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Hindutva for Gen Z Review: युवराज पोखर्ना की किताब कैसे बदल रही है हिंदुत्व पर युवा पीढ़ी की सोच?

भारत की युवा पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसने हिंदुत्व के बारे में अधिकतर बहसें सुनी हैं, लेकिन इसकी मूल अवधारणा को समझने का अवसर कम पाया है। सोशल मीडिया, टेलीविजन डिबेट और राजनीतिक विमर्श के बीच हिंदुत्व अक्सर चर्चा का विषय रहा है, लेकिन इसके ऐतिहासिक और सभ्यतागत पक्ष पर अपेक्षाकृत कम बातचीत हुई है।

इसी संदर्भ में लेखक युवराज पोखर्ना की पुस्तक 'Hindutva for Gen Z' चर्चा में है। ब्लूवन इंक द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक की प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने लिखी है। पुस्तक का उद्देश्य युवा पाठकों के सामने हिंदुत्व को सरल, संवादात्मक और समकालीन संदर्भ में प्रस्तुत करना है।

हिंदुत्व को समझाने का अलग प्रयास
पुस्तक का केंद्रीय तर्क यह है कि हिंदुत्व को केवल राजनीतिक बहसों या मीडिया में प्रचलित धारणाओं के आधार पर नहीं समझा जा सकता। लेखक हिंदुत्व को एक राजनीतिक विचारधारा के बजाय भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।

युवराज पोखर्ना 'तत्व' और 'वाद' के बीच अंतर को विस्तार से समझाने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार हिंदुत्व कोई बंद या कठोर विचार प्रणाली नहीं है, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना है, जो भारतीय समाज और उसकी परंपराओं से जुड़ी हुई है।

लेखक का व्यक्तिगत बौद्धिक सफर
इस पुस्तक की एक महत्वपूर्ण विशेषता लेखक का व्यक्तिगत अनुभव है। पोखर्ना स्वयं अपने वैचारिक और आध्यात्मिक सफर का उल्लेख करते हैं। वे अपने विचारों को किसी उपदेशक की तरह प्रस्तुत नहीं करते, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की तरह रखते हैं जिसने प्रश्न पूछे, उत्तर तलाशे और फिर अपने निष्कर्ष पाठकों के सामने रखे।

यही कारण है कि पुस्तक केवल वैचारिक प्रस्तुति नहीं रह जाती, बल्कि एक व्यक्तिगत बौद्धिक यात्रा का दस्तावेज भी बन जाती है।

Gen Z और सभ्यतागत पहचान का सवाल
लेखक का मानना है कि भारत की Gen Z पीढ़ी तकनीकी रूप से सबसे अधिक जुड़ी हुई है, लेकिन अपने सभ्यतागत इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से अपेक्षाकृत दूर होती जा रही है। पुस्तक इसी अंतर को भरने का प्रयास करती है।

किताब में इतिहास, संस्कृति, आधुनिक राजनीतिक बहसों और भारतीय सभ्यता से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है ताकि युवा पाठक विषय को सहजता से समझ सकें।

सुनील आंबेकर की प्रस्तावना क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
पुस्तक की प्रस्तावना RSS के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने लिखी है। इसे पुस्तक के वैचारिक और संगठनात्मक संदर्भ से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रस्तावना इस बात पर जोर देती है कि नई पीढ़ी तक सभ्यतागत विमर्श को पहुंचाने के लिए संवाद और बौद्धिक विमर्श आवश्यक है।

पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता
'Hindutva for Gen Z' की सबसे बड़ी ताकत इसकी भाषा और प्रस्तुति शैली मानी जा रही है। लेखक पाठकों को किसी निष्कर्ष को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं करते, बल्कि पहले पढ़ने और फिर स्वयं निर्णय लेने का आग्रह करते हैं।

आज के समय में, जब वैचारिक बहसें अक्सर शोर और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित हो जाती हैं, यह पुस्तक पाठकों को विषय को समझने और उस पर विचार करने का अवसर देने की कोशिश करती है।

निष्कर्ष: Hindutva for Gen Z केवल एक पुस्तक समीक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसमें भारत की नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और सभ्यतागत विरासत को समझने की कोशिश कर रही है। जो पाठक हिंदुत्व पर विभिन्न दृष्टिकोणों को जानना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण शुरुआती पाठ के रूप में देखी जा सकती है।

