विश्व साइकिल दिवस पर दिल्ली में रैली का आयोजन, साइकिलिंग को लाइफस्टाइल बनाने की अपील
नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली के हौज खास में बुधवार को साइकिल रैली का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य साइकिलिंग को परिवहन के एक टिकाऊ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम के रूप में बढ़ावा देना था, ताकि स्वच्छ गतिशीलता और हरित भविष्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
बीवाईसीएस इंडिया फाउंडेशन की सीईओ भैरवी जोशी ने बताया कि 55 से अधिक शहर बाइसाइकिल मेयर्स के जरिए हमसे जुड़े हुए हैं, जो साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग को लेकर हमारा मुख्य कार्य जनजागृति करना है। इसके जरिए लोगों को साइकिल के फायदे बताना और इसका अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील करते हैं।
उन्होंने कहा कि साइकिलिंग को सिर्फ एक स्पोर्ट्स एक्टिविटी की दृष्टि से न देखें, बल्कि इसको अपनी लाइफस्टाइल बनाएं। रोजमर्रा के काम के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उप महानिदेशक जगदीश राजेश ने कहा कि साइकिल दिवस पर यह एक अच्छी पहल है और हम सभी इसी के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग न सिर्फ अपने शरीर के लिए अच्छी है, बल्कि इसका रोजाना इस्तेमाल करके कहीं न कहीं हम लोग राष्ट्र के लिए योगदान दे सकते हैं।
बाइसाइकिल मेयर दिलीप सभरवाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, आज विश्व बाइसाइकिल दिवस है। इसे पूरी दुनिया में मनाया जाता है और आज हम इसे यहां दिल्ली में मना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हम साइकिल टू वर्क को प्रमोट करें। हम मानते हैं कि साइकिल का आविष्कार परिवहन के साधन के रूप में हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए हम चाहते हैं कि लोग अपने आवागमन के लिए रोजाना साइकिल का इस्तेमाल करें।
दिलीप सभरवाल ने कहा, प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्याएं, शारीरिक परेशानियां और तेल संकट, ऐसी अनेकों दिक्कतों का समाधान साइकिल ही है। साइकिल से हर व्यक्ति न सिर्फ फिट रह सकता है, बल्कि तेल की बचत और हवा स्वच्छ होती है। इसी उद्देश्य के साथ हमने बुधवार को दिल्ली में साइकिल रैली का आयोजन किया है।
--आईएएनएस
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मानसून को लेकर आई ये बुरी खबर, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने दी अल नीनो को लेकर चेतावनी
Monsoon 2026: भारत में आमतौर पर मानसून का आगमन मई के आखिरी सप्ताह या जून पहले पहले सप्ताह तक हो जाता है. लेकिन इस बार मानसून को प्रभावित करने के संकेत मिल रहे हैं. दरअसल, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो के बनने की 80 फीसदी संभावना है. जिससे विश्व की जलवायु सामान्य रूप से जबकि खासकर भारत के मानसून के लिए एक गंभीर संकेत मिल रहे हैं.
मानसून को प्रभावित करता है अल नीनो
बता दें कि अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली आवधिक वृद्धि है, जो आमतौर पर नौ से बारह महीने तक चलती है. यह प्रणाली वैश्विक तापमान और वर्षा के पैटर्न को बुरी तरह प्रभावित करती है और चरम मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ाती है.
भारत में क्या उम्मीद करें?
भारत में, अल नीनो का संबंध कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से होता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में बन रहा अल नीनो मध्यम होगा और यहां तक कि मजबूत भी हो सकता है. यह संभावना भारत के लिए चिंता का विषय है, जो पहले से ही कमजोर मानसून का सामना कर रहा है. एजेंसी के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति कम से कम नवंबर तक बनी रहने की संभावना "लगभग 90% या उससे अधिक" है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी दी चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बयान में कहा, "विज्ञान स्पष्ट है: आने वाले महीनों में 90 प्रतिशत संभावना के साथ अल नीनो हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है. दुनिया को इसे एक गंभीर जलवायु चेतावनी के रूप में लेना चाहिए." इसके साथ ही उन्होंने कहा, "अल नीनो की परिस्थितियां पहले से ही गर्म हो रही दुनिया की आग में घी डालने का काम करेंगी. इसके प्रभाव और भी भीषण होंगे, और भी दूर तक फैलेंगे, साथ ही विनाशकारी गति से सीमाओं को पार करेंगे. एकमात्र प्रभावी उपाय संकट के अनुरूप जलवायु कार्रवाई करना है. जिसमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता समाप्त करना, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना, सबसे कमजोर वर्गों की रक्षा करना और सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली उपलब्ध कराना है."
बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना
30 अप्रैल को जारी डब्ल्यूएमओ के मौसमी पूर्वानुमान के मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में, विशेष रूप से मध्य क्षेत्रों में, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. डब्ल्यूएमओ द्वारा जारी मानचित्र में भारत के लगभग सभी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दिखाई गई है.
डब्ल्यूएमओ के अल नीनो पूर्वानुमान डब्ल्यूएमओ ग्लोबल प्रोड्यूसिंग सेंटर्स के मॉडलों, राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं के विशेषज्ञों और दुनिया भर के जलवायु पूर्वानुमान केंद्रों के विशेषज्ञों की आम सहमति पर आधारित हैं. ये पूर्वानुमान डब्ल्यूएमओ और इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (IRI) के संयुक्त प्रयासों से तैयार किए जाते हैं.
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'मजबूत अल नीनो के लिए तैयार रहने की जरूरत'
बता दें कि प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में असामान्य रूप से गर्म उपसतही परिस्थितियों के कारण सतह पर तापमान में ये बढ़ती विसंगतियां पैदा हो रही हैं. यहां का तापमान औसत से 6 डिग्री सेल्सियस से अधिक है और ऊष्मा का एक बड़ा भंडार बना रहा है जो सतह पर देखी जा रही गर्मी को बढ़ा रहा है. विश्व व्यापार संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, "हमें संभावित रूप से मजबूत अल नीनो घटना के लिए तैयार रहने की जरूरत है. जो सूखे और भारी बारिश को बढ़ाएगी और भूमि और महासागर दोनों में लू का खतरा बढ़ाएगी. 2023-24 में आया सबसे हालिया अल नीनो अब तक के पांच सबसे मजबूत अल नीनो में से एक था और इसने 2024 में देखे गए रिकॉर्ड वैश्विक तापमान में भूमिका निभाई."
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