अदाणी पोर्ट्स का कार्गो वॉल्यूम 500 MMT के पार, ग्रुप ने दिखाई मजबूत वित्तीय स्थिति…
अहमदाबाद: देश के बुनियादी ढांचा और यूटिलिटी क्षेत्र के सबसे बड़े समूह ‘अदाणी पोर्टफोलियो’ ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए अपने वार्षिक वित्तीय परिणाम घोषित कर दिए हैं। समूह द्वारा जारी ‘क्रेडिट एंड रिजल्ट्स कम्पेंडियम’ के अनुसार, यह साल अदाणी ग्रुप के लिए एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। इस अवधि के दौरान …
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बिहार: “24 घंटे में झोला उठाकर चल दूंगा..” सीएम सम्राट चौधरी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं
सत्ता के गलियारों में बंगले का मोह, एक बार फिर बिहार की सियासत में गर्माहट ले आया है। इस बार निशाने पर हैं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास, जिसे खाली करने के आदेश पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर ‘बदले की राजनीति’ करने का सीधा आरोप जड़ दिया है। लेकिन इस सियासी आरोप-प्रत्यारोप में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के तीखे तेवर ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं, और वे खुद 24 घंटे में अपना झोला उठाकर चल देंगे।
सरकारी आवास को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज मंगलवार को बड़े बेबाक अंदाज में कहा, “सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं है। जनता की सेवा सबसे अहम होता है। और पार्टी के निर्देश पर वह महज 24 घंटे में सरकारी आवास छोड़ सकते हैं।” चौधरी के इस बयान में एक स्पष्ट संदेश था कि सत्ता और सुविधाओं का मोह छोड़कर जनता के काम को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मुख्यमंत्री का लालू परिवार पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री चौधरी ने अपने तीखे तंज जारी रखते हुए कहा कि बेटा को अलग घर चाहिए, माताजी को अलग घर चाहिए और जनता को छोड़ दीजिए। उन्होंने सीधे-सीधे लालू परिवार पर निशाना साधा, जहां सरकारी आवासों को लेकर अक्सर विवाद उठते रहे हैं। चौधरी ने आगे कहा, “हम लोग जनता के काम के लिए आए हैं, इसलिए घर की चिंता छोड़ दीजिए। जिस दिन पार्टी और हमारे नेता कहेंगे कि आपका काम यहीं पर खत्म होता है। सम्राट चौधरी सिर्फ 24 घंटे के अंदर अपना झोला उठाकर अपने प्राइवेट घर में चला जाएगा और सरकारी घर में नहीं रहेगा।” यह बयान न केवल विपक्ष पर वार था, बल्कि खुद की छवि को जनता के सेवक के तौर पर स्थापित करने की कोशिश भी थी।
मुख्यमंत्री के बयान पर आरजेडी का पलटवार
लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान पर राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह किसी मुख्यमंत्री की भाषा नहीं हो सकती, जो इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करे। अहमद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री खुद दो-दो बंगलों पर एक साथ कब्जा जमाए हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों को भी नियमों को ताक पर रखकर बंगलों की रेवड़ी बांटी गई है, जिससे सरकार की दोहरी नीति उजागर होती है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित वह बंगला है, जिसमें वर्तमान में राबड़ी देवी और उनका परिवार रह रहा है। यह बंगला हाल ही में राज्य के मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है। लेकिन यहां एक बड़ा पेंच है। नंद किशोर राम को कुछ हफ्ते पहले ही 21 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास भी आवंटित किया गया था। एक मंत्री को दो-दो सरकारी बंगलों का आवंटन, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री को एक बंगला खाली करने का आदेश, यह बात विपक्ष को सरकार पर हमला करने का पूरा मौका दे रही है।
राजद के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले विपक्षी दलों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। सिद्दीकी के अनुसार, लोकतंत्र की खूबसूरती सरकार की कमियों को उजागर करने में है, लेकिन बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन चाहता है कि विपक्ष हर बात पर सरकार की हां में हां मिलाए, अन्यथा उसे अलग-अलग तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सरकार विपक्ष की आवाज दबाने पर आमादा है।
सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री आवास को लेकर भी उठाए सवाल
सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री के आवास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास और उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगले को मिलाकर ‘लोक सेवक आवास’ क्यों बनाया गया, जबकि उपमुख्यमंत्री अन्य बंगलों में रह रहे हैं। यह सवाल भी सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है कि आखिर ऐसे फैसलों के पीछे क्या तर्क है।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने एनडीए सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकारी बंगलों का आवंटन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार होना चाहिए, लेकिन बिहार में ऐसा नहीं हो रहा है। मंडल ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का अपमान करने की नीयत से काम कर रही है। उन्होंने साफ संकेत दिए कि पार्टी 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले को खाली करने के आदेश के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला ले सकती है, क्योंकि यह मामला अब केवल बंगले का नहीं, बल्कि सम्मान और राजनीतिक प्रतिशोध का बन गया है।
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