'मैं रसीला और खतरनाक...', 'मिर्जापुर: द मूवी' में विलेन बनने पर रवि किशन ने कही ये बात, वायरल मीम्स पर भी किया रिएक्ट
Ravi Kishan on Mirzapur and Memes: बीजेपी सांसद और जाने-माने एक्टर रवि किशन अपनी फिल्मों और विवादित बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से एक्टर अपने मीम्स की वजह से छाए हुए हैं. पूरे सोशल मीडिया पर रवि किशन के मीम्स वायरल है. इस बीच एक्टर की फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' भी जल्द ही रिलीज होने वाली है, जिसमें उन्होंने विलेन का रोल प्ले किया है. अब हाल ही में रवि किशन ने फिल्म में अपने रोल और वायरल मीम्स पर रिएक्शन दिया है. चलिए जानते हैं, उन्होंने क्या कहा.
मिर्जापुर: द मूवी को लेकर क्या बोले रवि किशन?
रवि किशन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में मिर्जापुर: द मूवी (Mirzapur The Movie) में निगेटिव रोल प्ले करने पर बात की. उन्होंने कहा- 'पात्र को केवल पात्र समझना चाहिए. मेरे इस पात्र में कई नेगेटिव शेड्स हैं, जो लोगों को पसंद आएंगे. ये रसीला आदमी है, खतरनाक प्रेमी है, जिसकी एक गर्लफ्रेंड है. मुझे लगता है कि लोग उसे केवल सिनेमा तक ही सीमित रखेंगे.' बता दें, फिल्म में रवि किशन की एंट्री एक नए गैंगस्टर के तौर पर दिखाई गई है, जिसका नाम ‘बब्बन बाबुआ’ है.
फिल्म में क्या होग रवि किशन का रोल
मिर्जापुर: द मूवी में रवि किशन के रोल की बात करे तो वो ‘बब्बन बाबुआ’ नाम के गैंगस्टर के किरदार में नजर आएंगे. मेकर्स ने अभी तक बब्बन बाबुआ की पूरी बैकस्टोरी या उसका असली मकसद साफ नहीं किया है. ऐसे में फैंस कन्फ्यूज है कि वो गुड्डू पंडित या कालीन भैया का साथी है या दुश्मन है. फिल्म की कहानी में उसकी भूमिका को फिलहाल रहस्य बनाकर रखा गया है. हालांकि इतना साफ है कि मिर्जापुर की गद्दी की लड़ाई में एक नया खिलाड़ी शामिल होने वाला है.
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वायरल मीम्स पर भी किया रिएक्ट
वहीं, बता दें इन दिनों रवि किशन को लेकर कई मीम्स बन रहे हैं और उनकी रील्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं. कभी 'जल्दी द लेट' और 'मनी फॉलोज माय ब्रदर' से लेकर 'हम्मम, बेटर डू इट' तक, रवि किशन अचानक इंटरनेट के नए मीम सेंसेशन बन गए हैं. वहीं, इस पर एक्टर ने रिएक्ट करते हुए कहा कि वो इसके लिए GenZ को धन्यवाद देते हैं. उन्होंने कहा- 'मैं उन्हें प्रणाम करता हूं। खुशी से निशब्द हूं, पता नहीं उन्होंने मुझमें क्या देखा. शायद उन्हें मेरा अल्लहड़पना पसंद आया होगा. GenZ अपने तरह के लोगों को ढूंढते हैं, जो बेबाक हो, कोई मुखौटा ना पहना हो. वो जिस तरह से मेरी वीडियो बना रहे है, मैं तो उन्हें क्रिएटिव जीनियस कहता हूं.'
