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जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल करने से क्या बदलेगा

Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill 2026: मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 पेश हुआ, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह बिल सदन में रखा। इस विधेयक का उद्देश्य देशभर में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल करना और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाना है। आइए समझते हैं कि ये बिल क्या है, इससे क्या क्या नियम बदलेंगे और आम लोगों के लिए क्या लाभ होंगे।

इस कानून के तहत अब पूरे देश में भारत सरकार नागरिक पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाने के लिए नए संशोधन लागू कर  रही है।
 

विलंबित पंजीकरण के लिए सख्त प्रावधान  

नए प्रावधान के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से अधिक देर से कराया जाता है, तो अब DM या SDM इसकी मंजूरी नहीं दे सकेंगे. ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश के बाद ही हो सकेगा। इससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नए नियम 


1. नाम दर्ज कराने और सुधार के नियम

- 12 महीने की सीमा: यदि जन्म के समय बच्चे का नाम दर्ज नहीं कराया गया है, तो माता-पिता या अभिभावक को 12 महीने के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
- मानक प्रारूप (Standard Format): जन्म प्रमाण पत्र में नाम केवल फर्स्ट नेम, मिडिल नेम और लास्ट नेम के प्रारूप में ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी प्रकार का शॉर्ट फॉर्म मान्य नहीं होगा।
- विलंब शुल्क (Late Fee): 1 वर्ष के बाद से लेकर 15 वर्ष की आयु तक नाम दर्ज कराने पर विलंब शुल्क देय होगा।
- त्रुटि सुधार (Correction): स्पेलिंग या अन्य मामूली गलती होने पर जिला रजिस्ट्रार को आवेदन देकर सुधार करवाया जा सकता है।
- आवश्यक दस्तावेज: इस पूरी प्रक्रिया के लिए माता-पिता के पहचान पत्र (स्व-प्रमाणित दस्तावेज) और पते का सही सत्यापन जमा करना अनिवार्य होगा।

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2. देरी से पंजीकरण के लिए प्रस्तावित नए नियम 

- वर्तमान व्यवस्था में 1 वर्ष से अधिक की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होती है। 
- नए विधेयक के तहत इस प्रक्रिया को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- देरी की अवधि 
- स्वीकृत करने वाली अथॉरिटी  

प्रक्रिया व शर्तें

- 1 से 2 वर्ष की देरी 
जिला मजिस्ट्रेट (DM), SDM या कार्यकारी मजिस्ट्रेट, मौजूदा प्रक्रिया के तहत ही क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट से मंजूरी और निर्धारित शुल्क। 
- 2 वर्ष से अधिक की देरी 

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट 

- कड़े नियम: मामला कार्यपालिका से न्यायपालिका के पास जाएगा। गहन जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी। |
- ध्यान दें: अनुमति देने से पहले नामित अधिकारी के लिए जन्म या मृत्यु की सत्यता का सत्यापन (Verification) करना अनिवार्य होगा।

3. विधेयक लाने का उद्देश्य और जरूरत 

a. फर्जी रिकॉर्ड पर रोक: असत्यापित या फर्जी दावों के आधार पर बनने वाले जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्रों पर पूरी तरह से अंकुश लगाना।
b. सटीक राष्ट्रीय डेटा: स्कूल दाखिले, मतदाता सूची, राशन कार्ड, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं के डेटाबेस को अधिक विश्वसनीय बनाना।
c. समय पर सूचना को बढ़ावा:  लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म व मृत्यु की जानकारी दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना।
d. अस्पताल के बाहर हुई मृत्यु: इसके पंजीकरण के लिए मान्यता प्राप्त डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करना।

4. पंजीकरण का कानूनी महत्व 

- जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- जन्म प्रमाण पत्र की उपयोगिता: स्कूल/कॉलेज में प्रवेश, पासपोर्ट बनवाने, आधार नामांकन, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, सरकारी नौकरियों और विवाह पंजीकरण आदि के लिए प्राथमिक दस्तावेज।
- मृत्यु प्रमाण पत्र की उपयोगिता: संपत्ति के हस्तांतरण, विरासत के दावों, बीमा क्लेम, पेंशन लाभ और बैंक खाते बंद कराने के लिए आवश्यक।

5. कानून के संभावित प्रभाव 

- पारदर्शिता और विश्वसनीयता: न्यायिक निगरानी (Judicial Oversight) लागू होने से प्रशासनिक दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा रुकेगा।

