बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: CBSE के नए चेयरमैन बने लोखंडे प्रशांत सीताराम, वरुण भारद्वाज सचिव पद पर नियुक्त, आदेश जारी
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा फेरबदल करते हुए राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है। इन अधिकारियों के स्थान पर अब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वहीं, सीनियर ब्यूरोक्रैट वरुण भारद्वाज सीबीएसई के नए सचिव का कार्यभार संभालेंगे। यह निर्णय बोर्ड के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिया गया है।
नए सचिव वरुण भारद्वाज का कार्यकाल 19 अप्रैल 2027 तक निर्धारित किया गया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने इस प्रशासनिक निर्णय को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज को सीबीएसई के सचिव (निदेशक स्तर) के पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत प्रतिनियुक्ति के आधार पर की गई है। हिमांशु गुप्ता के स्थान पर इसे ‘लैटरल शिफ्ट’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी अवधि 19 सितंबर 2027 तक रहेगी, जो केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत कुल पांच वर्ष का कार्यकाल होगा।
विशेष OSM जांच समिति का गठन
इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों के साथ ही, सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है। यह समिति ओएसएम प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल करेगी। सूत्रों के अनुसार, यह जांच समिति ओएसएम सेवाओं की खरीद, निविदा प्रक्रिया और उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी। जारी आदेश के मुताबिक, इस जांच समिति की अध्यक्षता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान करेंगी। समिति को सीबीएसई द्वारा ओएसएम सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद से संबंधित सभी मामलों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अस्पष्टता को दूर किया जा सके।
अध्यक्ष एस. राधा चौहान को दिए गए विशेष अधिकार
सरकारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समिति की अध्यक्ष एस. राधा चौहान आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों और कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता भी ले सकेंगी। इससे जांच प्रक्रिया को व्यापक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। समिति को आवश्यक सचिवीय सहायता कैपेसिटी बिल्डिंग कमेटी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उसके कार्यों में सुगमता बनी रहेगी।
एक महीने के भीतर रिपोर्ट DoPT को सौंपने के निर्देश
सरकार ने इस जांच समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह समय-सीमा जांच की गंभीरता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाती है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और ओएसएम निविदा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे थे। इस दौरान छात्रों और विभिन्न संगठनों ने भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की थी। अब सरकार के इस फैसले को सीबीएसई के कामकाज में जवाबदेही तय करने और प्रक्रियाओं में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा एवं निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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