Cooler Tips: गर्मी में नहीं मिल रही कूलर से ठंडक? अपनाएं ये आसान टिप्स, AC जैसी मिलेगी तगड़ी कूलिंग
Cooler Tips: मध्यप्रदेश में गर्मी अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है. ऐसे मौसम में जिन घरों में AC नहीं है, वहां कूलर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है. लेकिन कई बार कूलर चलाने के बावजूद कमरे में ठंडक नहीं मिलती, बल्कि उमस और गर्म हवा जैसी स्थिति बनने लगती है. ऐसे में कुछ आसान सेटिंग अपनाकर आप भी कूलर को काफी हद तक AC जैसी ठंडी हवा देने लायक बना सकते हैं. (रिपोर्ट: राकेश पटेल/सीधी)
करिश्मा कपूर ने बताई वेब सीरीज 'ब्राउन' की चुनौतियां:कॉप रीटा की भूमिका मेरे करियर में सबसे चुनौतीपूर्ण और सीख देने वाली रही
करिश्मा कपूर अब ओटीटी पर अपने नए अवतार में नजर आ रही हैं। जी-5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में उन्होंने अपने किरदार, कोलकाता में मुश्किलों से भरी शूटिंग आदि पर खुलकर बात की... इस प्रोजेक्ट का हिस्सा कैसे बनीं? शुरुआत में मैंने इस प्रोजेक्ट के लिए साफ मना कर दिया था। कहानी और किरदार पसंद आए थे लेकिन 50-60 दिन कोलकाता में शूटिंग करने को लेकर मैं सहज नहीं थी। उस दौरान जी स्टूडियोज की टीम बार-बार मुझसे मिलती रही। मैं महबूब स्टूडियो में शूट कर रही थी, तब भी वे पहुंचे। आखिरकार मैंने 20 मिनट निकालकर निर्देशक अभिनय देव और टीम से बात की। रीटा ब्राउन के किरदार के बारे में सुनते ही मेरा नजरिया बदल गया और मैंने तुरंत हां कह दिया। रीटा ब्राउन जैसा किरदार निभाने के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? रीटा मुझसे बिल्कुल अलग है। वह अल्कोहलिक है, चेन स्मोकर है और दवाइयों पर निर्भर रहती है। हमारा मकसद एक ऐसी महिला को दिखाना था जो अंदर से पूरी तरह टूट चुकी है। हमने मेकअप तक का इस्तेमाल नहीं किया। लगातार सिगरेट पीने की वजह से उसके होंठ तक खराब दिखाए गए हैं। यह मेरे करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण और सीख देने वाली भूमिका रही। यह वर्दीधारी रोल बाकी पुलिस किरदारों से कितना अलग है? यह कोई टिपिकल फिट और एक्शन से भरपूर पुलिस अधिकारी नहीं है। शुरुआत में रीटा इतनी अनफिट है कि ठीक से दौड़ भी नहीं पाती। हमने दिखाया है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से कितनी टूटी हुई है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है और मर्डर मिस्ट्री खुलती है, उसका व्यक्तित्व भी बदलता है। उसका खुद को फिर से संभालना और मजबूत बनना ही इस कहानी की आत्मा है। कोलकाता में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? सच कहूं तो हम कोलकाता की सर्दियां, क्रिसमस का माहौल और शहर की खूबसूरती को कैमरे में कैद करना चाहते थे लेकिन कोविड की वजह से पूरा शेड्यूल बदल गया और जब हम वहां पहुंचे, तब भीषण गर्मी पड़ रही थी। तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच था। उस मौसम में रियल लोकेशंस पर शूटिंग करना आसान नहीं था। हमें लंबे-लंबे चेज सीक्वेंस, इन्वेस्टिगेशन वाले सीन और घंटों बाहर रहकर शूट करना पड़ता था। क्या यह कोलकाता को करीब से देखने का आपका पहला अनुभव था? मैं पहले भी कई बार इवेंट्स और प्रमोशन के लिए कोलकाता गई हूं, लेकिन इस प्रोजेक्ट के दौरान जिस तरह हमने शहर को जिया और अलग-अलग लोकेशंस पर शूट किया, वह अनुभव बिल्कुल नया और यादगार था। आपकी प्राथमिकताएं आज के दौर में कितनी बदली हैं? मुझे लगता है कि समय के साथ हर कलाकार की सोच और उसकी प्राथमिकताएं भी बदलती हैं। 90 के दशक में हमारा सिनेमा अलग था, वहां स्टारडम, गाने, बड़े सेट और कमर्शियल अपील का अपना महत्व था। मैंने उस दौर को भी पूरी तरह जिया और दर्शकों से बहुत प्यार पाया लेकिन आज का समय कंटेंट और किरदारों का है, जहां कलाकारों को खुद को नए तरीके से एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। आज मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे ऐसे रोल मिल रहे हैं।
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