“मर जाऊंगा लेकिन..” TMC सांसद कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले- एक घायल शेरनी और ज्यादा खतरनाक
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सिर्फ सत्ता का समीकरण ही नहीं पलटा, बल्कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को इतिहास के सबसे भीषण राजनीतिक संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। सूबे की सियासत पूरी तरह करवट ले चुकी है, जहां पार्टी अपने सबसे बड़े आंतरिक विद्रोह से जूझ रही है। इस सियासी घमासान के बीच, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद दिल्ली पहुंचे हैं और उन्होंने बगावत पर सीधा हमला बोला है। आजाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो गद्दार है, उसको गद्दारी करने दो, इससे टीएमसी को कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा, “मैं दीदी के साथ खड़ा था, खड़ा हूं और हमेशा खड़ा रहूंगा। मर जाऊंगा लेकिन उनका साथ नहीं छोड़ूंगा।” कीर्ति आजाद ने एक घायल शेरनी का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी की वापसी का भरोसा जताया, जो उनके मुताबिक और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
एक तरफ जहां पार्टी के भीतर विद्रोह का सबसे बड़ा तूफान उमड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाने और ‘इंडिया ब्लॉक’ की बैठक में शामिल होने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दिल्ली में ही कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी से मुलाकात कर वफादारों की लामबंदी शुरू कर दी है, जिससे बागियों पर सीधा दबाव बन सके।
चुनाव में मिली हार के बाद TMC में आंतरिक विद्रोह
यह पूरा सियासी घमासान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से शुरू हुआ है, जिसने तृणमूल कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बेदखल कर महज 80 सीटों पर समेट दिया। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है, जो टीएमसी के लिए एक करारी शिकस्त साबित हुई। इस चुनावी हार के तुरंत बाद ही पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक विद्रोह खड़ा हो गया है, जिसकी आंच अब कोलकाता से दिल्ली तक महसूस की जा रही है।
टूट की कगार पर TMC, दो-तिहाई विधायक हुए बागी
टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से लगभग 58-59 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। बागियों की यह संख्या दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए आवश्यक दो-तिहाई के आंकड़े को आसानी से पूरा करती है। विधानसभा में इस बगावत को तब बड़ी सफलता मिली, जब पार्टी से निष्कासित टीएमसी नेता रितव्रत बनर्जी को इन 58 बागी विधायकों का खुला समर्थन प्राप्त हो गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथिन्द्र बोस ने भी इस बागी गुट को तुरंत मंजूरी देते हुए ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक रूप से विधानसभा में ‘नेता प्रतिपक्ष’ घोषित कर दिया है, जो ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। इसी बीच, संकट को गहराते देख ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले फिरहाद हकीम ने भी कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी की अंदरूनी कलह और उजागर हो गई है।
दिल्ली पहुंचे TMC के 20 बागी सांसद
कोलकाता का यह सियासी ड्रामा अब पूरी तरह दिल्ली स्थानांतरित हो चुका है। खबरों के मुताबिक, टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसद भी राजधानी पहुंच चुके हैं। ये सांसद जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपकर संसद में एक अलग गुट बनाने की मांग कर सकते हैं, जिससे टीएमसी की राष्ट्रीय स्तर पर भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बागी विधायकों और सांसदों का मुख्य विरोध पार्टी में केंद्रीकृत फैसले लेने की प्रवृत्ति और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर है। बागी गुट साफ तौर पर मांग कर रहा है कि अभिषेक बनर्जी को पार्टी में मुख्य भूमिका से हटाया जाए। वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी केवल एक मुख्य सलाहकार के रूप में काम करें और संगठन लोकतांत्रिक तरीके से संचालित हो। यह स्थिति टीएमसी के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है, जहां उसे न केवल सत्ता गंवानी पड़ी है, बल्कि अब अपने ही अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
