि इससे झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है.
राज्यों के राजस्व अधिकार सीमित होने का दावा
हेमंत सोरेन का कहना है कि संशोधन के बाद खनिज और खनिज-युक्त जमीन पर टैक्स, सेस या दूसरी लेवी लगाने के राज्य सरकार के अधिकार पर केंद्र की शर्तें लागू हो जाएंगी. झारखंड सरकार इसे अपने वित्तीय अधिकारों में दखल के तौर पर देख रही है.
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झारखंड को हजारों करोड़ के नुकसान की आशंका
राज्य सरकार का अनुमान है कि नए प्रावधान लागू होने से झारखंड को हर साल करीब 11,000 से 15,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. सरकार के मुताबिक, खनन से होने वाली आय राज्य के गैर-कर राजस्व का करीब 84.9% हिस्सा है, इसलिए इसका सीधा असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है.
सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
सोरेन सरकार का तर्क है कि राजस्व में इतनी बड़ी कमी आने पर मंइयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी योजनाओं के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो सकता है. इससे कई कल्याणकारी और विकास योजनाएं प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.
राज्यों की स्वायत्तता का मुद्दा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे सिर्फ राजस्व का मामला नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है. उनका कहना है कि जब जमीन और खनिज संसाधन राज्य में हैं, तो इनसे मिलने वाले राजस्व पर फैसला लेने का अधिकार भी राज्य का होना चाहिए. उन्होंने इसे सहकारी संघवाद और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता के लिए चुनौती बताया है.
MMDR Amendment Bill 2026 क्या है?
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का मकसद देश के खनन क्षेत्र में नियमों को आसान बनाना और महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाना है. इसके तहत खनिजों से जुड़े टैक्स और लेवी के नियमों को ज्यादा एकसमान करने की कोशिश की गई है. राज्यों के लिए खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर अपनी तरफ से नया टैक्स, सेस या शुल्क लगाने की शक्ति भी सीमित की गई है. वहीं, कंपनियों को मौजूदा खनन पट्टे में दूसरे खनिज जोड़ने और कैप्टिव खानों से खनिज बेचने में ज्यादा छूट दी गई है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से निवेश बढ़ेगा, खनन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और लिथियम, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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दिल्ली-एनसीआर के 100 ‘पीएम विश्वकर्मा’ लाभार्थी 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए विशेष अतिथि के रूप में निमंत्रित
नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना के 100 लाभार्थियों को यहां लाल किले पर आयोजित होने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखने के लिए विशेष अतिथि के रूप में निमंत्रित किया गया है। एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अनुसार, ये लाभार्थी अपने जीवनसाथी या साथ आने वाले व्यक्ति के साथ राष्ट्रीय समारोह में शामिल होंगे।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने बताया कि विशेष अतिथियों में विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़ी महिला कारीगर भी शामिल हैं। यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने, उनकी आजीविका के अवसरों को मजबूत करने और भारत की पारंपरिक हस्तकलाओं तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान देती है।
समारोह में भागीदारी के तहत इन लाभार्थियों को सम्मान और सराहना के प्रतीक के रूप में स्मृति चिह्न भी प्रदान किए जाएंगे।
‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना सरकार की प्रमुख पहलों में से एक है, जिसे पारंपरिक व्यवसायों में लगे कारीगरों और शिल्पकारों को व्यापक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
इस योजना के तहत कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल उन्नयन, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता, डिजिटल सुविधाओं और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से मदद प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य कारीगरों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण करना, पारंपरिक शिल्प को मजबूत करना और टिकाऊ आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, अब तक इस योजना के तहत 30 लाख पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का पंजीकरण किया जा चुका है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए निमंत्रित लाभार्थी ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना के तहत शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें दर्जी, बढ़ई, सुनार, लोहार और ताला बनाने वाले कारीगरों सहित अन्य पारंपरिक पेशों से जुड़े लोग शामिल हैं।
इसके अलावा, आमंत्रित लाभार्थियों ने योजना के तहत उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाया है। इनमें पंजीकरण, बुनियादी कौशल प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ-साथ कार्यक्रम के तहत उपलब्ध अन्य सहायता भी शामिल है।
मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना के लाभार्थियों की भागीदारी भारत की सांस्कृतिक विरासत में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के योगदान की मान्यता के तौर पर है।
मंत्रालय ने कहा कि लाल किले पर इन लाभार्थियों की मौजूदगी से उन्हें 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को प्रत्यक्ष रूप से देखने और राष्ट्रीय आयोजन में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
--आईएएनएस
एसएके/एएस
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