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Dr Mohammad Fathali: अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान युद्ध से नहीं, सिर्फ कूटनीति से संभव

भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अमेरिका-ईरान तनाव, बार-बार टूटते संघर्षविराम और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के मौजूदा हालातों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान एक शांतिप्रिय देश है जो हमेशा संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता है, लेकिन अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.

शांति और संवाद के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर बात करते हुए डॉ. फतहली ने कहा, "हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम युद्ध और शांति, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार हैं. हम बातचीत और संवाद का स्वागत करते हैं." उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी भी किसी युद्ध या तनाव की शुरुआत नहीं की है. उनके अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद या मतभेद का अंतिम समाधान केवल कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जा सकता है.

सीजफायर का उल्लंघन और आत्मरक्षा का अधिकार

डॉ. फतहली ने अमेरिकी सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि 8 अप्रैल को घोषित किए गए संघर्षविराम (सीजफायर) का हाल के दिनों में अमेरिकी सेना द्वारा कई बार उल्लंघन किया गया है. उन्होंने कहा कि लगातार हो रही उकसावे वाली कार्रवाइयों के कारण ही ईरानी सेना को आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार का उपयोग करते हुए जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी.

राजदूत ने चेतावनी देते हुए कहा:

"हम संघर्षविराम के प्रति अब भी प्रतिबद्ध हैं, लेकिन हमारे देश की सुरक्षा और संप्रभुता हमारे लिए 'रेड लाइन' है. यदि हमारे देश पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब उसी स्तर पर और जरूरत पड़ने पर उससे भी अधिक कड़े तरीके से दिया जाएगा."

ट्रंप के अधिकारों को सीमित करने वाले अमेरिकी प्रस्ताव पर रुख

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में राष्ट्रपति ट्रंप के सैन्य अधिकारों को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर ईरान के राजदूत ने संभलकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह अमेरिका का आंतरिक राजनीतिक विभाजन है या नहीं, इस पर टिप्पणी अमेरिकी विश्लेषकों को करनी चाहिए.

हालांकि, उन्होंने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी कदम तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, वह सकारात्मक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वाशिंगटन में कूटनीति और संयम की बात करने वाले लोगों की भूमिका ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए ताकि संकट को युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत की मेज पर सुलझाया जा सके.

कुवैत एयरपोर्ट हमले के दावों का खंडन: पैट्रियट सिस्टम की नाकामी

कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में ईरान का हाथ होने के आरोपों को डॉ. फतहली ने पूरी तरह से खारिज कर दिया. उन्होंने इस मामले में निम्नलिखित मुख्य बिंदु सामने रखे:

  • अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: कुवैत और बहरीन द्वारा अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र को अमेरिकी सेना को इस्तेमाल करने देना संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत ईरान के खिलाफ 'आक्रामक कार्रवाई' का हिस्सा माना जाएगा.

  • मिसाइल थ्योरी का खंडन: ईरानी सैन्य विशेषज्ञों की जांच के अनुसार, कुवैत की तरफ कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई थी. एयरपोर्ट को हुआ नुकसान संभवतः अमेरिका निर्मित 'पैट्रियट' डिफेंस सिस्टम की खराबी के कारण हुआ, जिसकी इंटरसेप्टर मिसाइलें चूककर टर्मिनल पर जा गिरीं.

  • फर्जी वीडियो का दावा: कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर जिन कथित ईरानी ड्रोन हमलों के वीडियो दिखाए जा रहे हैं, वे दिन के उजाले के हैं, जबकि घटनाएं रात की बताई जा रही हैं. इससे साफ है कि ये सबूत बनावटी हैं.

लेबनान और गाजा में इजरायली कार्रवाई पर तीखा प्रहार

लेबनान की आंतरिक स्थिरता पर बात करते हुए ईरानी राजदूत ने इजरायली शासन की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान में की जा रही सैन्य कार्रवाई साफ तौर पर संप्रभुता का उल्लंघन और युद्ध अपराध की श्रेणी में आती है.

उन्होंने गाजा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 70,000 से ज्यादा निर्दोष लोग (मुख्यतः महिलाएं और बच्चे) मारे जा चुके हैं. डॉ. फतहली ने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का मुख्य कारण इजरायली शासन ही है. उन्होंने मांग की कि लेबनान के खिलाफ चल रहे युद्ध को खत्म करना क्षेत्र में शांति स्थापित करने वाले किसी भी समझौते का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए.