असम के 35 जिलों को मिले ‘गार्जियन मंत्री’, CM सरमा ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, पढ़ें यह खबर
असम सरकार ने राज्य के 35 जिलों के लिए 16 कैबिनेट मंत्रियों को ‘गार्जियन मंत्री’ बनाने का बड़ा फैसला लिया है। दरअसल रविवार, 7 जून 2026 को CM हिमंत बिस्वा सरमा ने इसकी घोषणा की। इन मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि वे वहां के विकास कार्यों पर नजर रख सकें और सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम कर सकें। सरकार का कहना है कि इससे जिला स्तर पर कामकाज और मजबूत होगा और विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी।
दरअसल इन ‘गार्जियन मंत्रियों’ को सिर्फ विकास कार्यों की जिम्मेदारी ही नहीं दी गई है, बल्कि आपदा और आपातकालीन स्थितियों में भी इन्हें मुख्य जिम्मेदारी निभानी होगी। ये मंत्री अपने जिलों में जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करेंगे और स्थानीय समस्याओं के समाधान में मदद करेंगे। साथ ही राज्य सरकार की योजनाओं को सही तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी भी इन्हीं की होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे जिलों में काम की रफ्तार बढ़ेगी और लोगों को योजनाओं का फायदा जल्दी मिलेगा।
5 जून 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था
वहीं यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब असम में भाजपा सरकार बनने के बाद 5 जून 2026 को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उसी दौरान कहा था कि जल्द ही मंत्रियों के बीच जिम्मेदारियां बांटी जाएंगी। अब गार्जियन मंत्रियों की नियुक्ति के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार के बीच सीधा संपर्क और बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी जानकारी
I am pleased to announce the allocations of Guardian Districts to the Hon’ble Ministers of the Government of Assam.
The allocations are as follows-1. Shri Rameswar Teli – Tinsukia, Jorhat
2. Shri Atul Bora – Kamrup (Metro), Dhemaji
3. Shri Charan Boro – Kokrajhar, Baksa,…— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 7, 2026
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें कैबिनेट मंत्रियों को गार्जियन जिलों की जिम्मेदारी सौंपते हुए खुशी हो रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी मंत्री जिला प्रशासन के साथ मिलकर राज्य के विकास और समृद्धि को नई गति देंगे। उनका यह बयान सरकार की विकास योजनाओं को लेकर गंभीरता को दिखाता है।
इन्हें मिली जिम्मेदारी
वहीं असम सरकार में जिन मंत्रियों को गार्जियन जिले दिए गए हैं, उनमें रमेश्वर तेली को तिनसुकिया और जोरहाट की जिम्मेदारी मिली है। अतुल बोरा को कामरूप मेट्रोपॉलिटन और धेमाजी जिलों का प्रभार दिया गया है। चरण बोरो को कोकराझार, बक्सा और चिरांग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं अजंता नियोग को मोरीगांव और कामरूप जिले दिए गए हैं।
इन चार मंत्रियों ने 12 मई को मुख्यमंत्री के साथ मंत्री पद की शपथ ली थी और इन्हें पहले ही विभाग सौंपे जा चुके थे। इसके अलावा 5 जून 2026 को शपथ लेने वाले बाकी 12 मंत्रियों को अभी विभाग नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें गार्जियन जिलों की जिम्मेदारी दे दी गई है।
दरअसल अश्विनी राय सरकार को बोंगाईगांव और बरपेटा जिले मिले हैं। अशोक सिंघल को दरांग और धुबड़ी की जिम्मेदारी दी गई है। बिमल बोरा को शिवसागर और चराइदेव जिलों का प्रभार मिला है। बिस्वजीत दैमारी को नलबाड़ी और सोनितपुर जिलों का गार्जियन मंत्री बनाया गया है। जयंत मल्ला बरुआ को तामुलपुर और ग्वालपाड़ा जिले दिए गए हैं। कौशिक राय को श्रीभूमि और हैलाकांडी की जिम्मेदारी मिली है। केशव महंत को दक्षिण सलमारा-मनकाचर और उत्तर लखीमपुर जिलों का प्रभार सौंपा गया है। कृष्णेंदु पॉल को दीमा हसाओ और कछार जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।
नीलिमा देवी को बजाली और उदालगुड़ी जिलों की जिम्मेदारी मिली है। पीयूष हजारिका को नगांव, होजाई, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जैसे चार जिलों का बड़ा प्रभार दिया गया है। रणोज पेगू को बिस्वनाथ और गोलाघाट जिले मिले हैं। वहीं सुशांत बोरगोहेन को डिब्रूगढ़ और माजुली जिलों का गार्जियन मंत्री बनाया गया है।
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