News Pulse: सुबह-सुबह देश-दुनिया से आए ये बड़े अपडेट, टेरर अलर्ट से ईरान संकट तक
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Karnataka Public Property Bill 2026: सरकारी इमारतों में RSS के कार्यक्रमों पर रोक की तैयारी, कर्नाटक सरकार लाने जा रही है नया विधेयक
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार सरकारी परिसरों और संपत्तियों के नियमन के लिए एक नया बिल लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राज्य कैबिनेट की बैठक में 'कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रेमिसेस एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल-2026' के मसौदे पर विस्तृत चर्चा की गई है। इस कानून के लागू होने के बाद किसी भी संगठन को सरकारी संपत्ति पर कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अनिवार्य रूप से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी।
कैबिनेट में 'सार्वजनिक संपत्ति नियमन विधेयक 2026' पर हुई चर्चा
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में 'कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रेमिसेस एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल-2026' (The Karnataka Regulation of Use of Government Premises and Public Property Bill, 2026) लाने पर विचार-विमर्श किया गया।
इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गैर-पंजीकृत समूह या संस्था सरकारी स्थानों पर मनमाने ढंग से अपनी गतिविधियां संचालित न कर सके।
RSS जैसी संस्थाओं को भी लेनी होगी आधिकारिक अनुमति
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, किसी भी संगठन को कोई भी कार्यक्रम या बैठक करने से पहले अधिकृत सरकारी एजेंसी या अधिकारी से लिखित अनुमति हासिल करनी होगी।
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों को भी सरकारी स्कूलों की इमारतों, परिसरों या सार्वजनिक खेल मैदानों में शाखा अथवा सभा आयोजित करने के लिए पूर्व आधिकारिक मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
मंत्री प्रियांक खरगे के पत्र के बाद तेज हुई कानूनी कवायद
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रियांक खरगे की उस मांग से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने सरकारी स्थलों पर संघ की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की अपील की थी।
उन्होंने पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक मैदानों में संघ की शाखाएं चलाई जाती हैं, जहां बच्चों और युवाओं के मन में नकारात्मक विचार भरे जाते हैं। खरगे ने इन गतिविधियों को देश की एकता और संविधान की मूल भावना के खिलाफ करार दिया था।
बिना पंजीकरण वाली संस्थाओं के अधिकारों पर उठे सवाल
इस नए विधेयक के जरिए कर्नाटक सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सरकारी संपत्तियों का उपयोग पूरी तरह से नियम-कायदों के दायरे में ही होना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब तक कोई संगठन वैधानिक रूप से पंजीकृत न हो और वह नियमानुसार अनुमति न ले, तब तक उसे सार्वजनिक करदाताओं के पैसे से बनी इमारतों का उपयोग करने की छूट नहीं दी जा सकती।
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