यह भी पढ़ें:ईरानी यूरेनियम से क्या बनाना चाहता है अमेरिका? राष्ट्रपति ने ट्रंप ने खुद किया खुलासा

वैश्विक समुदाय और अमेरिका को ईरान का अंतिम संदेश

साक्षात्कार के अंत में डॉ. फतहली ने ईरान की ऐतिहासिक पहचान का हवाला देते हुए अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक शांति संदेश दिया. उन्होंने कहा:

  • 7000 साल पुरानी सभ्यता: ईरान का इतिहास हमेशा से शांति, सह-अस्तित्व और दोस्ती का रहा है. पिछले 300 वर्षों में ईरान ने किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की है.

  • हकीकत स्वीकार करे अमेरिका: टिकाऊ शांति तभी संभव है जब अमेरिका एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान की जमीनी हकीकत और उसके क्षेत्रीय अधिकारों को स्वीकार करे.

निष्कर्ष: ईरान आज भी आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर रचनात्मक संवाद के लिए तैयार है, बशर्ते दूसरा पक्ष भी अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करे.

स्रोत: आईएएनएस (IANS)

डिस्कलेमर- हेडिंग, सबहेड और समरी को छोड़कर पूरी स्टोरी न्यूज एजेंसी IANS की है. 

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India UK Critical Minerals Observatory: भारत-यूके साझेदारी को नई मजबूती, क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी सेंटर का हुआ शुभारंभ

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों (नरेंद्र मोदी और कीर स्टार्मर) द्वारा वर्ष 2025 में क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी स्थापित करने की घोषणा के बाद अब इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. गुरुवार को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेटे कूपर ने संयुक्त रूप से भारत-यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी (जीएससीओ) सैटेलाइट सेंटर का उद्घाटन किया. गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई.

डिजिटल मटेरियल फ्लो मैप का प्रमुख केंद्र

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि यह ऑब्जर्वेटरी दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित, टिकाऊ और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीकों और डिजिटल परिवर्तन के तेजी से विस्तार के साथ क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते जा रहे हैं. यह ऑब्जर्वेटरी दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल मटेरियल फ्लो मैप का प्रमुख केंद्र बनेगी.

$4 अरब का नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और आत्मनिर्भरता

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. इसी उद्देश्य से 4 अरब डॉलर के नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन की शुरुआत की गई है. इस मिशन का लक्ष्य खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और नवाचार को मजबूत बनाना है.

खनिज सुरक्षा और रीसाइक्लिंग के लिए विशेष योजनाएं

बयान में कहा गया कि सरकार क्रिटिकल मिनरल्स की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए 18 करोड़ डॉलर की विशेष योजना भी लागू कर रही है. इसके अलावा, देश भर में 9 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं. सरकार औद्योगिक कचरे से मूल्यवान खनिजों की पुनर्प्राप्ति और विदेशों में खनिज संपत्तियों के विकास जैसे कदम भी उठा रही है, ताकि देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.

खनिज क्षेत्र में नीतिगत सुधार और निवेश के अवसर

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार कई नीतिगत सुधार कर रही है. पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था के साथ-साथ निजी कंपनियों और जूनियर माइनिंग कंपनियों को भी नए अवसर दिए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि तेज मंजूरी प्रक्रियाओं और निवेश-अनुकूल नीतियों के जरिए भारत को खनिज क्षेत्र में निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में शामिल किया जा रहा है.

ब्रिटेन की कंपनियों और तकनीकी संस्थानों को निवेश का आमंत्रण

केंद्रीय मंत्री ने ब्रिटेन की कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी संस्थानों को भारत के क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में निवेश करने का आमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि खनिज प्रसंस्करण और खनन तकनीक में ब्रिटेन की विशेषज्ञता भारत के इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के विकास को तेज गति दे सकती है.

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वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स इंटेलिजेंस सेंटर के रूप में विकास

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह ऑब्जर्वेटरी वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त क्रिटिकल मिनरल्स इंटेलिजेंस सेंटर के रूप में विकसित होगी. यह उद्योगों, शोधकर्ताओं और निवेशकों को महत्वपूर्ण डेटा और विश्लेषण उपलब्ध कराएगी, जिससे बेहतर निर्णय लेने और नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

स्रोत--आईएएनएस

डीबीपी

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