A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: Attempt to read property "response" on null

Filename: controllers/Web.php

Line Number: 294

Backtrace:

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/controllers/Web.php
Line: 294
Function: _error_handler

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/index.php
Line: 319
Function: require_once

eZeNews - Best Indian Hindi News App, हिंदी न्यूज़, Latest News in Hindi, Hindi news
Responsive Scrollable Menu

EXPLAINER : क्या होती है 2 जून की रोटी और क्यों कर रही है ट्रेंड? जानें इसके पीछे की कहानी

क्या आपने कभी सोचा है कि हर साल 2 जून आते ही क्यों सोशल मीडिया पर अचानक ही 2 जून की रोटी ट्रेंड करने लगती है? "आज तो जी 2 जून है 2 जून की रोटी खानी पड़ेगी." 2 जून को इस तरह की मीम्स वायरल होने लगते हैं स्टोरी लगने लगती है और इस तरह के पोस्ट खूब शेयर किए जाते हैं. आखिर होता क्या है 2 जून की रोटी? चलिए आपको बताते हैं। '2 जून की रोटी' - यह एक अवधि मुहावरा है जिसका अर्थ होता है "दो वक्त की रोटी".

जून शब्द का क्या अर्थ है?

इस मुहावरे का कैलेंडर के जून महीने से कोई लेना-देना नहीं है. आम बोलचाल में जून शब्द का अर्थ 'समय' से होता है. '2 जून की रोटी' का सरल मतलब है सुबह और शाम की रोटी.
ज्यादातर लोग 2 जून की रोटी को जून महीने की तारीख से जोड़ते हैं। यही कारण है कि हर साल 2 जून चर्चा का एक विषय बन जाता है. 2 जून की रोटी का अर्थ है दिन में दो समय का भोजन जुटा पाना सरल भाषा में कहें तो सुबह और शाम पेट भरकर खाना मिल जाना.

क्या यह केवल एक मजाक है?

नही. यही वजह है कि कई सामाजिक टिप्पणीकार और लेखक मानते हैं कि 2 जून की रोटी केवल एक मजेदार ट्रेंड नहीं बल्कि गरीबी और भूख का एक सामाजिक टिप्पणी भी है जिसमें जब कोई व्यक्ति कहता है कि हम 2 जून की रोटी के लिए मेहनत कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले कुछ मनपसंद मीम्स 

हर साल एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोग कुछ ऐसे मीम्स पोस्ट करते हैं जो लोगों को बहुत पसंद आते हैं.
"बड़े नसीब वालों को मिलती है 2 जून की रोटी ". "2 जून की रोटी के लिए लोग इधर-उधर भागते हैं ". "आज तो रोटी खुद चलकर मेरे पास आएगी कि आज तो 2 जून है और मेरा हक भी है."

साहित्य और फिल्मों में “दो जून की रोटी”

भारत के साहित्य में गरीबी भूख और मेहनती जीवन को दिखाने के लिए 2 जून की रोटी का इस्तेमाल कई बार किया है. हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार जैसे मुंशी प्रेमचंद ने भी अपने लेखन में आम आदमी के संघर्ष को दिखाते समय इस भावना को व्यक्त किया हैं. हिंदी सिनेमा में जब भी किसी गरीब परिवार, मजदूर या रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे व्यक्ति की कहानी दिखाई जाती है, तो अक्सर "दो जून की रोटी" का जिक्र सुनने को मिलता है. फिल्मों के संवादों में यह वाक्य सिर्फ भूख की बात नहीं करता, बल्कि उस मेहनत और जद्दोजहद को दर्शाता है जो एक इंसान अपने परिवार का पेट भरने के लिए करता हैं. यही वजह है कि दर्शक इस मुहावरे से आसानी से जुड़ जाते हैं, क्योंकि यह उनके आसपास की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करता है. सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि टीवी धारावाहिकों, लोकगीतों और ग्रामीण कहानियों में भी "दो जून की रोटी" बार-बार सुनाई देती है। यह उन लोगों की आवाज बन चुकी है जिनके लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी महंगी चीज को हासिल करना नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने परिवार के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना हैं.
फिर 2 जून की तारीख आखिरकार क्यों ट्रेंड बन गया है?
यहीं से शुरू होती है सोशल मीडिया की दिलचस्प कहानी. जब इंटरनेट पर मीम लोगों को पसंद आने लगते हैं तब लोगों को "2 जून की रोटी"और "2 जून" के बीच शब्दों का खेल पसंद (wordplay) आने लगता है और लोग इन्हे शेयर करना शुरू कर देते हैं.

