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Explainer: पीरियड्स में महिलाओं को मंदिर जानें की क्यों है मनाही? जानिए शास्त्रों में मासिक धर्म का महत्व

मासिक धर्म यानी पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक सबसे जरूरी हिस्सा है. इसके बावजूद भारतीय समाज में इससे जुड़े कई नियम, मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं. इन्हीं में से एक है पीरियड्स के दौरान महिलाओं का मंदिर न जाना. आज भी कई घरों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ करने, मंदिर जाने या धार्मिक वस्तुओं को छूने से रोका जाता है. वहीं दूसरी ओर, कई लोग इसे केवल एक सामाजिक परंपरा मानते हैं और इसका विरोध भी करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शास्त्रों में मासिक धर्म को लेकर क्या कहा गया है? क्या वास्तव में पीरियड्स में मंदिर जाना वर्जित है? आइए विस्तार से समझते हैं.

मासिक धर्म क्या है?

मासिक धर्म महिलाओं की प्रजनन प्रक्रिया का एक प्राकृतिक हिस्सा है. हर महीने गर्भाशय की आंतरिक परत टूटकर रक्त के रूप में शरीर से बाहर निकलती है. यह प्रक्रिया आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक चलती है.विज्ञान के नजरिए से यह पूरी तरह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है और इसे किसी प्रकार की अशुद्धता या बीमारी नहीं माना जाता.

शास्त्रों में मासिक धर्म को कैसे देखा गया है?

सनातन परंपरा में मासिक धर्म को केवल जैविक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक विशेष अवस्था के रूप में भी देखा गया है. कई धर्मग्रंथों और स्मृतियों में इस अवधि के दौरान महिलाओं को विश्राम देने की बात कही गई है. प्राचीन समय में महिलाओं को घर के अधिकांश काम स्वयं करने पड़ते थे. उस समय सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं. इसलिए माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को शारीरिक और मानसिक आराम देने के लिए कुछ नियम बनाए गए. कई विद्वानों का मानना है कि बाद में इन नियमों को धार्मिक प्रतिबंधों के रूप में देखा जाने लगा.

मंदिर जाने की मनाही क्यों बताई जाती है?

ऊर्जा और आध्यात्मिकता का सिद्धांत

कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिरों में सकारात्मक और उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा का वास होता है. माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान महिला का शरीर विशेष जैविक परिवर्तन से गुजरता है. कुछ परंपराओं में यह विश्वास किया जाता है कि इस अवस्था में शरीर की ऊर्जा का प्रवाह अलग होता है. इसलिए महिलाओं को पूजा-पाठ और मंदिर जाने से दूर रहने की सलाह दी गई. हालांकि इस विचार का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

विश्राम देने की परंपरा

कई धर्माचार्यों का मानना है कि मंदिर न जाने का नियम महिलाओं को आराम देने के उद्देश्य से बनाया गया था. पुराने समय में महिलाओं को लंबी दूरी पैदल तय करके मंदिर जाना पड़ता था. मासिक धर्म के दौरान यह उनके लिए कठिन हो सकता था. इसलिए उन्हें विश्राम देने के लिए ऐसे नियम बनाए गए.

शुचिता की पारंपरिक अवधारणा

प्राचीन धार्मिक व्यवस्थाओं में शुचिता यानी पवित्रता के कुछ नियम निर्धारित थे. इनमें जन्म, मृत्यु और मासिक धर्म जैसी अवस्थाओं को विशेष श्रेणी में रखा गया था. इसी आधार पर कई स्थानों पर महिलाओं को मंदिर प्रवेश से रोका जाने लगा. हालांकि अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में इन नियमों की व्याख्या अलग-अलग मिलती है.

क्या सभी मंदिरों में यह नियम लागू है?

नहीं, भारत में सभी मंदिरों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं है. देश के अधिकांश मंदिरों में महिलाएं मासिक धर्म के दौरान भी दर्शन कर सकती हैं. हालांकि कुछ विशेष मंदिरों में परंपरागत नियमों के आधार पर अलग व्यवस्थाएं देखने को मिलती हैं. धार्मिक मान्यताएं क्षेत्र, परंपरा और मंदिर की प्रकृति के अनुसार बदलती रहती हैं.

देवी की पूजा और मासिक धर्म का संबंध

दिलचस्प बात यह है कि हिंदू धर्म में कई स्थानों पर मासिक धर्म को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. असम स्थित कामाख्या मंदिर इसका प्रमुख उदाहरण है. यहां देवी के वार्षिक रजस्वला होने की मान्यता है और इस अवसर पर विशेष उत्सव मनाया जाता है. यह दर्शाता है कि सनातन परंपरा में मासिक धर्म को केवल निषेध की दृष्टि से नहीं देखा गया, बल्कि इसे सृजन शक्ति से भी जोड़ा गया है.

आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

आधुनिक विज्ञान के अनुसार मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है. इसका किसी व्यक्ति की पवित्रता, धार्मिकता या आध्यात्मिक क्षमता से कोई संबंध नहीं है. कई विद्वान और सामाजिक चिंतक मानते हैं कि महिलाओं को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ और मंदिर जाने का अधिकार होना चाहिए. दूसरी ओर कुछ लोग परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें व्यक्तिगत आस्था का विषय मानते हैं.

FAQs

Q1. क्या हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान मंदिर जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है?

नहीं, सभी मंदिरों और सभी परंपराओं में ऐसा नियम नहीं है. कई मंदिरों में महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी दर्शन कर सकती हैं.

Q2. शास्त्रों में मासिक धर्म को क्या माना गया है?

कुछ ग्रंथों में इसे विश्राम की अवस्था बताया गया है, जबकि कुछ परंपराओं में इसे शुचिता संबंधी नियमों से जोड़ा गया है.

Q3. क्या विज्ञान पीरियड्स को अशुद्ध मानता है?

नहीं, विज्ञान के अनुसार मासिक धर्म एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है.

Q4. क्या पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ किया जा सकता है?

इस बारे में अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं. कई लोग करते हैं, जबकि कुछ परिवार परंपरागत नियमों का पालन करते हैं.

Q5. कामाख्या मंदिर का मासिक धर्म से क्या संबंध है?

कामाख्या मंदिर में देवी के रजस्वला होने की मान्यता है और इस अवसर पर विशेष धार्मिक उत्सव आयोजित किया जाता है.

Q6. क्या पीरियड्स के दौरान धार्मिक पुस्तकें पढ़ना वर्जित है?

इस विषय में कोई एक समान नियम नहीं है. यह व्यक्ति की धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है.

Q7. क्या आज भी इस पर विवाद और चर्चा होती है?

हाँ. यह विषय आज भी धर्म, परंपरा, महिलाओं के अधिकार और आधुनिक सोच के संदर्भ में चर्चा का विषय बना हुआ है.

यह भी पढ़ें: Explainer: अनुष्का शर्मा के गले में दिखी 'पवित्र तुलसी माला' पहनने का क्या है नियम? जानिए किन लोगों को नहीं करना चाहिए धारण

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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