NEET UG मामले में 3 गिरफ्तार, Bihar Police EOU के हत्थे चढ़े 2 मेडिकल छात्र
बिहार में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) और दोबारा आयोजित नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने दो मेडिकल छात्रों समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि कथित गिरोह परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे परीक्षार्थी बैठाने से लेकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले तक के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। ईओयू की ओर से बृहस्पतिवार को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नालंदा जिले के गिरियक मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे उज्ज्वल राज को 11 अगस्त को पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया गया।
उसके पास से 2.95 लाख रुपये नकद मिले। वह पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया थाना क्षेत्र के दिलवरपुर का रहने वाला और पावापुरी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस अंतिम वर्ष का छात्र बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार दोबारा आयोजित नीट परीक्षा से जुड़े तीन मामलों के मुख्य सरगना बताए जा रहे रविशंकर उर्फ सम्राट को 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
वह पटना जिले के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के मकसूदपुर का रहने वाला है और पावापुरी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस का छात्र बताया गया है। ईओयू के मुताबिक वह पहले रेलवे की समूह-घ भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल जा चुका है। रविशंकर की गिरफ्तारी के बाद उसकी निशानदेही पर पटना के रामकृष्ण नगर में छापेमारी की गई।
तलाशी के दौरान उसके भाई के फ्लैट और एक किराए के मकान से एमबीबीएस परीक्षा की खाली पुस्तिकाएं, नीट, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबंधित कई प्रवेश पत्र बरामद किए गए। ईओयू ने बताया कि बड़ी संख्या में जाति, आय और दिव्यांगता से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किन अभ्यर्थियों ने किया और इनके जरिए मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया में किस तरह लाभ लेने की कोशिश की गई।
मामले में रविशंकर के बड़े भाई अश्विनी कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। ईओयू के अनुसार, उस पर रविशंकर की मदद करने और उसे कथित रूप से संरक्षण देने का आरोप है।
Jharkhand CM Hemant Soren ने PM Modi को पत्र लिखकर खनन विधेयक पर पुनर्विचार की मांग की
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। सोरेन ने प्रधानमंत्री से कहा कि राज्य के शुल्क पर प्रतिबंध से झारखंड की वित्तीय क्षमता काफी प्रभावित हो सकती है और इससे खनन के सामाजिक एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभावों से निपटने की राज्य की क्षमता कम हो सकती है। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सोरेन ने कहा कि राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व का 84.9 प्रतिशत था।
उन्होंने कहा कि मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से सालाना लगभग 7,110 करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है और खनिज से जुड़ा राजस्व राज्य की वित्तीय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सोरेन ने कहा, ‘‘इस राजस्व पर किसी भी तरह की बड़ी रोक झारखंड की विकास, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को जारी रखने की क्षमता को सीधे प्रभावित करेगी।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की खनिज संपदा का आकलन उन भारी लागतों के साथ किया जाना चाहिए, जिन्हें राज्य और यहां के लोगों को उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दशकों से बड़े पैमाने पर हो रहे खनन के कारण विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान, प्रदूषण, स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव और पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्थाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं पैदा हुई हैं।
सोरेन ने कहा कि झारखंड ने अपनी खनिज संपदा के माध्यम से देश के औद्योगिकीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन जब राज्य और उसके लोग खनन के लगातार दुष्परिणामों को झेल रहे हैं तो खनिज संपदा को केवल आर्थिक लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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