दुनिया की कई भाषाओं में मिलती है ऐसी अभिव्यक्ति

दिलचस्प बात यह है कि "दो जून की रोटी" जैसी भावना सिर्फ हिंदी तक सीमित नहीं है. दुनिया की लगभग हर भाषा में ऐसे मुहावरे और वाक्यांश मौजूद हैं जो इंसान की रोजी-रोटी और जीवनयापन के संघर्ष को दर्शाते हैं.
अंग्रेजी में लोग अक्सर "Earn a living" या "Bread and Butter" जैसे वाक्यांशों का इस्तेमाल करते हैं। इनका मतलब भी मूल रूप से वही है-अपने और अपने परिवार के जीवन-निर्वाह के लिए कमाना. वहीं उर्दू, पंजाबी और कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी "दो वक्त की रोटी" या इससे मिलती-जुलती अभिव्यक्तियां आम बोलचाल का हिस्सा हैं.

आज भी रोजमर्रा की भाषा का हिस्सा है "2 जून की रोटी"

भले ही समय बदल गया हो, लेकिन "दो जून की रोटी" आज भी लोगों की बातचीत में उतनी ही सहजता से सुनाई देती है जितनी पहले सुनाई देती थी. जब कोई व्यक्ति अपनी आर्थिक परेशानियों, मेहनत या जीवन के संघर्ष की बात करता है, तो यह मुहावरा अक्सर उसके शब्दों में शामिल होता हैं. गांवों से लेकर शहरों तक, और आम बातचीत से लेकर समाचारों तक, "दो जून की रोटी" आज भी एक ऐसी अभिव्यक्ति है जो सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ती है. यह सिर्फ भोजन की बात नहीं करती, बल्कि उस मेहनत और जिम्मेदारी को भी दर्शाती है जो हर व्यक्ति अपने परिवार के लिए निभाता है. रोज़मर्रा की बातचीत में अक्सर ऐसे वाक्य सुनने को मिल जाते हैं-

  • "मैं गांव छोड़कर शहर सिर्फ दो जून की रोटी कमाने आया हूं." 
  • "गरीब आदमी की पूरी जिंदगी दो जून की रोटी जुटाने में निकल जाती है."
  • "बढ़ती महंगाई में कई परिवारों के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है."
  • "वह दिन-रात मेहनत करता है ताकि उसके बच्चों को दो जून की रोटी मिल सके."

आखिर 2 जून की रोटी का मुहावरा आया कहां से?

हिंदी, उर्दू और उत्तर भारत की कई बोलियों में "जून" शब्द का इस्तेमाल समय, बेला या भोजन के एक वक्त को दर्शाने के लिए किया जाता था। पुराने समय में ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर "एक जून खाना" और "दो जून खाना" जैसे वाक्य प्रयोग करते थे। यहां "एक जून" का मतलब दिन में एक बार भोजन और "दो जून" का मतलब दिन में दो बार भोजन से होता था. उस दौर में जब अधिकांश लोग खेती, मजदूरी या दिहाड़ी पर निर्भर थे, तब परिवार के लिए दिन में दो वक्त का भोजन जुटा पाना ही सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता था. इसलिए धीरे-धीरे "दो जून की रोटी" एक ऐसे मुहावरे के रूप में प्रचलित हो गया, जो सिर्फ खाने की बात नहीं करता था, बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता का प्रतीक बन गया.

सोशल मीडिया पर हर साल ट्रेंड होने वाली "2 जून की रोटी" भले ही आज मीम्स और मजाक का विषय बन गई हो, लेकिन इसके पीछे एक गहरी सामाजिक सच्चाई छिपी है.यह मुहावरा सिर्फ दो वक्त के भोजन की बात नहीं करता, बल्कि उन लाखों लोगों के संघर्ष, मेहनत और उम्मीद को भी दर्शाता है जो बेहतर जीवन के लिए लगातार प्रयास करते हैं. शायद यही वजह है कि वर्षों बाद भी "दो जून की रोटी" लोगों की ज़ुबान और समाज दोनों में अपनी जगह बनाए हुए है.

