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Census 2027: जाति, धर्म, नौकरी से लेकर कोविड वैक्सीन तक..., जानें जनगणना के 40 सवालों में क्या-क्या होगा?

Census 2027 भारत में होने वाली अगली जनगणना इस बार कई मायनों में अलग रहने वाली है. दरअसल, सरकार ने Population Enumeration के लिए 40 सवालों वाला फॉर्म नोटिफाई कर दिया है. इसमें लोगों की सामाजिक और व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है. 

बता दें पहली बार आजादी के बाद सभी समुदायों की जातिगत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को जनगणना में शामिल किया जा रहा है. इसके अलावा कोविड-19 वैक्सीनेशन से जुड़ी जानकारी भी फॉर्म का हिस्सा बनाया गया है. 

जाति और SC-ST की जानकारी भी देनी होगी

इस बार जनगणना में सिर्फ यह नहीं पूछा जाएगा कि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है या नहीं बल्कि उसकी जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा. सरकार ने पहले ही साफ किया था कि जाति की गणना Population Enumeration चरण में की जाएगी. सरकार का तर्क है कि इसका मकसद देश की सामाजिक संरचना की ज्यादा विस्तृत तस्वीर तैयार करना है. इससे अलग-अलग सामाजिक समूहों की आबादी और उनकी स्थिति से जुड़े आंकड़े सामने आ सकेंगे.

पूछे जा सकते हैं ये 40 सवाल...

व्यक्ति की पहचान और सामाजिक जानकारी...

1. व्यक्ति का नाम क्या है?
2. परिवार के मुखिया से उसका रिश्ता क्या है?
3. व्यक्ति का लिंग क्या है?
4. उसकी उम्र/जन्म से जुड़ी जानकारी क्या है?
5. उसकी वैवाहिक स्थिति क्या है?
6. क्या वह SC/ST या अन्य सामाजिक श्रेणी में आता है?
7. उसकी जाति क्या है?
8. उसका धर्म क्या है?
9. उसकी मातृभाषा क्या है?
10. वह कौन-कौन सी अन्य भाषाएं जानता है?

पढ़ाई, काम और आर्थिक जानकारी...

11. उसकी शिक्षा का स्तर क्या है?
12. वह पढ़ रहा है या नहीं?
13. वह काम करता है या नहीं?
14. उसका मुख्य काम/पेशा क्या है?
15. वह किस तरह के आर्थिक काम से जुड़ा है?
16. काम करने की उसकी स्थिति क्या है?
17. काम की जगह और निवास के बीच माइग्रेशन से जुड़ी जानकारी क्या है?
18. वह पहले कहां रहता था?
19. स्थान बदलने की मुख्य वजह क्या थी?
20. देश/राज्य के भीतर उसके स्थानांतरण से जुड़ी जानकारी क्या है?

परिवार और वैवाहिक स्थिति... फर्टटिलिटी 

21. परिवार में कितने सदस्य हैं?
22. परिवार में कितने विवाहित जोड़े हैं?
23. व्यक्ति की शादी की स्थिति क्या है?
24. विवाहित महिलाओं से जुड़ी फर्टिलिटी संबंधी जानकारी है?
25. बच्चों की संख्या से संबंधित जानकारी क्या है?

स्वास्थ्य और कोविड से जुड़े सवाल...

26. क्या व्यक्ति दिव्यांगता से संबंधित किसी श्रेणी में आता है?
27. दिव्यांगता का प्रकार क्या है?
28. कोविड-19 का टीका लगवाया गया था या नहीं?
29. कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी जानकारी क्या है?
30. कोविड का टीका किस स्थान पर लगवाया गया था?

घर और रहने से जुड़ी जानकारी...

31. व्यक्ति/परिवार का सामान्य निवास कहां है?
32. घर की स्थिति और रहने की व्यवस्था कैसी है?
33. परिवार के सामान्य निवास से जुड़ी जानकारी क्या है?
34. परिवार का घर किस तरह की व्यवस्था में आता है?
35. परिवार के रहने और migration से जुड़े विवरण क्या हैं?

जनगणना में जरूरी अन्य जानकारी...

36. व्यक्ति की वर्तमान निवास स्थिति क्या है?
37. वह परिवार में किस भूमिका में है?
38. परिवार के सदस्यों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी क्या है?
39. जनगणना के लिए आवश्यक संपर्क/संचार से जुड़ी जानकारी क्या है?
40. व्यक्ति/परिवार से संबंधित अन्य निर्धारित जनसांख्यिकीय जानकारी क्या है?

