1947 के लव-लेटर्स: बिना फोन और सोशल मीडिया कैसे होता था प्यार? पाबंदियों के बीच यूं बुना जाता था रिश्तों का ताना-बाना
independence day special : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब हम 1947 की यादों को ताजा करते हैं, तो सिर्फ आजादी की कहानी ही सामने नहीं आती, बल्कि उस दौर के रिश्तों और प्यार की तस्वीर भी दिखाई देती है. तब न मोबाइल था, न सोशल मीडिया और न ही तुरंत मैसेज करने की सुविधा. प्यार का सबसे खास जरिया चिट्ठियां थीं. परिवार और समाज की पाबंदियों के बीच लिखे ये खत कई दिनों के इंतजार, छिपी भावनाओं और मिलने की उम्मीद से भरे होते थे. आखिर कैसे एक छोटी सी चिट्ठी बन जाती थी मोहब्बत की पूरी दुनिया? जानिए 1947 के लव-लेटर्स की दिलचस्प कहानी.
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