बॉक्स ऑफिस के बाद OTT पर धूम मचाएंगी Karuppu, जानें कब और कहां कर सकते हैं स्ट्रीम
सूर्या की फिल्म करुप्पू ने इस साल बॉक्स ऑफिस पर खूब धूम मचाई है। यह सबसे दमदार परफॉर्मेंस देने वाली फिल्म साबित हुई है। आरजे बालाजी के निर्देशन में बनी यह फिल्म जब से रिलीज हुई है तब से दर्शक इस पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं। बड़े पर्दे पर धूम मचाने के बाद अब यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने को तैयार है।
तेलुगू सिनेमा के दर्शकों के लिए भी इसे अलग टाइटल से रिलीज किया गया था। इसका परफॉर्मेंस काफी अच्छा रहा और अब यह ऑनलाइन रिलीज की जाने वाली है। चलिए जान लेते हैं कि यह ओटीटी पर कब और कहां रिलीज होने वाली है।
ओटीटी पर कहां देखें Karuppu
ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स के बैनर तले बनाई गई यह फिल्म इस साल की सबसे बड़ी तमिल हिट बनकर उभरी है। 12 जून से इसे अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जाएगा। प्लेटफॉर्म की तरफ से सोशल मीडिया पर प्रमोशन कैंपेन के जरिए इसकी अनाउंसमेंट की गई है।
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किन भाषाओं में होगी रिलीज
फिल्म की रिलीज को लेकर जो जानकारी सामने आई है। उसके मुताबिक यह कई भाषाओं में उपलब्ध रहने वाली है। तमिल के अलावा इसे मलयालम, हिंदी और कन्नड़ में भी पेश किया जाएगा। तेलुगू में ये फिल्म वीरभद्रुडु टाइटल से रिलीज होगी।
अभी भी जारी है कमाई
फिल्म की परफॉर्मेंस की बात करें तो ये अपनी रिलीज के चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है। इतने दिनों के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई लगातार जारी है। सैकनिल्क के रिपोर्ट के मुताबिक 24वें दिन फिल्म का कलेक्शन 1.75 करोड़ रहा। 23 वें दिन ये कलेक्शन 1.47 करोड़ था। भारत में इसका नेट कलेक्शन 193.40 करोड़ पहुंच गया है। जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन 223.54 करोड़ है। ओवरसीज मार्केट में ये फिल्म अब तक 80.60 करोड़ कमा चुकी है। फिल्म का ओवरऑल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 304.14 करोड़ पहुंच गया है।
बुरहानपुर में आंधी का कहर, 2 लाख से ज्यादा केले के पौधे गिरे, किसानों को करोड़ों का नुकसान
बुरहानपुर जिले में एक बार फिर मौसम की मार किसानों पर भारी पड़ गई है। शुक्रवार शाम और शनिवार को चली तेज आंधी और बारिश ने केले की तैयार फसल को बुरी तरह प्रभावित किया। सबसे ज्यादा नुकसान जैनाबाद क्षेत्र में हुआ, जहां दो लाख से अधिक केले के पौधे जमीन पर गिर गए। जिले के कई किसानों की महीनों की मेहनत कुछ घंटों में बर्बाद हो गई। किसानों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है और अब उन्हें आर्थिक नुकसान की भरपाई की चिंता सता रही है।
जानकारी के अनुसार, जैनाबाद, इच्छापुर, भोटा, वारोली और आसपास के कई गांवों में केले की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। कई किसानों ने फसल तैयार होने के बाद बाजार में बेचने की योजना बनाई थी, लेकिन तेज हवाओं ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दे दिया। स्थानीय किसानों का कहना है कि पिछले दस दिनों में पांच बार आंधी और बारिश का सामना करना पड़ा है, जिससे फसलों की हालत लगातार खराब होती गई। अब कई खेतों में केले के पौधे पूरी तरह गिर चुके हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
केले की फसल पर मौसम की मार, किसानों की बढ़ी चिंता
बुरहानपुर को मध्य प्रदेश का प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में किसान केले की खेती पर निर्भर हैं और उनकी आय का मुख्य स्रोत यही फसल है। ऐसे में मौसम से हुए नुकसान का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसानों की पूरी आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केले का पौधा तेज हवाओं के प्रति संवेदनशील होता है। जब फसल तैयार होने की स्थिति में होती है, तब तेज आंधी पौधों को आसानी से गिरा सकती है।
इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कई खेतों में पौधे जड़ों सहित उखड़ गए, जबकि कई जगह फल लगे पौधे टूटकर गिर गए। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में एक साल तक मेहनत और लाखों रुपये का खर्च आता है। ऐसे में अचानक हुए नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा। कई किसानों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज और शीघ्र मुआवजे की मांग की है ताकि उन्हें इस संकट से बाहर निकलने में मदद मिल सके।
फसल सर्वे शुरू, मुआवजे की उम्मीद पर टिकी किसानों की नजर
नुकसान की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने फसल सर्वे का काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर कई टीमों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
वहीं, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की और अधिकारियों से जल्द कार्रवाई करने की बात कही। दूसरी ओर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी सर्वे कार्य की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
किसानों का कहना है कि सर्वे के साथ-साथ राहत राशि का वितरण भी तेजी से होना चाहिए। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में भी कुछ इलाकों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में किसानों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक सर्वे और सरकार की राहत घोषणा पर टिकी हुई है, जिससे प्रभावित किसानों को कुछ राहत मिल सके।
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