- सत्यनिष्ठ आवेदकों के लिए रास्ता खुला: जिनके पास पंजीकरण में देरी के वैध और ठोस कारण हैं, वे न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।
 
- संतुलन: यह संशोधन प्रत्येक नागरिक का रिकॉर्ड सुरक्षित करने और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के बीच एक प्रभावी संतुलन स्थापित करता है।

केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जुड़ेगा रिकॉर्ड 

इस कानून के तहत अब पूरे देश के जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। इससे देश के किसी भी हिस्से में होने वाले जन्म या मृत्यु की जानकारी एक ही जगह ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इस डेटाबेस को मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य राष्ट्रीय पहचान पत्रों से भी जोड़ा जाएगा। कोई नागरिक 18 वर्ष का होगा, उसका नाम स्वतः मतदाता सूची में जुड़ जाएगा। वहीं, किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर सरकारी रिकॉर्ड से उसका नाम आसानी से हटाया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी लाभ उठाने की घटनाओं पर रोक लगेगी।

नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र सबसे मुख्य दस्तावेज बन जाएगा। अब तक स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस या सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र ही उम्र और पहचान का एकमात्र आधिकारिक दस्तावेज माना जाएगा।

जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड डिजिटल कर देने से जो सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा वह देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले घुसपैठियों की पहचान करने हेतु एक व्यवस्थित एवं मजबूत सिस्टम डेवलप होगा। यह बात किसी से नहीं छुपी हुई है कि घुसपैठ करने वाले लगातार देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं उनके मंसूबों को काफी हद तक रोकने में यह कानून मददगार सिद्ध होगा।

फ़र्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र तथा उसके द्वारा आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, बैंक अकाउंट और मतदाता सूची में जुड़ जाने तक का कार्य हो जाता है। यह न सिर्फ अनधिकृत रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बल्कि भारत देश में रहकर इसकी एकता और अखंडता को तोड़ने का काम करने वालों को रोकने के लिए एक ठोस और सशक्त उपाय सिद्ध होगा।

- डॉ ऋतु दुबे तिवारी 
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ
वर्तमान में गाजियाबाद में NISCORT कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत

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सौरव गांगुली, पत्नी डोना को जान से मारने की धमकी:2 लेटर मिले, लिखा- सबको खत्म कर देंगे; 6 महीने से आ रहे पत्र

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और BCCI के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली को जान से मारने की धमकी मिली है। कुरियर से भेजे गए धमकी भरे पत्र में सौरव समेत उनकी पत्नी डोना गांगुली और उनके स्टाफ को जान से मारने की बात कही गई। गांगुली परिवार ने कोलकाता के ठाकुरपुकुर पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। CAB ऑफिस में कुरियर से आया पैकेट शिकायत के अनुसार सोमवार को बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) के दफ्तर में एक कूरियर पैकेट पहुंचा। इसमें अंग्रेजी में लिखे दो लेटर मिले। इनमें बेहद आक्रामक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। गांगुली परिवार को इस तरह के पत्र पिछले 6 महीने से लगातार मिल रहे थे। शुरुआती दिनों में परिवार ने इन्हें किसी सिरफिरे फैन या निजी नाराजगी जताने वाले व्यक्ति की हरकत समझकर नजरअंदाज कर दिया था। PTI ने मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी के हवाले से लिखा- हम शिकायत को गंभीरता से ले रहे हैं और जांच जारी है। जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान के लिए लेटर्स, उनके सोर्स और कूरियर की जानकारी की जांची जा रही है। 3 पॉइंट्स पर जांच जारी गांगुली ने 16 साल इंटरनेशनल क्रिकेट खेला 2019 में BCCI अध्यक्ष बने थे गांगुली गांगुली क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष हैं। 2019 में BCCI के अध्यक्ष बने थे। उन्हें 2022 में पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनकी जगह 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे रोजर बिन्नी को नया चेयरमैन बनाया गया। --------------------------------------- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… खिलाड़ी की शिकायत पर पुडुचेरी कोच पर FIR; 8 महीने पुराना है विवाद, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज पुडुचेरी (CAP) के अंडर-19 कोच एस. वेंकटरमन पर FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई खिलाड़ी की याचिका पर कोर्ट के आदेश के बाद हुई। पुडुचेरी के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को कोच के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। मामला 8 दिसंबर 2025 को CAP परिसर में हुए विवाद से जुड़ा है। पढ़ें पूरी खबर

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