छात्रों के समर्थन में CJI, कहा- ये हमारे और स्टूडेंट्स के बीच का मामला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान देता है
NALASAR में छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ इस मामले में किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
छात्रों को विरोध का पूरा अधिकार
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि युवावस्था में किसी छात्र की ओर से कोई गलत बयान दिया जाना अपने आप में उसके विरोध करने के अधिकार को खत्म नहीं करता. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से असहमति जताने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है.
अदालत की टिप्पणी से साफ संकेत मिला कि छात्रों के विरोध को केवल उनकी किसी टिप्पणी या राजनीतिक मतभेद के आधार पर दबाया नहीं जाना चाहिए, बशर्ते प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में हो.
CJI बोले- मैं भी छात्र जीवन में सक्रिय रहा हूं
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वह स्वयं छात्र रहते हुए सक्रिय रहे हैं. उनका कहना था कि अगर यह मान भी लिया जाए कि छात्र किसी मुद्दे पर गलत हैं, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है.
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनके और छात्रों के बीच की बातचीत है और इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.
BCI का सर्कुलर भी बना विवाद की वजह
इस पूरे मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI की भूमिका भी चर्चा में रही. प्रदर्शन से जुड़े विवाद के बाद BCI की ओर से ऐसा सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें संबंधित छात्रों के वकील के रूप में नामांकन को लेकर रोक की बात सामने आई थी. बाद में इस फैसले का व्यापक विरोध हुआ। इसके बाद BCI ने अपना लंबित सर्कुलर वापस ले लिया.
NALSAR छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई
मामला हैदराबाद स्थित NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी जुड़ा है. छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया था.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित घटनाओं को लेकर NALSAR के छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है.
आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
दरअसल, NEET पेपर लीक के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसी क्रम में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया.
सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणी को कथित तौर पर गलत संदर्भ में पेश किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया. इसके बाद NALSAR के छात्रों ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का शांतिपूर्ण विरोध किया. इसी विरोध के बाद BCI के सर्कुलर ने मामले को और गंभीर बना दिया और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई.
लोकतांत्रिक अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का संदेश
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यही है कि असहमति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. छात्रों या युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और केवल किसी विचार या बयान से असहमति के आधार पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
इस सुनवाई में अदालत ने छात्रों को कानूनी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें नामांकन और कानूनी सहायता से जुड़े अवसरों की ओर भी ध्यान दिलाया.
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'2007 की तरह ब्राह्मणों में को मिलेगा सम्मान', यूपी चुनाव के लिए मायावती ने बताई रणनीति
Mayawati: यूपी में चुनावी माहौल शुरू हो गया है. इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी सक्रिय हो गई है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनाव को लेकर अपनी रणनीति बताई है. मायावती ने कहा कि सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही ब्राह्मणों व अन्य सभी समाज को भी पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान जरूर दिया जाता रहेगा.
मायावती ने कहा कि पार्टी खासकर ब्राह्मण समाज को यह भी विश्वास दिलाना चाहती है कि वे अपनी पूरी मजबूती के साथ पार्टी से जुड़े रहें और उन्हें हर चुनाव में उनकी तैयारी के आधार पर उनकी भागीदारी यानी चुनावी उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर सन 2007 की तरह ही समाज को पूरा-पूरा उचित मान-सम्मान जरूर दिया जाता रहेगा. कहा कि सर्वसमाज आधारित ऐसी अपनी बीएसपी पार्टी को जमीनी स्तर पर तैयार करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को ही अपनी अह्म भूमिका निभानी है. वैसे बीएसपी की नर्सरी, सर्वसमाज के हसीन गुलदस्तों से ही, अधिकतर हरी-भरी व सजी रहती है.
