Independence Day 2026 Slogans: 'इंकलाब जिंदाबाद'... 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति जगाने वाले 25 नारे, पोस्टर पर लिखते ही भर जाएगा जोश
Independence Day 2026 Slogans: 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए बेहद खास होता है. इस दिन पर साल 1947 में भारत आजाद हुआ था. आजाद भारत में देशवासियों ने सांस ली थी. इस दिन लालकिले के प्राचीर में शान से तिरंगे को लहराया गया था. आजादी के लिए सिर्फ लोगों का बलिदान ही काफी नहीं था बल्कि आजादी से जुड़े नारों ने भी अंग्रेजी हुकुमत को कड़ी टक्कर दी थी. इंकलाब जिंदाबाद, वंदे मातरम्, अंग्रेजों भारत छोड़ों, तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा! से लेकर सत्यमेव जयते. ये ऐसे नारे हैं जो आज भी लोगों के जहन में बसे हैं. इन्हें बोलने से ही जोशभर जाता है.
इन नारों को आप स्कूल या कॉलेज के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में बोल सकते हैं. इनके पोस्टर्स भी बच्चों से बनवाएं जा सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही ऐतिहासिक स्लोगन्स.
15 अगस्त पर स्कूल और कॉलेज में बोले जाने वाले मशहूर नारे (15th August 2026 Slogans)
- जय हिंद
- वंदे मातरम्
- भारत माता की जय
- इंकलाब जिंदाबाद
- मेरा देश, मेरी पहचान!
- करो या मरो!
- सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा!
पोस्टर्स के लिए देशभक्ति से भरे नारे
1.सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा-हमारा,
सारे जहां से अच्छा
हम बुलबुले है इसकी, ये गुलस्तिां हमारा-हमारा,
सारे जहां से अच्छा
2.गुंज रहा है दुनिया में भारत का नगाड़ा
चमक रहा आसमान में देश का सितारा,
आजादी के दिन आओ मिलके करे
दुआ की बुलंदी पर लहराता रहे तिरंगा हमारा...
3.गली-गली में नारा है,
हिंदुस्तान हमारा है
4.जब तक सूरज-चांद रहेगा,
हिंदुस्तान का नाम रहेगा
5.कश्मीर से कन्याकुमारी,
भारत माता एक हमारी
6.वतन हमारा सबसे प्यारा,
भारत देश हमारा सबसे न्यारा
7.जय जवान, जय किसान
8.1-2-3-4
भारत मां की जय-जयकार
9.शहीदों का बलिदान अमर है,
भारत का हर वीर अमर है
10.एक देश, एक सम्मान
एक तिरंगा, हमारी शान
11.झंड़ा ऊंचा रहे हमारा, विजय विश्व तिरंगा प्यारा
जान से प्यारा हिंदुस्तान हमारा, झंड़ा ऊंचा हमारा
12.मेरा भारत
मेरा गौरव
13.हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा!
14.आन तिरंगा, शान तिरंगाै
सबको जोड़े एक तिरंगा
उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम
एक डोर में जोड़े तिरंगा
15.तिरंगे की आन में जीना, भारत की शान में मरना
16.भारत की मिट्टी का सम्मान, यही है हर हिंदुस्तानी की पहचान
17.राष्ट्र सर्वोपरि, यही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
18.हर तुफान को मोड़ दे जो हिंदुस्तान से टकराए
चाहे तेपा सीना हो जाए छलनी पर तिरंगा ऊंचा ही लहराएं
19.इतना ही कहना काफी नहीं कि भारत हमारा मान है,
अपना फर्ज निभाओं कि देश कहे हम है उसकी शान
20.करते हैं हम वतन से प्यार,
स्वतंत्रता है हमारा अधिकार
21.स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है
22.बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती,
क्रांति की तलवार विचारों की
सान पर तेज होती है.
