Jaipur News: स्कूल में पैटीज खाने से छात्र की मौत, इकलौते बेटे को खोकर बेसुध हुए मां-बाप
Jaipur News: जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे 17 साल के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिसके बाद गुरुवार को स्कूल परिसर में जमकर हंगामा हुआ. मृतक छात्र की पहचान बृजमंडल कॉलोनी निवासी प्रिंस सोनी के रूप में की गई है. प्रिंस सोनी की मौत के बाद परिजनों और स्वर्णकार समाज के लोगों ने स्कूल पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
मां-बाप का इकलौता बेटा अब नहीं लौटेगा
प्रिसं सोनी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. 12वीं में पढ़ने वाला प्रिंस घर से सामान्य हालत में स्कूल गया था. मां निर्मला सोनी का कहना है कि प्रिंस अक्सर घर से खाना खाकर जाता था और लंच नहीं लेकर जाता था. वह स्कूल की कैंटीन से ही कुछ न कुछ खाता था. बुधवार सुबह प्रिंस ने करीब 7:30 बजे दूध वाला दलिया खाया था और रोज की तरह स्कूल गया था.
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छात्र का शव लेकर स्कूल पहुंचे परिजन
इस घटना के बाद बड़ी संख्या में मृतक छात्र के परिजन और समाज के लोग प्रिंस के शव लेकर स्कूल पहुंच गए. इस दौरान स्कूल प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया गया. वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और स्कूल में मौजूद सभी टीचरों और विद्यार्थियों से घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त की. जयपुर पुलिस का कहना है कि बच्चे की मौत की असल वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी.
कैंटीन में पैटीज खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक, प्रिंस सोनी बुधवार को घर से अपना टिफिन लेकर स्कूल नहीं गया था. इसलिए, उसने अपने दोस्तों के साथ स्कूल की कैंटीन में मिलने वाली पैटीज खाई. परिवार का दावा है कि पैटीज खाने के कुछ समय बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. तबीयत खराब होने पर प्रिंस क्लास में पहुंचा और टीचर को इसकी जानकारी दी. कुछ देर बाद वह क्लास में ही बेहोश होकर गिर गया. शिक्षक ने तुरंत स्कूल मैनेजमेंट को सूचित किया. इसके बाद उसे क्लास से हटाकर एक कमरे में ले जाया गया. छात्र को तुरंत अस्पताल पहुंचाने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि गंभीर हालत में होने के बावजूद उनके बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया.
परिजनों ने लगाएं गंभीर आरोप?
मृतक बच्चे के परिजन रवि कुमार के मुताबिक, करीब सुबह 11 बजे प्रिंस को कक्षा से दूसरे कमरे में ले जाया गया था. उनका आरोप है कि स्कूल के शिक्षक और व्यवस्थापक उसे वहां लेकर गए और इसके बाद परिवार को फोन किया गया. परिजनों का कहना है कि उन्हें स्कूल की तरफ से करीब 11:45 बजे फोन आया और उन्हीं से गाड़ी लेकर आने के लिए कहा गया, परिवार का आरोप है कि इस दौरान स्कूल मैनेजमेंट ने छात्र को खुद अस्पताल पहुंचाने की कोई तत्काल व्यवस्था नहीं की हुई थी. बाद में परिजनों ने ही प्रिंस को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. ऐसे में अब परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे तत्काल मेडिकल सहायता क्यों नहीं मिली?
बाजार बंद कर स्कूल पहुंचे स्वर्णकार समाज के लोग
अपने समाज के बच्चे प्रिंस की मौत की खबर फैलने के बाद बृजबाल चौराहे के स्वर्णकार समाज के दुकानदारों में गुस्स भर गया. उन्होंने इसके विरोध में बाजार बंद कर दिया और बड़ी संख्या में समाज के लोग स्कूल पहुंचें. लोगों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से बातचीत कर मामला को ठंडा करने के लिए प्रयास किया.
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
जयपुर में हुई यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए दुखद हादसा नहीं है बल्कि उस स्कूल में पढ़ रहे सभी छात्रों के लिए एक खतरनाक स्थिति है. आखिर क्यों स्कूल में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था क्यों नहीं थी. प्रशासन ने स्कूल को मंजूरी देते हुए इन चीजों का ध्यान क्यों नहीं दिया और पुलिस ने स्कूल के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया. अगर किसी छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ती है तो स्कूल मैनेजमेंट के पास फर्स्ट-एड, प्रोफेशन्ल स्टाफ, आपातकालीन वाहन और नजदीकी अस्पताल तक तुरंत पहुंचाने की कोई भी व्यवस्था नहीं थी, जो अब जांच का मुख्य विषय बन गई है.
राजस्थान सरकार से भी मांगी जवाबदेही
जयपुर की इस घटना के बाद राजस्थान में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रोटोकॉल को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम क्या सिर्फ कागजों तक सीमित रहते हैं या फिर उनका पालन भी होता है? इन चीजों की नियमित निगरानी क्यों सुनिश्चित नहीं की जाती है.
