एनीमिया की वजह बन सकता है अनहेल्दी खाना, बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। बदलती जीवनशैली और फास्ट फूड की बढ़ती आदतों के बीच अनहेल्दी खानपान लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। खुद को लेकर की गई ये लापरवाही एनीमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की भी वजह बनते जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व न मिलने पर एनीमिया जैसी समस्या जन्म ले सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बन पातीं, जिससे कमजोरी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, एनीमिया का एक प्रमुख कारण पौष्टिक आहार की कमी है। यदि रोजाना के आहार में आयरन, प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव हो तो शरीर में खून की कमी होने लगती है। यही कारण है कि संतुलित और पोषण से भरपूर भोजन को स्वस्थ जीवन की बुनियाद माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पेट भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन का पौष्टिक होना भी उतना ही जरूरी है। जंक फूड, अत्यधिक तला-भुना भोजन और पोषणहीन आहार लंबे समय में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक भोजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव करता है, बल्कि शरीर को स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनीमिया से बचाव के लिए लोगों को अपनी रोजाना की थाली में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों आयरन का अच्छा स्रोत होती हैं। इसके अलावा दालें, अंडे और मांसाहारी भोजन शरीर को जरूरी प्रोटीन और आयरन प्रदान करते हैं, जो खून बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मौसमी फलों का सेवन भी एनीमिया से बचाव में मददगार माना जाता है। फलों में मौजूद विटामिन और खनिज तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में सहायक होते हैं। वहीं, नट्स और बीज, जैसे बादाम, अखरोट और तिल, शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।
दूध और दही जैसे डेयरी उत्पाद भी संतुलित आहार का अहम हिस्सा हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर को कैल्शियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इसके साथ ही साबुत अनाज और मोटे अनाज को भोजन में शामिल करने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और फाइबर प्राप्त होता है।
--आईएएनएस
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CBSE में बड़ा बदलाव, जानें अब कौन बना नया चेयरमैन, कहां हुआ राहुल सिंह का तबादला?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में अपनाई गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. खास बात यह है कि इसके बाद सरकार तुरंत लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन नियुक्त किया है, जो अब बोर्ड की जिम्मेदारी संभालेंगे.
कौन है लोखंडे प्रशांत सीताराम?
लोखंडे प्रशांत सीताराम (IAS) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है. वे 2001 बैच के AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के IAS अधिकारी हैं.
CBSE चेयरमैन बनने से पहले, वे केंद्रीय गृह मंत्रालय में 'अतिरिक्त सचिव' के पद पर कार्यरत थे. वे गृह मंत्रालय में जम्मू, कश्मीर और लद्दाख मामलों के विभाग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.E.) की डिग्री प्राप्त की है और NITIE, मुंबई से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. लोखंडे को उनकी प्रशासनिक सेवाओं के लिए दो बार 'स्टेट अवार्ड (गोल्ड)' से सम्मानित भी किया जा चुका है.
यह बदलाव केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं माना जा रहा, बल्कि हाल के महीनों में बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवादों के बाद एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है.
उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर उठे थे गंभीर सवाल
बता दें कि CBSE उस समय विवादों में घिर गया था जब कई छात्रों ने दावा किया कि पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध कराई गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रही थी. छात्रों और अभिभावकों ने आशंका जताई कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटलीकरण या मिलान प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां हुई हैं.
इन आरोपों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक व्यापक चर्चा शुरू हो गई. कई छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर पारदर्शिता की मांग की और पूरे मूल्यांकन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए.
तकनीकी खामियों पर बढ़ी चिंता
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन इस बार कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं. छात्रों को आवेदन शुल्क जमा करने में दिक्कतें आईं, पोर्टल पर भुगतान विफल होने की शिकायतें मिलीं और सत्यापन तथा पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया भी निर्धारित समय से प्रभावित हुई.
इन समस्याओं के कारण छात्रों और अभिभावकों में असंतोष बढ़ा। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना था कि इतनी बड़ी परीक्षा प्रणाली में तकनीकी व्यवस्थाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है.
नई टीम के सामने बड़ी चुनौती
लोखंडे प्रशांत सीताराम के सामने अब CBSE की विश्वसनीयता को और मजबूत बनाने की चुनौती होगी. बोर्ड को न केवल डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार करना होगा, बल्कि छात्रों का भरोसा भी दोबारा जीतना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में CBSE मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा कर सकता है और तकनीकी सुरक्षा, डेटा प्रबंधन तथा उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटलीकरण को लेकर नए प्रोटोकॉल लागू किए जा सकते हैं.
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