23.चादी रातों में चमकात है सितारा
यहां जवान बनते हैं वीर शहीद हमारा
24.जिंदगी तो अपने दम पर जी जाती है,
कंधों पर तो जनाजे उठाए जाते हैं
25.आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे
26.गर्व से कहो- हम हिंदुस्तानी हैं
Uncovered With Manoj Gairola: 1962 नहीं 1959 में भारत और चीन के बीच चली थी पहली गोली, अरुणाचल प्रदेश में ‘ड्रैगन’ के घुसपैठ की कहानी
Uncovered With Manoj Gairola: क्या आप जानते हैं...भारत और चीन के बीच पहली गोली कब और कहां चली थी? आप सोच रहे होंगे 1962 की जंग में, लेकिन नहीं, पहली गोली 25 अगस्त 1959 में चली थी और जगह थी अरुणाचल प्रदेश. जिसे उस वक्त NEFA कहते थे. जहां ये पहली गोली चली थी, उसी इलाके में चीनी फौज के फिर से घुसपैठ करने की खबर है. अरुणाचल की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी पीपीए ने दावा किया है कि चीन ने भारतीय फौजियों की पेट्रोलिंग को ब्लॉक कर दिया है. यहां तक कि स्थानीय लोगों को भी उस इलाके में जानवरों को चराने से रोक दिया है. सोशल मीडिया पर भी वहां के लोग चीनी घुसपैठ की बात कर रहे हैं.
अनकवर्ड के आज के एपिसोड में- भारत और चीन के बीच तनाव की के सेंटर अरुणाचल प्रदेश की. अरुणाचल को लेकर एक साथ दो घटनाएं हुई हैं. एक तरफ तो अरुणाचल में चीनी घुसपैठ और दूसरी तरफ कुछ जगहों के नामकरण को लेकर भारत और चीन के बीच Diplomatic Tension. खास बात ये है कि ये सब तब हो रहा है, जब अगले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना है.
1962 में असम का हिस्सा था अरुणाचल
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है. इस बॉर्डर के पूर्वोत्तर पर भारत का राज्य है- अरुणाचल प्रदेश. चीन अक्सर इस पर अपना दावा पेश करता रहता है. यहां तक की 1962 की जंग में तो चीन ने इसका अधिकांश हिस्सा अपने कब्जे में भी ले लिया था. तब अरुणाचल को NEFA कहते थे और ये असम राज्य का हिस्सा था. जंग खत्म होने के बाद चीन अपने इलाके में वापस लौट गया. लेकिन इस जंग से पहले 1959 में चीन ने NEFA के अपर सुबनसिरी जिले के लोंगजू इलाके में हमला करके जो जगह कब्जे में ली थी, उसे आज तक नहीं छोड़ा.
अब जिस इलाके से चीनी घुसपैठ की खबर आ रही है, वह इसी अपर सुवनसिरी जिले में है, ये इलाका है ताक्सिंग. यह भारत का अंतिम सीमावर्ती गांव है. अब वाकई घुसपैठ हुई है या नहीं. और अगर हुई है तो कहां तक हुई है. इसका जवाब या तो सरकार दे सकती है या फिर सेना. लेकिन इससे पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर अरुणाचल पर चीन की बुरी नजर क्यों टिकी हुई है? क्यों भारत और चीन के बीच सबसे पहला झगड़ा अरुणाचल में ही हुआ था.
भारत चीन की 3,488 किमी. लंबी सीमारेखा में से करीब 1,200 किमी की सीमा अरुणाचल प्रदेश से लगती है. दरअसल, ये सीमा चीन से नहीं बल्कि तिब्बत से लगती है, जो कभी एक आजाद मुल्क हुआ करता था. 1914 में ब्रिटिश राज के दौरान शिमला में एक समझौता हुआ. इसके तहत भारत और तिब्बत के बीच की सीमा तय की गई. इसे मैकमोहन लाइन कहते हैं. अरुणाचल प्रदेश का पूरा इलाका भारत में माना गया. इसमें कुछ जगह ऐसी हैं जहां की संस्कृति और धर्म दोनों तिब्बत से मिलते हैं. जैसे कि तवांग. तवांग वो जगह है जहां 1683 में तिब्बत के सबसे बड़े धर्म गुरु, छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो पैदा हुए थे. तिब्बतियों के बीच ल्हासा के बाद सबसे ज़्यादा महत्व तवांग मॉनेस्ट्री का ही है.
