₹2 से शुरू हुआ था फिरोजाबाद की 'सुराही वाली कुल्फी' का सफर, मुंबई-दिल्ली तक है स्वाद के दीवाने, 3 पीढ़ियों से नहीं बदला टेस्ट
Firozabad Famous Kulfi: कांच की चूड़ियों के लिए दुनिया भर में मशहूर सुहागनगरी फिरोजाबाद का स्वाद भी बेहद अनोखा है. अगर आप यहां हैं और आपने घंटाघर के पास मिलने वाली खास कुल्फी का स्वाद नहीं चखा, तो आपका सफर अधूरा है. पिछले 40 सालों से अपनी शुद्धता और पारंपरिक स्वाद का जादू बिखेर रही यह कुल्फी आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. मिट्टी के कुल्हड़ और सुराही में परोसी जाने वाली इस रबड़ेदार कुल्फी का क्रेज ऐसा है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश के बड़े-बड़े महानगरों से आने वाले लोग भी इसके दीवाने हैं. आइए जानते हैं क्या है इस 40 साल पुरानी कुल्फी की खासियत.
कौन है ‘चलत मुसाफिर मोह लिया रे’ गाने की पिजड़े वाली मुनिया? मौज में गाते हैं गाना तो जान लें छिपा अर्थ
चलत मुसाफिर मोह लिया रे पिंजड़े वाली मुनिया... ये गाना किसी की तारीफ में गाया मौज-मस्ती भरा लगता है लेकिन इस गाने के पीछे एक गहरा अर्थ छिपा है जो तीसरी कसम फिल्म की कहानी से जुड़ा है।
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