रीवा में बड़ा हादसा टला: 10 फीट गहरे गड्ढे में गिरा मासूम, 2 घंटे बाद सुरक्षित निकाला गया
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने कुछ समय के लिए पूरे इलाके की सांसें थाम दीं। गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के महाजन टोला में एक साल का मासूम खेलते-खेलते घर के बाहर बने करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया। बच्चे के गड्ढे में गिरने की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए।
जानकारी के अनुसार, बाबू केवट का बेटा शिवेंद्र केवट घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान वह पिलर निर्माण के लिए खोदे गए संकरे गड्ढे में जा गिरा। गड्ढा लगभग 10 फीट गहरा और करीब एक फीट चौड़ा था, जिससे बच्चे तक सीधे पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया।
बच्चे के गड्ढे में गिरने की खबर तेजी से पूरे गांव में फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सभी की चिंता सिर्फ एक थी कि किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। राहत की बात यह रही कि गड्ढे में गिरने के बाद भी बच्चा जीवित था, जिससे बचाव दल को उम्मीद बनी रही।
पुलिस और ग्रामीणों ने दिखाई समझदारी
घटना की जानकारी मिलते ही गोविंदगढ़ थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हालात का जायजा लेने के बाद तय किया गया कि सीधे गड्ढे में उतरना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर एक वैकल्पिक योजना बनाई।
बच्चे तक पहुंचने के लिए मूल गड्ढे के समानांतर दूसरा गड्ढा खोदना शुरू किया गया। यह काम आसान नहीं था क्योंकि मिट्टी खिसकने का खतरा भी बना हुआ था। करीब दो घंटे तक लगातार मेहनत करने के बाद बचाव दल बच्चे तक पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ मासूम को बाहर निकाला गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूरे गांव की निगाहें मौके पर टिकी रहीं। जैसे ही बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लोगों ने राहत की सांस ली। कई ग्रामीणों ने पुलिस और बचाव दल की तत्परता की सराहना की।
गड्ढों की सुरक्षा पर उठे सवाल, परिवार ने जताया आभार
बचाव के तुरंत बाद बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई, जो किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।
इस घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरों और सार्वजनिक स्थानों पर खोदे जाने वाले गहरे गड्ढों को खुला छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाना जरूरी है ताकि बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बच्चे के सुरक्षित बच जाने के बाद परिवार ने पुलिस, प्रशासन और ग्रामीणों का आभार जताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर रेस्क्यू शुरू नहीं किया जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। यह घटना दिखाती है कि संकट के समय प्रशासन और समाज मिलकर काम करें तो बड़े से बड़ा हादसा भी टाला जा सकता है।
वाराणसी में 200 करोड़ की लागत से बनेगा शिप रिपेयरिंग सेंटर, मरम्मत के लिए कोलकाता नहीं भेजने पड़ेंगे जहाज
अंतर्देशीय जल परिवहन और क्रूज पर्यटन को राष्ट्रीय जलमार्ग पर गंगा के रास्ते एक और मजबूत पकड़ मिलने जा रही है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण रामनगर मल्टी मोडल टर्मिनल पर एक अत्याधुनिक शिप रिपेयरिंग सेंटर 200 करोड रुपए की लागत से बनाया जाने वाला। जानकारी के मुताबिक इसका निर्माण जून से शुरू कर दिया जाएगा।
इस परियोजना के लिए इस क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलएंडटी जियो स्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड को आर्डर जारी कर दिया गया है। इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मॉडल पर आधारित यह परियोजना अगले 2 साल में पूरी होने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में इस आधुनिक शिप रिपेयरिंग हब की आधारशिला रखी थी।
अब नहीं जाना होगा कोलकाता
गंगा में चलने वाले छोटे बड़े जहाज, मालवाहक और लग्जरी टूरिस्ट क्रूज में कोई भी खराबी आने पर उन्हें मरम्मत के लिए लाखों रुपए खर्च कर कोलकाता भेजा जाता था। बनारस के साथ पटना में इस सुविधा के विकसित होने से जहाज का डाउन टाइम कम हो जाएगा, जिससे परिचालन की लागत में कमी आएगी।
टीम ने की जांच
इस परियोजना के संबंध में आईडब्ल्यूएआई आपकी टीम ने टर्मिनल की स्थिति की जांच कर ली है और निर्माण शुरू करने की सहमति भी दे दी है। इस परियोजना को केंद्र सरकार के जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट को गति देने और हल्दिया से प्रयागराज के बीच संचालित किए जा रहे देश के सबसे लंबे राष्ट्रीय जलमार्ग सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अपग्रेड किया जाएगा रामनगर टर्मिनल
जहाजों का सुचारू संचालन किया जा सके इसके लिए रामनगर टर्मिनल को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों के अनुसार अपग्रेड भी किया जाएगा। यहां ड्राई डाक क्षमता का विस्तार किया जा रहा है। ये एक ऐसी उन्नत प्रक्रिया है, जिसमें जहाजों को पानी से निकालकर सूखे स्थान पर खड़ा किया जाता है। इसके बाद उनके निचले हिस्से की सफाई की जाती है। इंजन की मरम्मत करने के साथ जिंक रोधी पेंटिंग भी की जाती है।
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