दिल्ली में मौसम फिर बदलेगा- फिर आएगा आंधी-तूफान! बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी
बुधवार को राजधानी में तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जबकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी करते हुए बारिश, आंधी-तूफ़ान और तेज़ हवाओं की चेतावनी दी है। शहर के मौसम का प्रतिनिधित्व करने वाले सफदरजंग में अधिकतम तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.9 डिग्री कम और पिछले दिन की तुलना में 1.4 डिग्री ज़्यादा था। न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री ज़्यादा और मंगलवार की तुलना में 0.6 डिग्री ज़्यादा था।
वहीं, रिज क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.4 डिग्री अधिक है, जबकि आयानगर में यह 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 147 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। सीपीसीबी के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 ‘संतोषजनक’, 101 से 200 ‘मध्यम’, 201 से 300 ‘खराब’, 301 से 400 ‘अत्यंत खराब’ और 401 से 500 ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।
इस बीच, बुधवार को दिल्ली की हवा की क्वालिटी 'मॉडरेट' कैटेगरी में बनी रही। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के डेटा के मुताबिक, बुधवार शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 143 (मॉडरेट) दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को इसी समय औसत AQI 106 (मॉडरेट) था।
CPCB के मानकों के अनुसार, 0-50 का AQI 'अच्छा', 51-100 'संतोषजनक', 101-200 'मॉडरेट', 201-300 'खराब', 301-400 'बहुत खराब' और 401-500 'गंभीर' माना जाता है। दिल्ली के लिए एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) ने अनुमान लगाया है कि अगले कुछ दिनों तक AQI 'मॉडरेट' कैटेगरी में ही रहेगा।
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Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पाला
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन 'प्रतिनिधि सभा' (House of Representatives) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने वाले एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकना है। इस मतदान की सबसे खास बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने पाला बदलते हुए विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया और अपनी ही सरकार के रुख का कड़ा विरोध किया। युद्ध ने देश-विदेश की राजनीति को प्रभावित किया है। सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने दो सप्ताह पहले सदन की कार्यवाही अचानक स्थगित कर दी थी और इस प्रस्ताव को पारित होने से रोकने की कोशिश की थी जिसे उस समय मंजूरी मिलने की संभावना बन रही थी।
हालांकि, जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचता गया और राष्ट्रपति ट्रंप त्वरित समाधान निकालने के लिए जूझते दिखायी दिखे, तो युद्ध के प्रति असंतोष बढ़ता गया। बुधवार को मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। परिणाम घोषित होते ही सांसदों ने खुशियां मनायीं। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा, ‘‘यह बिना सोचा-समझा और महंगा युद्ध आज ही समाप्त होना चाहिए। हमें केवल कुछ रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की जरूरत है। यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोझ डाल चुका है और इसने अमेरिका की स्थिति को कमजोर किया है।’’ ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध की रोकथाम की दिशा में प्रतिनिधि सभा में यह चौथा प्रयास था और पहली बार यह प्रस्ताव पारित हुआ है।
पिछले महीने सीनेट ने भी इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था, जब कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपनी पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर उसका समर्थन किया था। हर बार जब डेमोक्रेट्स यह प्रस्ताव लेकर आए तो समर्थन बढ़ता गया। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को विदेशी संघर्षों से दूर रखने और घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया था, लेकिन इस युद्ध ने फिर से पश्चिम एशिया को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, जॉनसन ने कहा कि ट्रंप खासकर मध्यावधि चुनावों को देखते हुए अब भी घरेलू मुद्दों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ये चुनाव इस बात का फैसला करेंगे कि संसद में किस पार्टी का नियंत्रण होगा।
उन्होंने बताया कि ट्रंप अपने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक गतिविधियों, विशेष रूप से तेल आपूर्ति के लिए फिर से पूरी तरह खोलने में सहयोग की अपील कर रहे हैं। अमेरिका द्वारा इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। हालांकि, अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थिति अब भी अस्थिर और अनिश्चित बनी हुई है। स्थायी शांति के लिए बातचीत लंबी खिंच रही है।
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इस बीच, ईरान समर्थित हिजबुल्ला के साथ इजराइल के संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले समय-समय पर जारी हैं। प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित यह प्रस्ताव युद्ध को तुरंत नहीं रोकेगा, लेकिन इसे आगे की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। अब यह प्रस्ताव सीनेट में जाएगा। पिछले महीने चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसी तरह के प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि सीनेट ने अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि यदि कांग्रेस यह प्रस्ताव पारित करती है तो ईरान यह समझेगा कि प्रशासन के ‘‘हाथ बंध गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि वे सोचेंगे कि ‘‘हम उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएंगे, तो फिर समझौता क्यों करें?’’ ईरान से जुड़े युद्ध के अलावा कांग्रेस (संसद) राष्ट्रीय सुरक्षा के अन्य मुद्दों पर भी सक्रिय है।
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जिसके तहत रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन और युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में सहायता देने का प्रावधान है। इसके अलावा इस सप्ताह लेबनान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने संबंधी एक अन्य युद्ध शक्ति प्रस्ताव पर भी विचार किए जाने की संभावना है।
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अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है, लेकिन राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होने के नाते सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। इसी वजह से युद्ध और शांति से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार को लेकर लंबे समय से संवैधानिक बहस जारी है। युद्ध शक्तियां अधिनियम के तहत किसी सैन्य कार्रवाई के 60 दिन के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस को कांग्रेस से मंजूरी लेनी होती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि ईरान संघर्ष में युद्धविराम घोषित हो चुका है, इसलिए अब शत्रुता समाप्त मानी जानी चाहिए।

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