राहुल बोले-BJP-RSS मनुवादी सोच को बढ़ावा दे रही:खड़गे की रैली के शुद्धिकरण से संविधान का अपमान; देश के हर जिले में सत्याग्रह करेगी कांग्रेस
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने BJP-RSS पर मनुवादी सोच को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह बात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद मंच के शुद्धिकरण को लेकर कही। राहुल ने गुरुवार को प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह ऐसी मानसिकता है, जो आज भी इंसान की हैसियत उसके जन्म से तय करती है, न कि समानता और इंसानियत से। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर 14 अगस्त को देशभर के जिला मुख्यालयों पर मार्च और सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। खड़गे बोले- कभी किसी के आगे अपनी रक्षा के लिए गिड़गिड़ाए नहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को राज्यसभा में आरोप लगाया था कि 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मंच से भाषण दिया था, जहां लाखों लोग मौजूद थे। उस वक्त मैंने किसी समाज का, किसी धर्म का नाम नहीं लिया। सिर्फ लोगों की समस्याओं को वहां पर बताया। लेकिन मेरी स्पीच होने के बाद BJP के लोगों ने हवन करके मंच का शुद्धिकरण किया। खड़गे ने कहा कि वे अनुसूचित जाति से आते हैं और सालों से संसद में हैं, लेकिन कभी किसी के आगे अपनी रक्षा के लिए गिड़गिड़ाए नहीं। उन्होंने मांग की कि हल्द्वानी में मंच का शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ अनटचेबिलिटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। जेपी नड्डा बोले- घटना पूरे देश के लिए दुखद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे जी के साथ जो हुआ या जो भावनाएं आहत हुईं, वह सिर्फ कांग्रेस के लिए नहीं बल्कि हम सभी और पूरे देश के लिए दुखद है। BJP ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती। हम इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे और अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। जब हम कह रहे हैं कि हम ऐसी सोच का समर्थन नहीं करते, तो खड़गे साहब को भी इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। खड़गे कांग्रेस के दूसरे दलित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस में बाबू जगजीवन राम के बाद दूसरे दलित अध्यक्ष हैं। जगजीवन राम ने 1970-71 में कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। खड़गे का राजनीतिक सफर कर्नाटक से शुरू हुआ और वे 9 बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2009 और 2014 में गुलबर्गा लोकसभा सीट से सांसद रहे। 2014 के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे और 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा पहुंचे। वे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले खड़गे पार्टी के लंबे समय तक वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे। --------------- ये खबर भी पढ़ें… राहुल बोले-देश में लोगों को बोलने से रोका जा रहा:हमारा काम आवाज बुलंद करना, सरकार को समझ आ गया कि लोग अब चुप नहीं रहेंगे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार लोगों को अपनी बात रखने से रोक रही है। सरकार व्यवस्था लागू करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का काम भारत को अपनी बात कहने का मौका देना है। पूरी खबर पढ़ें…
भास्कर अपडेट्स:दिल्ली के पंजाबी बाग में फ्लाईओवर से गिरने से महिला की मौत; परिवार को बिना बताए घर से निकली थी
दिल्ली के पंजाबी बाग में ब्रिटानिया चौक के पास फ्लाईओवर से गिरने के बाद 29 साल की महिला की मौत हो गई। पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, घटना की सूचना पीसीआर कॉल के जरिए मिली थी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद लोगों ने महिला को मोती नगर के आचार्य श्री भिक्षु अस्पताल पहुंचाया। महिला उस समय बोल नहीं पा रही थी। बाद में उसकी पहचान शकूरपुर निवासी के रूप में हुई। उसकी शादी 2019 में हुई थी और उसके दो बच्चे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि महिला की पिछले एक हफ्ते से तबीयत ठीक नहीं थी। वह मानसिक रूप से भी परेशान बताई जा रही थी। महिला दोपहर करीब 1 बजे परिवार को बताए बिना घर से निकली थी। घटना की जांच के लिए क्राइम टीम ने मौके का मुआयना किया। इसके बाद महिला को आरएमएल अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। आज की अन्य बड़ी खबरें… इतिहासकार सुमित सरकार का निधन, 87 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में जाने जाते थे इतिहासकार सुमित सरकार का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 87 साल के थे। इतिहासकार और परिवार की करीबी मित्र अरुणिमा ने यह जानकारी दी। अरुणिमा ने बताया कि प्रोफेसर सरकार लंबे समय से बीमार थे। कुछ समय से उम्र संबंधी परेशानियों के कारण उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी। सुमित सरकार का जन्म 1939 में इतिहासकार सुशोभन सरकार के घर हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से इतिहास की पढ़ाई की थी। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी में लेक्चरर और यूनिवर्सिटी ऑफ बर्दवान में रीडर के तौर पर पढ़ाया। इतिहास के प्रोफेसर के रूप में उनका सबसे लंबा कार्यकाल दिल्ली यूनिवर्सिटी में रहा। उनकी प्रमुख किताबों में द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल, मॉडर्न इंडिया 1885-1947 और राइटिंग सोशल हिस्ट्री शामिल हैं। इन किताबों ने उन्हें औपनिवेशिक शासन, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन को अलग-अलग सामाजिक समूहों, वर्गों और जन आंदोलनों के नजरिए से समझने वाले प्रमुख इतिहासकार के रूप में स्थापित किया। सुमित सरकार मार्क्सवादी इतिहासकार के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने स्वदेशी आंदोलन पर महत्वपूर्ण अध्ययन किया और भारतीय राष्ट्रवाद के केवल बड़े नेताओं पर केंद्रित पारंपरिक इतिहास को चुनौती दी। वह सबाल्टर्न स्टडीज कलेक्टिव के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थे, हालांकि बाद में उन्होंने इस विचारधारा की आलोचना भी की। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर अपने काम के लिए सुमित सरकार को 2003 में इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी का सरित चटर्जी मेमोरियल अवॉर्ड मिला था। 2004 में उनकी किताब राइटिंग सोशल हिस्ट्री के लिए उन्हें रवींद्र पुरस्कार दिया गया। हालांकि, 2007 में उन्होंने पश्चिम बंगाल की CPI(M) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के किसानों के साथ व्यवहार के विरोध में यह पुरस्कार लौटा दिया था।
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