चीन: थ्येनआनमन सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों के परिजनों को कब्रों पर न जाने की चेतावनी
चीन: थ्येनआनमन सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों के परिजनों को कब्रों पर न जाने की चेतावनीExplainer: रूस से भारत को मिली S-400 मिसाइल सिस्टम की चौथी खेप, जानें क्यों इसे कहा जाता है 'सुदर्शन चक्र'
Explainer: भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत में इजाफा कर रहा है. अब रूस से एक और एस-400 (S-400) एयर डिफेंस सिस्टम भारत पहुंच गया है. रूस ने बुधवार यानी 3 जून को चौथी स्क्वाड्रन भारत को भेज दी. ये वहीं घातक हथियार है जिसने ऑरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के दांत खट्टे कर दिए थे. इस एयर डिफेंस सिस्टम को भारत का सुदर्शन चक्र कहा जाता है.
इस एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय सेना और रक्षा विशेषज्ञों ने सुदर्शन नाम दिया था. ये एयर डिफेंस सिस्टम भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह ही अचूक और विनाशकारी हथियार है. एस-400 के चौथे स्क्वाड्रन के भारत आने से भारत की लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती देखने को मिलेगी.
समुद्री जहाज से भारत लाया गया S-400 एयर डिफेंस सिस्टम
बता दें कि भारत और रूस के रिश्ते हमेशा घनिष्ट रहे हैं. ऐसे में रूस भारत के लिए बेहद अहम रक्षा सहयोगी बन गया है. 3 जून को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी खेल समुद्री जहाज से भारत के तट पर पहुंचा. माना जा रहा है कि इस एयर डिफेंस सिस्टम को जल्द ही ऑपरेशनल एरिया में तैनात किया जाएगा. भारत के आसमान में किसी बाज की तरह नजर रखेगा. जिससे भारतीय आसमान में आंख उठाने की किसी की जुर्रत नहीं होगी.
2018 में हुई थी एस-400 के लिए डील
बता दें कि भारत और रूस के बीच 2018 में एक ऐतिहासिक डील हुई थी. जिसके तहत रूस से भारत को कुल पांच S-400 सुदर्शन स्क्वाड्रन मिलने हैं. इनमें से तीन स्क्वाड्रन करीब तीन साल पहले ही भारत को मिल चुके हैं. जबकि चौथी खेप बुधवार को भारत पहुंच गई. भारत में पहले से मौजूद एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर तैनात हैं, जहां वे पूरी मुस्तैदी से देश की रक्षा कर रहे हैं.
रूस-यूक्रेन जंग के चलते हुई देरी
समझौते के तहत भारत को करीब दो साल पहले ही तीन S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी हो गई. लेकिन रूस-यूक्रेन जंग के चलते बाकी दो एयर डिफेंस सिस्टम के भारत आने में देरी हो गई. बावजूद इसके रूस आखिरकार भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझते हुए चौथे स्क्वाड्रन की सप्लाई भी कर दी. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस डील का पांचवां और आखिरी स्क्वाड्रन भी जल्द भारत आ जाएगा. माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में पांचवां एयर डिफेंस सिस्टम भी भारत पहुंच सकता है. उसके साथ ही रूस के साथ भारत का ये ऐतिहासिक सौदा पूरा हो जाएगा.
पूरी दुनिया मान चुकी है S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का लोग
बता दें कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम सिर्फ एक मिसाइल सिस्टम नहीं है, बल्कि ये युद्ध के मैदान में दुश्मन के दांत खंटे कर देता है. ये अचूक हथियार जंग के मैदान में पासा पलटने के लिए भी जाना जाता है. पूरी दुनिया इस मारक हथियार का लोहा मान चुकी है. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी एयरफोर्स की पूरी तैयारियों को तहस-नहस कर दिया था.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुदर्शन सिस्टम ने सैन्य इतिहास का एक बेहद अनोखा और सबसे लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज किया. एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार उड़ रहे पाकिस्तानी वायु सेना के जासूसी और निगरानी विमान को ट्रैक किया हवा में ही मार गिराया. एस-400 ने जब इस जंगी जहाज को मार तब उसकी दूरी करीब 300 किलोमीटर दूर थी. ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के प्रदर्शन से साबित हो गया कि दुश्मन का कोई आधुनिक लड़ाकू विमान या ड्रोन उसकी नजरों से बच नहीं सकता.
जानें क्यों दिया गया S-400 को 'सुदर्शन चक्र' नाम?
रूस से मिले इस घातक एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय सेना ने 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया. जो पौराणिक कथाओं में वर्णित भगवान श्री कृष्ण के शक्तिशाली दिव्य शस्त्र, सुदर्शन चक्र के नाम पर रखा गया है. एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया के सबसे उन्नत और लंबी दूरी तक मार करने वाली वायु रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है.
बता दें कि सुदर्शन चक्र का भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण नाम है. इसे तमिल में चक्रत्तालवार और थाईलैंड में चक्री वंश के नाम से जाना जाता है. जैसे भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र 360 डिग्री में काम करता है. वैसे ही एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी 360 डिग्री घूमकर भारत निगरानी करता है. इसीलिए इस एयर डिफेंस सिस्टम को सेना ने 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया है.
बता दें कि कुछ धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त ऊर्जा से किया गया. जबकि कुछ ग्रंथों में कहा गया है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति देव ने भगवान विष्णु को यह सुदर्शन चक्र प्रदान किया था. वहीं महाभारत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने अग्निदेव की सहायता से खांडव वन को नष्ट कर दिया था, जिसके बदले में अग्निदेव ने श्रीकृष्ण को एक चक्र और कौमोदकी गदा भेंट की थी.
जानें कितने में हुई थी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील?
भारत और रूस के बीच 2018 में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन की डील हुई थी. ये डील करीब 5.4 बिलियन डॉलर यानी करीब 35 से 40 हजार करोड़ रुपये में हुई थी. इस तरह से देखा जाए तो एक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की कीमत 7000-8000 करोड़ रुपये है. अगर इस एयर डिफेंस सिस्टम की मारक क्षमता की बात की जाए तो ये 400 किलोमीट के दायरे में दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल को एक साथ ट्रैक कर तबाह कर सकता है.
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इसके अलावा ये 30 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के किसी भी टारगेट को मारने में सक्षम है. ये एयर डिफेंस सिस्टम 600 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन की पहचान कर सकता है. इसमें एक साथ 300 से ज्यादा टारगेट को ट्रैक करने की क्षमता है. एस-400 5 से 10 मिनट में तैनाती के लिए तैयार हो जाता है. जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचने में भी सक्षम है.
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