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पार्टी का बताया लक्ष्य
मायावती ने कहा कि सर्वविदित है कि बीएसपी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज्यादा, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक, सर्वसमाज के हित व कल्याण के लिये समर्पित है और इसीलिये पार्टी में नेताओं की नहीं बल्कि पूरे तन, मन, धन से समर्पित अम्बेडकरवादी कार्यकर्ताओं की ही फौज हर स्तर पर अधिकतर सक्रिय है. यही मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा पार्टी व मूवमेन्ट के हित में स्थापित परम्परा भी है.
1. जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों एवं सिद्धान्त पर चलने वाली विशिष्ट पहचान वाली पार्टी है, जो किसी भी समाज के व्यक्ति विशेष से ज़्यादा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पवित्र संविधान की सच्ची मंशा के मुताबिक़, सर्वसमाज के हित…
— Mayawati (@Mayawati) August 14, 2026
पार्टी से निकाले गए नेताओं पर क्या कहा?
मायावती ने पार्टी का मोटो बताते हुए कहा कि इसीलिये ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो भी लोग अभी तक पार्टी से निकाले गये हैं या निकाले जा रहे हैं या वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गये हैं या फिर वे अपने गलत कारनामों की वजह से उनसे बचने के लिये खासकर सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो गये हैं, तो उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी उनके कार्यों के ऑकलन के आधार पर काफी सशंकित व निराशाजनक बना रहा है, क्योंकि खासकर बीएसपी सरकार के दौरान भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए ही पार्टी से फायदा ज्यादा उठाया है और अपने समाज व पार्टी के हित के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय व उदासीन ही बने रहे हैं.
पार्टी के नुकसान पर की बात
मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि इन्हीं सब कारणों से उन लोगों ने अपने समाज को भी सही से बीएसपी में नहीं जोड़ा है, जो कि पार्टी की अपेक्षा के विरुद्ध इनका यह सब कृत्य होने की वजह से पिछले कई लोकसभा व विधानसभा आमचुनावों में पार्टी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है. किन्तु उसके बाद से पार्टी में लम्बे अरसे से ईमानदार व हर मामले में पार्टी के प्रति लगातार समर्पित एवं निष्ठावान चले आ रहे पार्टी के वरिष्ठ लोगों द्वारा आएदिन नये कर्मठ व ईमानदार लोगों व खासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है, जो यह अभियान पूरी तरह से जारी है.
पार्टी की बताई उम्मीद
मायावती ने कहा कि अब वे लोग काफी हद तक पार्टी की अपेक्षा के अनुसार जी-जान से लगातार लगे हुये हैं. पार्टी को पूरी उम्मीद है कि ये सभी नये व पुराने लोग हर मामले में ज्यादा बेहतर, साफ-सुथरे व मिशनरी मानसिकता के बनकर उभरेंगे और वे सच्चे अम्बेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के भरपूर तौर पर काम आयेंगे.
उत्तराखंड सीएम से की कार्रवाई की मांग
हल्द्वानी में खरगे का शुद्धिकरण विवाद पर मायावती ने कहा कि उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है. यह जानकारी कल संसद के जरिये भी देश को मिली है. यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है तथा वहां कि सरकार बिना कोई देरी किये हुये ऐसे जातिवादी एवं सामन्ती तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनों के तहत् उचित कार्रवाई करके उन्हें जेल भेजे.
कहा कि साथ ही, इस घटना आदि के सम्बंध में आरएसएस के मुखिया को भी संज्ञान लेकर जरुर गंभीरता से सोचना चाहिये जो कि दलितों के आर्थिक तौर पर थोड़ा मजबूत हुये लोगों को आरक्षण से वंचित करने की बात कर रहें हैं.
सुखबीर बादल पर हमले पर जताई चिंता
मायावती ने कहा कि अभी हाल ही में महाराष्ट्र के नान्देड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर किये गये हमले की घटना भी अति-दुःखद व चिन्तनीय है. केन्द्र व महाराष्ट्र की सरकार इस घटना को पूरी गम्भीरता से लेते हुये दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करे.
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