मीम्स देख हैरान रह गए थे रवि किशन
रवि किशन ने इससे पहले एक दूसरे इंटरव्यू में सोशल मीडिया पर मिल रहे प्यार पर कहा था कि कैसे 'जेन जी' ने उन्हें सोशल मीडिया सेंसेशन बनाने की कोशिशों से हैरान कर दिया. उन्होंने कहा था- 'इस 'मौन व्रत' के दौरान, इन 'जेन जी' लोगों ने मुझे निशब्द कर दिया. जहां तक मुझे याद है, मैंने इस देश में ऐसा कुछ कभी नहीं देखा. जिस तरह मुझ पर इतना प्यार बरसाया है, वो ऐतिहासिक रहा है, और ये रुक नहीं रहा है; यह दिन-ब-दिन बढ़ रहा है.'
रवि किशन ने 'GenZ' की तारीफ
उन्होंने आगे भारत के युवाओं की तारीफ करते हुए कहा, 'तो, मैं उन सभी युवाओं, यानी 'जेन जी' (Gen Z) को आमंत्रित करता हूं जो इस देश का भविष्य हैं और जो एक दिन भारत की संसद में आएंगे. मैं आपकी बुद्धिमत्ता को सलाम करता हूं. आप लोग जिस तरह की क्रिएटिविटी दिखा रहे हैं, वह अविश्वसनीय है. आप सभी ने मुझे, मेरे चलने के अंदाज, मेरे बात करने के तरीके, मेरे नाम और मेरी शोहरत को लिया और उसे अपने ही अंदाज में इतना भव्य और विशाल रूप दिया है.'
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छात्रों के समर्थन में CJI, कहा- ये हमारे और स्टूडेंट्स के बीच का मामला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान देता है
NALASAR में छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान छात्रों के अधिकारों पर अहम टिप्पणी सामने आई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण और वैध तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ इस मामले में किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
छात्रों को विरोध का पूरा अधिकार
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि युवावस्था में किसी छात्र की ओर से कोई गलत बयान दिया जाना अपने आप में उसके विरोध करने के अधिकार को खत्म नहीं करता. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से असहमति जताने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है.
अदालत की टिप्पणी से साफ संकेत मिला कि छात्रों के विरोध को केवल उनकी किसी टिप्पणी या राजनीतिक मतभेद के आधार पर दबाया नहीं जाना चाहिए, बशर्ते प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में हो.
CJI बोले- मैं भी छात्र जीवन में सक्रिय रहा हूं
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने छात्र जीवन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वह स्वयं छात्र रहते हुए सक्रिय रहे हैं. उनका कहना था कि अगर यह मान भी लिया जाए कि छात्र किसी मुद्दे पर गलत हैं, तब भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है.
CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनके और छात्रों के बीच की बातचीत है और इस मामले में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.
BCI का सर्कुलर भी बना विवाद की वजह
इस पूरे मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI की भूमिका भी चर्चा में रही. प्रदर्शन से जुड़े विवाद के बाद BCI की ओर से ऐसा सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें संबंधित छात्रों के वकील के रूप में नामांकन को लेकर रोक की बात सामने आई थी. बाद में इस फैसले का व्यापक विरोध हुआ। इसके बाद BCI ने अपना लंबित सर्कुलर वापस ले लिया.
NALSAR छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई
मामला हैदराबाद स्थित NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी जुड़ा है. छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया था.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित घटनाओं को लेकर NALSAR के छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी गई है.
आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
दरअसल, NEET पेपर लीक के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसी क्रम में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया.
सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान CJI की टिप्पणी को कथित तौर पर गलत संदर्भ में पेश किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया. इसके बाद NALSAR के छात्रों ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का शांतिपूर्ण विरोध किया. इसी विरोध के बाद BCI के सर्कुलर ने मामले को और गंभीर बना दिया और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई.
लोकतांत्रिक अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का संदेश
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यही है कि असहमति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. छात्रों या युवाओं को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और केवल किसी विचार या बयान से असहमति के आधार पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
इस सुनवाई में अदालत ने छात्रों को कानूनी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें नामांकन और कानूनी सहायता से जुड़े अवसरों की ओर भी ध्यान दिलाया.
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