BJP नेताओं ने Sukhbir Singh Badal पर हमले की निंदा की और निष्पक्ष जांच मांगी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के प्रमुख केवल सिंह ढिल्लों और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हिंसा पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ढिल्लों ने कहा कि वह बादल पर हुए हमले को लेकर बहुत चिंतित हैं।
महाराष्ट्र पुलिस ने बताया कि शिअद प्रमुख कृपाण से किए गए हमले में घायल हो गए। उसने बताया कि जब बादल गुरुद्वारा माता साहिब देवन जी मुगट गए थे, तो एक व्यक्ति ने उन पर हमला किया। पुलिस के मुताबिक, इस हमले के सिलसिले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।
ढिल्लों ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैं उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं। हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है, खासकर हमारे पवित्र तख्तों की धरती पर।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि बादल की जान लेने की ‘‘कायरतापूर्ण कोशिश’’ बेहद निंदनीय है और यह पंजाब की शांति एवं सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। बिट्टू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया,‘‘हमारे पवित्र स्थलों पर हिंसा और डराने-धमकाने की कोई जगह नहीं है।
दोषियों का पर्दाफाश कर उन्हें सजा दी जानी चाहिए। सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। सिख धर्म सेवा, साहस और शांति का प्रतीक है, हिंसा का नहीं।’’ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि वह इस घटना की निष्पक्ष तरीके से गहन जांच सुनिश्चित करें।
सिंह ने कहा, ‘‘पंजाब और पंजाबी समुदाय हिंसा तथा आतंकवाद के काले और दर्दनाक दौर में पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं। पंजाबियों की कई पीढ़ियों ने उस दौर के गहरे घाव सहे हैं। हम किसी भी हाल में उन काले दिनों को वापस नहीं आने दे सकते।
शांति, भाईचारा, संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं सुखबीर सिंह बादल जी के अच्छे स्वास्थ्य, सुरक्षा और जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।’’ सिंह ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब पंजाब और पूरा देश शांति, विकास एवं तरक्की की आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, तब ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि यह साफ संदेश जाए कि सार्वजनिक जीवन में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।
Delhi High Court ने Central Secretariat Club की मान्यता रद्द करने पर केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय सचिवालय क्लब की मान्यता रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार का रुख जानना चाहा। पहले ‘तालकटोरा क्लब’ के नाम से जाने जाने वाले इस क्लब ने ‘संपदा अधिकारी’ के उस बेदखली आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें उसे ‘प्रेसिडेंट्स एस्टेट’ में अपनी मौजूदा जगह को तुरंत खाली करने के लिए कहा गया था। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील ने अदालत से मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देने का आग्रह किया और कहा कि अगर ऐसी सुरक्षा नहीं दी गई तो “कुछ भी नहीं बचेगा”। इस अनुरोध को ठुकराते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता। इसे 24 अगस्त की सूची में शामिल करें।” क्लब ने अपनी याचिका में कहा कि 14 जुलाई को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने मनमाने, गैर-कानूनी और असंवैधानिक तरीके से उसे दी गई मान्यता वापस ले ली।
याचिकाकर्ता ने कहा कि कामकाज संभालने वाली तदर्थ समिति के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितताओं के बारे में उनकी शिकायतों पर सुधारात्मक कार्रवाई करने के बजाय, अधिकारियों ने पहले बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए फरवरी में मान्यता रद्द कर दी। उच्च न्यायालय के दखल के बाद, याचिकाकर्ता की सुनवाई हुई और 14 जुलाई को मान्यता रद्द करने का नया आदेश जारी किया गया। याचिका में यह तर्क दिया गया कि 14 जुलाई का मान्यता रद्द करने का आदेश और 17 जुलाई का बेदखली का आदेश “साफ तौर पर मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक था, और यह प्रशासनिक शक्तियों का बेशर्मी भरा और मनमाना इस्तेमाल था।” इसमें कहा गया, “प्रतिवादी अपनी ही प्रशासनिक नाकामियों और अपनी तदर्थ समिति की गलत हरकतों का इस्तेमाल करके एक ऐतिहासिक संस्थान को जबरदस्ती खत्म करने और उससे बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं; यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।” याचिका में आरोप लगाया गया है कि बेदखली का आदेश मनमाने ढंग से 107 साल पुरानी ऐतिहासिक संस्था—जिसे स्थायी कब्जा दिया गया था—को सिर्फ आवंटन रद्द करने की गैर-कानूनी कार्रवाई के आधार पर “अनधिकृत कब्जेदार” मानता है।
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