अब इस राज्य के कर्मचारियों- पेंशनरों का DA बढ़ा, नई दरें जनवरी 2026 से प्रभावी, जुलाई में खाते में बढ़कर आएगी सैलरी-पेंशन
केन्द्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने के बाद अब राज्य सरकारों ने भी डीए/डीआर की दरों में संशोधन करना शुरू कर दिया है। असम सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जनवरी 2026 से प्रभावी होने वाले महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट विस्तार के बाद 5 जून को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस फैैसले के बाद अब राज्य कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। इसका लाभ प्रदेश के करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा।
नई दरें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगी, ऐसे में जनवरी से मई 2026 तक का एरियर भी मिलेगा। बढ़े हुए डीए/डीआर की दरों का लाभ जून की सैलरी के साथ जुलाई में मिलेगा। इसका लाभ राज्य सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, पारिवारिक पेंशनभोगियों, असाधारण पेंशनभोगियों और अनुकंपा पारिवारिक पेंशनभोगियों को मिलेगा।
इससे पहले असम सरकार ने अक्टूबर 2025 में जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते व राहत में 3 फीसदी की वृद्धि की थी, जिसके बाद डीए 55 फीसदी से बढ़कर 58 फीसदी हो गया है। बता दें कि केंद्र की घोषणा के बाद अबतक गुजरात, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, चड़ीगढ़, अरूणाचल प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और राजस्थान के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता बढ़ चुका है।
क्या होता है मंहगाई भत्ता
- महंगाई भत्ता एक भुगतान है जो केन्द्र और राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति के प्रभाव को संतुलित करने के लिए देती हैं। यह वेतन का एक अतिरिक्त हिस्सा होता है, जिसे समय-समय पर महंगाई दर के आधार पर संशोधित किया जाता है। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार तय करती है।
- केंद्र सरकार द्वारा हर साल 2 बार केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है, जो अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करता है। यह वृद्धि हर साल जनवरी/जुलाई से की जाती है, जिसका ऐलान मार्च–अप्रैल और अक्टूबर-नवंबर के आसपास होता है। केन्द्र सरकार के ऐलान के बाद राज्य सरकारों द्वारा घोषणा की जाती है।
न्यू ईयर पार्टी में हर्ष फायरिंग पड़ी भारी, बिहार के भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को कोर्ट ने ठहराया दोषी, हिरासत में लेने का आदेश
दिल्ली के बसंत कुंज स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी के दौरान हुई हर्ष फायरिंग ने एक महिला की जान ले ली थी। इसी गंभीर मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के साहिबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते ही विधायक को तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें सीधे पुलिस की गिरफ्त में भेज दिया गया। यह घटना 31 दिसंबर 2018 की है, जब विधायक के फार्महाउस पर नए साल की धूमधाम से पार्टी चल रही थी।
कोर्ट ने विधायक राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (भाग-2) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया है। यह फैसला कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस मामले में राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह और दो अन्य आरोपी, राना राजेश सिंह व रामेंद्र सिंह को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इन तीनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके चलते उन्हें दोषमुक्त किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नए साल की पार्टी में भारी भीड़ के माहौल में आरोपी राजू सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाई। इस कृत्य से यह साफ जाहिर होता है कि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि ऐसा करने से किसी व्यक्ति की जान जा सकती है। कोर्ट ने उनके इस कृत्य को घोर लापरवाही भरा माना, जो किसी की मौत का कारण बन सकता था। यह टिप्पणी राजू सिंह के खिलाफ फैसले का मुख्य आधार बनी।
क्या है पूरा मामला?
घटना 31 दिसंबर 2018 की रात की है। बसंत कुंज स्थित राजू कुमार सिंह के फार्महाउस पर भव्य न्यू ईयर पार्टी चल रही थी। इसी दौरान हुई हर्ष फायरिंग में आर्किटेक्ट अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 3 जनवरी 2019 को उनकी मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने उस समय फौरन कार्रवाई करते हुए राजू सिंह और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और वर्ष 2023 में कोर्ट ने राजू सिंह, उनकी पत्नी रेनू सिंह और अन्य दो आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। तब कोर्ट ने प्रथम दृष्टया राजू सिंह पर आईपीसी 304 (भाग-2) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत मामला बनने की बात कही थी।
विधायक राजू कुमार सिंह बिहार के मुजफ्फरपुर क्षेत्र से संबंध रखते हैं। वे पहले जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। इस मामले ने शुरू से ही राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। अब राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। दोषी ठहराए जाने के बाद विधायक राजू कुमार सिंह को तुरंत हिरासत में लिए जाने का आदेश दिया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।
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