1947 में भारत आजाद हुआ और मैकमोहन लाइन को ही भारत और तिब्बत के बीच की सीमा माना गया. 1950 के दशक में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया. और वो भारत का पड़ोसी बन गया. उसने मैकमोहन लाइन को मानने से इनकार कर दिया. चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश, और खासतौर से तवांग, तिब्बत का दक्षिणी भाग हैं. और इस पर उसका अधिकार है.
दलाई लामा के भारत आने से चीन नाराज
चीन के तिब्बत पर अक्रमण के दौरान वहाँ के धर्म गुरु - 14वें दलाई लामा - भागकर सबसे पहले तवांग ही आए थे. वो तारीख थी 31 मार्च 19 सौ उनसठ. इसके कुछ ही महीने बाद भारत औऱ चीन के बीच पहली बार गोली चली थी. यानी दलाई लामा के भारत आने से चीन इतना नाराज था, कि उसने हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे को किनारे करके सीधे गोली की बोली बोलना शुरू कर दिया. बात आगे बढ़ी तो 1962 का युद्ध भी हुआ. ईस्टर्न सेक्टर में चीनी फौज लगभग पूरा अरुणाचल जीतकर असम के मैदानों तक पहुंच गई थी. लेकिन फिर अचानक से चीन ने खुद ही सीजफायर का ऐलान किया. और फौज वापस बुला ली.
चीन ने फौज वापस क्यों बुलाई और 1962 की जंग में भारत से कहां गलतियां हुईं. इसके बारे में किसी और एपिसोड में विस्तार से बात करेंगे. फिलहाल इतना समझते हैं कि 1962 के बाद भी चीन की निगाहे अरुणाचल पर टिकी रही. 1975 में तवांग के तुलुंग ला में चीनी सैनिकों ने बॉर्डर क्रॉस कर घात लगाकर भारत के फौजियों पर हमला किया. इस हमले में 4 सैनिक शहीद हुए.
कम समय में भारी संख्या में तैनात इंडियन आर्मी
इसके बाद 1986 और 87 में तवांग की समदोरोंग चू घाटी में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करके पक्के बंकर और तंबू लगा दिए. जवाब में इंडियन आर्मी ने 'ऑपरेशन फाल्कन' चलाया और बेहद कम समय में भारी संख्या में फौज तैनात कर दी. कई महीनों तक दोनों देशों की फौज आमने-सामने रहीं. बाद में चीन को वापस लौटना पड़ा. इसके अलावा 2022 में भी चीनी फौज ने तवांग सेक्टर के यांगत्से में घुसपैठ की कोशिश की. भारतीय जवानों ने चीनी सेना का डटकर मुकाबला किया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर किया. इस आमने-सामने की लड़ाई में कटीले डंडों का इस्तेमाल हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक घायल हुए थे.
चीन से जुड़ा रोचक तथ्य
अब आपको एक और इंट्रस्टिंग बात बताते हैं. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो बार भारत आए हैं. 2014 में जब वो भारत आए थे, तब उनके आने से पहले ही उनकी फौज ने लद्दाख में घुसपैठ कर दी थी. इसी तरह 2019 में जब वो भारत यात्रा पर आए थे, तब उनके जाने के बाद गलवान में घुसपैठ की गई थी. अगले महीने ब्रिक्स की मीटिंग में उनके भारत आने की बात कही जा रही है. और उससे पहले ही अरुणाचल में घुसपैठ की खबर आ गई है. अब ये शी जिनपिंग का स्टाइल है या इत्तफाक, ये तो नहीं कहा जा सकता. लेकिन इतना जरूर है कि 1962 के बाद, जब-जब चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ की कोशिश की, तब-तब उसे जवाब दिया गया. और अगर इस बार भी घुसपैठ हुई है, तो उम्मीद है कि इस बार भी उसे जवाब मिलेगा.
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