Editor's Note: यह लेख पुस्तक में प्रस्तुत विचारों और उसके विषय-वस्तु के विश्लेषण पर आधारित है। पुस्तक में व्यक्त विचार लेखक के हैं।

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SEBI का 'ऑपरेशन क्लीन': Financial Fraud के आरोप में Rajesh Exports पर बड़ी कार्रवाई, ट्रेडिंग पर रोक।

देश के पूंजी बाजार में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में कथित अनियमितताओं, धन के प्रवाह में गड़बड़ी और निवेशकों को गलत तस्वीर दिखाने के आरोप लगाए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय द्वारा जारी 109 पृष्ठों के आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया कंपनी ने कई वर्षों तक गैर-वास्तविक लेनदेन दर्ज किए, अनुचित लेखांकन पद्धतियां अपनाईं, कंपनी के धन को प्रमोटर से जुड़े खातों और व्यक्तिगत खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया तथा कई महत्वपूर्ण जानकारियों का खुलासा नहीं किया हैं।

बता दें कि राजेश एक्सपोर्ट्स देश की प्रमुख स्वर्ण प्रसंस्करण और आभूषण निर्यात कंपनियों में से एक मानी जाती है। ऐसे में कंपनी से जुड़े इस मामले ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

सेबी के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया हो सकता है। यह राशि कंपनी द्वारा बताए गए कुल समेकित राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत हिस्सा बताई गई है। नियामक का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर कंपनी ने निवेशकों के सामने अपने कारोबार के आकार और वित्तीय स्थिति की वास्तविकता से अलग तस्वीर पेश की हैं।

गौरतलब है कि सेबी ने विशेष रूप से कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों से जुड़े राजस्व आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। जांच में पाया गया कि कंपनी के कुल समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी इकाइयों, विशेषकर वालकांबी एसए, से दिखाया गया था। हालांकि उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों में इन दावों की पर्याप्त पुष्टि नहीं मिल सकी हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि राजेश मेहता द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर किए गए वायदा कारोबार से जुड़े लेनदेन को कंपनी की बिक्री और खरीद के रूप में दर्शाया गया। इसके अलावा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से हुई आय और व्यय को भी संचालन से प्राप्त आय और खरीद के रूप में दर्ज किया गया था। नियामक ने यह भी कहा कि म्यूचुअल फंड और सावधि जमा से प्राप्त ब्याज आय को भी कारोबार से प्राप्त आय के रूप में दिखाया गया।

जांच के दौरान अफ्रीका में स्वर्ण खदान में निवेश के दावे पर भी सवाल उठे हैं। सेबी का कहना है कि उपलब्ध वित्तीय अभिलेखों में ऐसे निवेश की पुष्टि नहीं हो सकी हैं।

एक अन्य गंभीर आरोप कंपनी के धन को राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित करने को लेकर है। सेबी के अनुसार इन लेनदेन को संबंधित पक्ष लेनदेन के रूप में घोषित नहीं किया गया और न ही आवश्यक स्वीकृतियां ली गई थीं।

गौरतलब है कि नियामक ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान कंपनी ने समेकित स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया और अलग-अलग चरणों में विरोधाभासी जानकारी प्रस्तुत की हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी ने कंपनी के वैधानिक लेखा परीक्षकों की भूमिका की जांच के लिए राष्ट्रीय वित्तीय प्रतिवेदन प्राधिकरण को भी आदेश की प्रति भेजी है। साथ ही राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के कारोबार से रोक दिया गया है। नियामक ने नए सिरे से फोरेंसिक लेखा परीक्षण कराने का भी निर्देश दिया है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस मामले की आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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  Sports

अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में कुलदीप यादव का प्लेइंग-11 से कटेगा पत्ता? जगह लेने के ये दावेदार

India Probable Playing 11 vs Afghanistan Test: अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के लिए टीम इंडिया ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. बुधवार को भारतीय खिलाड़ियों ने जमकर अभ्यास किया. इस दौरान हेड कोच गौतम गंभीर भी मौजूद रहे. इस मुकाबले में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर इरफान पठान ने बड़ा बयान दिया है. उनका मानना है कि टीम की पुरानी रणनीति को देखते हुए प्लेइंग-11 में कुलदीप यादव की जगह बनती नहीं दिख रही है. Wed, 3 Jun 2026 23:25:26 +0530

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