Explainer: पाकिस्तान के साथ 4 बड़े युद्ध में कौन बना भारत का साथी? इन देशों ने दिया हमारे दुश्मन का साथ

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पाकिस्तान की वजह से 15 अगस्त नहीं, देश के इन जिलों में 18 अगस्त को मनता है स्वतंत्रता दिवस

Independence Day 2026: भारत में स्वतंत्रता दिवस का नाम आते ही 15 अगस्त की तारीख सामने आती है.  हर साल इसी दिन देशभर में तिरंगा फहराया जाता है और आजादी का जश्न मनाया जाता है.  लेकिन क्या आप जानते हैं देश में ऐसी भी जगह हैं जहां 15 अगस्त को आजादी का जश्न नहीं मनाया जाता बल्कि ये जश्न 18 अगस्त को मनाया जाता है. जी हां खास बात यह है कि इसके पीछे की वजह है पाकिस्तान. वही पाकिस्तान जो बंटवारे में भारत से अलग हो गया.

इस पाकिस्तान के चलते ही देश के कुछ हिस्सों में या यूं कहें जिलों में आजादी के जश्न की तारीख ही बदल गई. आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन से जिले हैं जो 15 अगस्त को पूरे देश के साथ स्वतंत्रता दिवस नहीं मना पाते हैं. 

इन जिलों में 15 अगस्त को नहीं मनता आजादी का जश्न

पश्चिम बंगाल के नदिया और मालदा जिलों के इतिहास में 18 अगस्त की तारीख भी बेहद खास है.  यहां आजादी से जुड़ा एक ऐसा अध्याय है, जिसकी वजह से 18 अगस्त को भी स्वतंत्रता दिवस के रूप में याद किया जाता है. 

15 अगस्त 1947 को क्या हुआ था?

15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ. दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में आजादी का जश्न मनाया गया। सरकारी तौर पर भी 15 अगस्त ही भारत का स्वतंत्रता दिवस है.

लेकिन उस समय बंगाल के कुछ इलाकों में सीमा निर्धारण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. नदिया और मालदा के कुछ हिस्सों को शुरुआती तौर पर पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की घोषणा कर दी गई थी.

नदिया और मालदा में क्यों नहीं मना 15 अगस्त?

विभाजन के दौरान सीमा निर्धारण का काम बेहद जटिल था. नदिया और मालदा जैसे इलाकों की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष था. इन क्षेत्रों को पाकिस्तान का हिस्सा बताए जाने की खबर के बाद वहां के लोगों ने इसका विरोध किया.

यही कारण रहा कि इन इलाकों में 15 अगस्त का माहौल देश के दूसरे हिस्सों से अलग था. लोगों को उम्मीद थी कि सीमा निर्धारण में बदलाव होगा और ये इलाके भारत का हिस्सा बने रहेंगे.

फिर 18 अगस्त को बदली तस्वीर

सीमा निर्धारण से जुड़ी प्रक्रिया के बाद स्थिति में बदलाव आया. 17 अगस्त 1947 की रात तक नक्शे में संशोधन की प्रक्रिया पूरी हुई और नदिया तथा मालदा के संबंधित क्षेत्रों को भारत में शामिल किए जाने की स्थिति स्पष्ट हुई. इसके बाद 18 अगस्त को इन क्षेत्रों में भारत का हिस्सा बनने और आजादी का जश्न मनाया गया. यही ऐतिहासिक घटनाक्रम आज भी इस तारीख को स्थानीय स्मृति में खास बनाता है.

स्थानीय इतिहास में आज भी खास है 18 अगस्त

18 अगस्त का महत्व केवल एक तारीख के तौर पर नहीं है. यह उन लोगों की याद दिलाता है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने इलाके के भविष्य को लेकर संघर्ष किया था.

नदिया और मालदा की कहानी यह भी बताती है कि 1947 में आजादी और विभाजन की प्रक्रिया हर इलाके में एक जैसी नहीं थी. कहीं जश्न था तो कहीं सीमा और भविष्य को लेकर असमंजस और तनाव का माहौल था.

भारत के लिए 15 अगस्त ही आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त ही है. 18 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा नदिया और मालदा के कुछ क्षेत्रों से जुड़ी ऐतिहासिक और स्थानीय परंपरा है. इसे पूरे देश के स्वतंत्रता दिवस की आधिकारिक तारीख में बदलाव नहीं माना जाना चाहिए.

आजादी की कहानी सिर्फ एक तारीख की नहीं

स्वतंत्रता दिवस हमें केवल 15 अगस्त 1947 की घटना याद नहीं दिलाता, बल्कि आजादी के साथ जुड़े संघर्ष, विभाजन और लाखों लोगों के अनुभवों को भी समझने का अवसर देता है. नदिया और मालदा की 18 अगस्त वाली कहानी इसी इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

इसलिए जब देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तब इन इलाकों में 18 अगस्त की ऐतिहासिक स्मृति भी यह याद दिलाती है कि आजादी तक पहुंचने का रास्ता हर क्षेत्र के लिए एक जैसा नहीं था.

यह भी पढ़ें - Independence Day 2026: 79वां या 80वां? इस साल भारत कौन सा स्वतंत्रता दिवस मनाएगा?

 

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