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Harsingar Planting Tips: गमले में ऐसे उगाएं हरसिंगार का पौधा, आंगन में बिछ जाएगी फूलों की चादर, 5 सीक्रेट टिप्‍स

Harsingar Care Tips: पारिजात यानी हरसिंगार के फूलों की महक तो आपने जरूर महसूस की होगी. सफेद पंखुड़ियों और नारंगी डंडी वाले ये खूबसूरत फूल न सिर्फ देखने में मनमोहक होते हैं, बल्कि हिंदू धर्म में इनका विशेष धार्मिक महत्व भी है. इसे स्वर्ग का वृक्ष भी कहा जाता है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि हरसिंगार का बड़ा पेड़ ही होता है, लेकिन क्या इसे घर पर गमले में आसानी से उगाया जा सकता है? पौधे की सही देखभाल कैसे करें, ढेरों फूल पाने के लिए कौन सी खाद डालें और इसे सूखने से कैसे बचाएं—ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो आपके मन में भी आते होंगे. सही जानकारी के साथ आप भी अपनी बालकनी या आंगन को पारिजात की खुशबू से महका सकते हैं. पौधे को गमले में उगाने और देखभाल करने के आसान टिप्स, आइये जानते हैं.

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CJI का 'विरोध' करने वाले Law Students के खिलाफ Bar Council of India ने लिया सख्त एक्शन, बवाल होने पर तुरंत लिया U-Turn

कानून के छात्रों के विरोध से शुरू हुआ विवाद कुछ ही घंटों में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अभूतपूर्व फरमान और फिर नाटकीय यू-टर्न तक पहुंच गया। हैदराबाद की प्रतिष्ठित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के सभी छात्रों के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने वाले आदेश ने कानूनी बिरादरी में तीखी बहस छेड़ दी। हालांकि देर शाम BCI ने अपना फैसला बदलते हुए पूरे बैच को राहत दे दी।

हम आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत 23 जुलाई को हुई, जब NALSAR के 70 अंतिम वर्ष के छात्रों ने कुलपति, रजिस्ट्रार और शिक्षकों को पत्र लिखकर दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को आमंत्रित करने पर आपत्ति जताई। बाद में अन्य बैचों के छात्रों ने भी इस प्रतिनिधित्व का समर्थन किया।

इसे भी पढ़ें: Right to Privacy पर बड़ा खतरा! जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की Facial Recognition पर SC में अहम सुनवाई

छात्रों की आपत्ति CJI सूर्यकांत की उस टिप्पणी से जुड़ी थी, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई थी। जब याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस कार्रवाई के वीडियो फुटेज दिखाने की पेशकश की, तो CJI की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि पीठ वीडियो देखने में रुचि नहीं रखती। छात्रों ने इसे पुलिस ज्यादती के गंभीर आरोपों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया और कहा कि ऐसे व्यक्ति से डिग्री लेना उनके NALSAR में सीखे मूल्यों के साथ असहज स्थिति पैदा करता है।

इसके जवाब में BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने गुरुवार को NALSAR को भेजे पत्र में पूरे 2026 बैच के नामांकन पर अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दिया। राज्य बार काउंसिलों से कहा गया कि वे इन छात्रों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित न करें। BCI ने विश्वविद्यालय से उन लोगों की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी, जिन्होंने कथित अभियान शुरू, संगठित, समन्वित या संचालित किया था। पत्र में प्रतिनिधित्व पर हस्ताक्षर करने वालों, बैठकों, सोशल मीडिया समूहों, मीडिया संवाद, बहिष्कार या व्यवधान की अपील तथा शिक्षकों, शोधार्थियों, पूर्व छात्रों, छात्र संगठनों और बाहरी लोगों की भूमिका की जानकारी भी मांगी गई।

मनन कुमार मिश्रा ने अपने पहले पत्र में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान न रखने वाला कानून छात्र जिम्मेदार अधिवक्ता, शिक्षक या न्यायाधीश बनने की अपेक्षा पूरी नहीं करता और ऐसे लोग पेशे के लिए “liability” बन सकते हैं। हालांकि BCI ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल प्रतिनिधित्व या अभियान का समर्थन करने से किसी छात्र को स्वतः Advocates Act की धारा 24A के तहत अयोग्य नहीं माना जाएगा।

लेकिन आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल गई। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया और विरोध की चेतावनी के बीच BCI ने देर शाम अपना निर्देश संशोधित कर दिया। नए पत्र में कहा गया कि नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और कथित “अनादर” की पहल में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। परिषद ने माना कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को उकसाया हो सकता है। इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की राज्य बार काउंसिल में नामांकन का अधिकार दे दिया गया।

BCI ने यह भी कहा कि उसे वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार सदस्यों, कानून छात्रों और आम लोगों से मिली प्रतिक्रियाओं के बाद 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लेना पड़ा। हालांकि कथित तौर पर शिक्षकों और बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए।

BCI के शुरुआती फैसले की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे “अवैध, असंगत और मौलिक रूप से अस्थिर” बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्वतंत्र विचार और निर्भीक बहस के केंद्र होने चाहिए। हालांकि उन्होंने CJI के निमंत्रण का विरोध करने वाले छात्रों के रुख का समर्थन नहीं किया।

इस विवाद में ‘Cockroach Janta Party’ के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया ने भी नया रंग भर दिया। उन्होंने BCI के आदेश पर सवाल उठाते हुए लिखा— “What if all legal cockroaches come together?” यह टिप्पणी उस पुराने विवाद की ओर इशारा करती है, जिसमें CJI की “cockroaches” टिप्पणी के बाद दिपके ने इसी सवाल को सोशल मीडिया पर उछाला था और आगे चलकर Cockroach Janta Party आंदोलन का गठन हुआ।

बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बुनियादी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि कानून के छात्रों से सर्वोच्च न्यायिक संस्था के प्रति सम्मान की अपेक्षा और उनके स्वतंत्र असहमति के अधिकार के बीच संतुलन की सीमा आखिर कहां तय होगी? NALSAR प्रकरण में BCI का पहले कठोर कदम और फिर उसी दिन पीछे हटना इस बहस को और गहरा कर गया है।

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