नगर निगमों-नगरपालिकाओं को मिले ₹3,850 करोड़, खुद CM भूपेंद्र पटेल ने बांटे फंड
गुजरात सरकार ने राज्य के शहरों और महानगरों में विकास कार्यों को नई गति देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने नगर निगमों और नगरपालिकाओं को कुल ₹3,850 करोड़ के विकास कार्यों के लिए चेक वितरित किए. सरकार का जोर ऐसे शहरी विकास पर है, जिसमें नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, पारदर्शी सेवाएं और तकनीक आधारित व्यवस्था मिल सके.
17 नगर निगमों को ₹2,992 करोड़ वितरित
स्वर्णिम जयंती मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के तहत 17 नगर निगमों को ₹2,992 करोड़ और 152 नगरपालिकाओं को ₹858 करोड़ दिए गए हैं. इनमें अहमदाबाद नगर निगम को सबसे अधिक ₹870 करोड़, सूरत को ₹770 करोड़, वडोदरा को ₹285 करोड़ और राजकोट को ₹232 करोड़ मिले हैं.
पुराने कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत- सीएम
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कहा कि विकास के लिए मिले फंड का बेहतर और समयबद्ध इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने केवल नए प्रोजेक्ट शुरू करने के बजाय पुराने और पूरे हो चुके कार्यों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई. उन्होंने निर्माणाधीन सड़कों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए.
भूपेंद्र पटेल ने ग्रीन और पर्यावरण अनुकूल शहरों के विकास पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि नई टाउन प्लानिंग (TP) योजनाओं में करीब एक प्रतिशत जमीन पेड़ लगाने के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है. इस जमीन पर पार्क, ऑक्सीजन पार्क और हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे.
पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाना सरकार का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आगे बढ़ाना है. स्वच्छता, हरित क्षेत्र, बेहतर सड़कें और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के जरिए गुजरात के शहरों को अधिक सुविधाजनक और रहने योग्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत शहरी विकास ‘विकसित गुजरात’ और ‘विकसित भारत’ की नींव को और मजबूत करेगा. सरकार के अनुसार, इन योजनाओं से शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ नागरिकों की Ease of Living भी बेहतर होगी.
Jaipur News: स्कूल में पैटीज खाने से छात्र की मौत, इकलौते बेटे को खोकर बेसुध हुए मां-बाप
Jaipur News: जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे 17 साल के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिसके बाद गुरुवार को स्कूल परिसर में जमकर हंगामा हुआ. मृतक छात्र की पहचान बृजमंडल कॉलोनी निवासी प्रिंस सोनी के रूप में की गई है. प्रिंस सोनी की मौत के बाद परिजनों और स्वर्णकार समाज के लोगों ने स्कूल पर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
मां-बाप का इकलौता बेटा अब नहीं लौटेगा
प्रिसं सोनी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. 12वीं में पढ़ने वाला प्रिंस घर से सामान्य हालत में स्कूल गया था. मां निर्मला सोनी का कहना है कि प्रिंस अक्सर घर से खाना खाकर जाता था और लंच नहीं लेकर जाता था. वह स्कूल की कैंटीन से ही कुछ न कुछ खाता था. बुधवार सुबह प्रिंस ने करीब 7:30 बजे दूध वाला दलिया खाया था और रोज की तरह स्कूल गया था.
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छात्र का शव लेकर स्कूल पहुंचे परिजन
इस घटना के बाद बड़ी संख्या में मृतक छात्र के परिजन और समाज के लोग प्रिंस के शव लेकर स्कूल पहुंच गए. इस दौरान स्कूल प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया गया. वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और स्कूल में मौजूद सभी टीचरों और विद्यार्थियों से घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त की. जयपुर पुलिस का कहना है कि बच्चे की मौत की असल वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी.
कैंटीन में पैटीज खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक, प्रिंस सोनी बुधवार को घर से अपना टिफिन लेकर स्कूल नहीं गया था. इसलिए, उसने अपने दोस्तों के साथ स्कूल की कैंटीन में मिलने वाली पैटीज खाई. परिवार का दावा है कि पैटीज खाने के कुछ समय बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. तबीयत खराब होने पर प्रिंस क्लास में पहुंचा और टीचर को इसकी जानकारी दी. कुछ देर बाद वह क्लास में ही बेहोश होकर गिर गया. शिक्षक ने तुरंत स्कूल मैनेजमेंट को सूचित किया. इसके बाद उसे क्लास से हटाकर एक कमरे में ले जाया गया. छात्र को तुरंत अस्पताल पहुंचाने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि गंभीर हालत में होने के बावजूद उनके बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया.
परिजनों ने लगाएं गंभीर आरोप?
मृतक बच्चे के परिजन रवि कुमार के मुताबिक, करीब सुबह 11 बजे प्रिंस को कक्षा से दूसरे कमरे में ले जाया गया था. उनका आरोप है कि स्कूल के शिक्षक और व्यवस्थापक उसे वहां लेकर गए और इसके बाद परिवार को फोन किया गया. परिजनों का कहना है कि उन्हें स्कूल की तरफ से करीब 11:45 बजे फोन आया और उन्हीं से गाड़ी लेकर आने के लिए कहा गया, परिवार का आरोप है कि इस दौरान स्कूल मैनेजमेंट ने छात्र को खुद अस्पताल पहुंचाने की कोई तत्काल व्यवस्था नहीं की हुई थी. बाद में परिजनों ने ही प्रिंस को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. ऐसे में अब परिवार का सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे तत्काल मेडिकल सहायता क्यों नहीं मिली?
बाजार बंद कर स्कूल पहुंचे स्वर्णकार समाज के लोग
अपने समाज के बच्चे प्रिंस की मौत की खबर फैलने के बाद बृजबाल चौराहे के स्वर्णकार समाज के दुकानदारों में गुस्स भर गया. उन्होंने इसके विरोध में बाजार बंद कर दिया और बड़ी संख्या में समाज के लोग स्कूल पहुंचें. लोगों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से बातचीत कर मामला को ठंडा करने के लिए प्रयास किया.
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
जयपुर में हुई यह घटना सिर्फ एक परिवार के लिए दुखद हादसा नहीं है बल्कि उस स्कूल में पढ़ रहे सभी छात्रों के लिए एक खतरनाक स्थिति है. आखिर क्यों स्कूल में मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था क्यों नहीं थी. प्रशासन ने स्कूल को मंजूरी देते हुए इन चीजों का ध्यान क्यों नहीं दिया और पुलिस ने स्कूल के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया. अगर किसी छात्र की अचानक तबीयत बिगड़ती है तो स्कूल मैनेजमेंट के पास फर्स्ट-एड, प्रोफेशन्ल स्टाफ, आपातकालीन वाहन और नजदीकी अस्पताल तक तुरंत पहुंचाने की कोई भी व्यवस्था नहीं थी, जो अब जांच का मुख्य विषय बन गई है.
राजस्थान सरकार से भी मांगी जवाबदेही
जयपुर की इस घटना के बाद राजस्थान में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रोटोकॉल को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम क्या सिर्फ कागजों तक सीमित रहते हैं या फिर उनका पालन भी होता है? इन चीजों की नियमित निगरानी क्यों सुनिश्चित नहीं की जाती है.
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