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Explainer: खनिज, जमीन और अधिकार की लड़ाई... माइंस एंड मिनरल्स बिल पर केंद्र से क्यों भिड़े हेमंत सोरेन?
Mines and Minerals Bill 2026: संसद का मानसून सत्र खत्म हो गया है. इस सत्र में करीब 11 बिल पास हुए. वैसे तो संसद में जो बिल पेश होकर कानून बनते हैं, उनकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होती है. उसका स्वागत और उसका विरोध भी राष्ट्रीय स्तर पर होती है. लेकिन इस सत्र में पास हुए एक बिल का विरोध दिल्ली से दूर झारखंड में हुआ. बिल है- खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026. सीएम हेमंत सोरेन ने इस कानून का विरोध करते हुए प्रधामंत्री मोदी, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने खनन क्षेत्र में नियमों को आसान बनाने और महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में कई बड़े बदलाव किए हैं. नए प्रावधानों के तहत खनिज-युक्त जमीन की पहचान और उसे नियंत्रित करने में केंद्र की भूमिका बढ़ेगी, जबकि राज्य सरकारों की ओर से खनिज अधिकारों या ऐसी जमीन पर अलग से टैक्स या सेस लगाने की शक्ति सीमित होगी. इसके अलावा, कैप्टिव खानों से खनिज बेचने की 50% सीमा हटा दी गई है, जिससे कंपनियां अपनी जरूरत से ज्यादा खनिज बाजार में बेच सकेंगी. खनन पट्टाधारकों को मौजूदा पट्टे में लिथियम, कोबाल्ट और सोने जैसे अतिरिक्त खनिज शामिल करने की भी अनुमति होगी, जिसके लिए अलग से भुगतान नहीं करना पड़ेगा.
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CM सोरेन का क्या है तर्क?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी विधेयक के विरोध में सहयोग करने की अपील की है. सोरेन ने खास तौर पर प्रस्तावित धारा 9-D पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि इसके लागू होने से राज्य सरकारों के खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने के अधिकार पर केंद्र की शर्तें और सीमाएं लागू हो जाएंगी. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इसका असर पहले लगाए गए सेस के बकाया दावों पर भी पड़ सकता है.
झारखंड पर क्या फर्क पड़ेगा?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 से राज्य की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है. उनका मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि नए प्रावधानों से खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार और उनसे राजस्व जुटाने की उसकी क्षमता सीमित हो सकती है. सोरेन का तर्क है कि इससे झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है.
राज्यों के राजस्व अधिकार सीमित होने का दावा
हेमंत सोरेन का कहना है कि संशोधन के बाद खनिज और खनिज-युक्त जमीन पर टैक्स, सेस या दूसरी लेवी लगाने के राज्य सरकार के अधिकार पर केंद्र की शर्तें लागू हो जाएंगी. झारखंड सरकार इसे अपने वित्तीय अधिकारों में दखल के तौर पर देख रही है.
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झारखंड को हजारों करोड़ के नुकसान की आशंका
राज्य सरकार का अनुमान है कि नए प्रावधान लागू होने से झारखंड को हर साल करीब 11,000 से 15,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. सरकार के मुताबिक, खनन से होने वाली आय राज्य के गैर-कर राजस्व का करीब 84.9% हिस्सा है, इसलिए इसका सीधा असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है.
सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
सोरेन सरकार का तर्क है कि राजस्व में इतनी बड़ी कमी आने पर मंइयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी योजनाओं के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो सकता है. इससे कई कल्याणकारी और विकास योजनाएं प्रभावित होने की आशंका जताई गई है.
राज्यों की स्वायत्तता का मुद्दा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे सिर्फ राजस्व का मामला नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है. उनका कहना है कि जब जमीन और खनिज संसाधन राज्य में हैं, तो इनसे मिलने वाले राजस्व पर फैसला लेने का अधिकार भी राज्य का होना चाहिए. उन्होंने इसे सहकारी संघवाद और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता के लिए चुनौती बताया है.
MMDR Amendment Bill 2026 क्या है?
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का मकसद देश के खनन क्षेत्र में नियमों को आसान बनाना और महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाना है. इसके तहत खनिजों से जुड़े टैक्स और लेवी के नियमों को ज्यादा एकसमान करने की कोशिश की गई है. राज्यों के लिए खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर अपनी तरफ से नया टैक्स, सेस या शुल्क लगाने की शक्ति भी सीमित की गई है. वहीं, कंपनियों को मौजूदा खनन पट्टे में दूसरे खनिज जोड़ने और कैप्टिव खानों से खनिज बेचने में ज्यादा छूट दी गई है. सरकार का कहना है कि इन बदलावों से निवेश बढ़ेगा, खनन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और लिथियम, कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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