यह भी पढ़ें- Explainer: क्या है रामचरण की Peddi की कहानी? फिल्म की स्टार कास्ट, बजट, फीस से लेकर जानें सबकुछ

Continue reading on the app

अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2026 में किया करीब 1.53 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत निवेश, किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट द्वारा अब तक का सबसे अधिक वार्षिक कैपेक्स

अहमदाबाद, 2 जून (आईएएनएस)। अदाणी पोर्टफोलियो ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 में 1,52,967 करोड़ रुपए (16.1 अरब डॉलर) का पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) किया, जो किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक निवेश है। और इस तरह तेज निवेश चक्र के चलते समूह का कुल परिसंपत्ति आधार बढ़कर 7,85,098 करोड़ रुपए (82.2 अरब डॉलर) हो गया है।

वित्त वर्ष 2025-26 में समूह का ईबीआईटीडीए (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) बढ़कर रिकॉर्ड 94,834 करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें मुख्य बुनियादी ढांचा कारोबार का योगदान 87 प्रतिशत रहा।

भारत के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी पोर्टफोलियो के अनुसार, कुल निवेश का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में लगाया गया।

समूह के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक उसके पास 55,852 करोड़ रुपए (5.9 अरब डॉलर) की नकदी उपलब्ध थी, जो उसके कुल सकल ऋण का लगभग 15 प्रतिशत है, जबकि लगातार बेहतर क्रेडिट रेटिंग मिलने के कारण उधारी की लागत दो वर्ष पहले के 9 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत रह गई।

कंपनी ने कहा, वित्त वर्ष 2025-26 अदाणी पोर्टफोलियो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, क्योंकि इसी दौरान समूह की कंपनियों ने अपने अगले चरण के पूंजीगत निवेश चक्र की शुरुआत की। इस वर्ष किया गया निवेश लगभग उतना ही है जितनी परिसंपत्तियां समूह ने अपने शुरुआती 25 वर्षों में तैयार की थीं। यह भारत में उपलब्ध बुनियादी ढांचा अवसरों और समूह के दीर्घकालिक विकास पर उसके भरोसे को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 और उसके बाद कई रणनीतिक परियोजनाएं परिचालन में आईं। इनमें ऊर्जा और यूटिलिटी क्षेत्र में 5.1 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तथा 1.38 गीगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली शामिल हैं, जिसे अब बढ़ाकर 3.37 गीगावाट-घंटा कर दिया गया है।

परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, गुवाहाटी टर्मिनल और अप्रैल 2026 में शुरू हुआ गंगा एक्सप्रेसवे और प्राथमिक उद्योग क्षेत्र में कॉपर स्मेल्टर (तांबा गलाने का संयंत्र) शामिल हैं।

कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में ये परियोजनाएं राजस्व, लाभ और नकदी प्रवाह बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

अदाणी पोर्टफोलियो की कंपनियां वित्तीय अनुशासन बनाए हुए हैं। समूह स्तर पर नेट डेट टू ईबीआईटीडीए अनुपात 3.3 गुना रहा, जो निर्धारित 3.5 गुना के लक्ष्य से कम है।

कंपनी ने बताया कि उसकी परिसंपत्तियों के वित्तपोषण में इक्विटी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है, जो अभी भी मुख्य वित्तीय स्रोत बनी हुई है।

पिछले वित्त वर्ष में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) ने राइट्स इश्यू के जरिए 24,930 करोड़ रुपए जुटाए, जिससे कंपनी की इक्विटी स्थिति और मजबूत हुई।

इसी दौरान समूह के आठ हवाई अड्डों पर कुल 9.53 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एएनआईएल) की मॉड्यूल बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 4,904 मेगावाट हो गई।

अदाणी ग्रीन एनर्जी की परिचालन क्षमता वित्त वर्ष 2025-26 में 5.1 गीगावाट बढ़कर 19.3 गीगावाट हो गई।

गुजरात के खावड़ा में बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की क्षमता वित्त वर्ष 2026 के अंत में 1.38 गीगावाट-घंटा थी, जिसे बढ़ाकर 3.37 गीगावाट-घंटा कर दिया गया, जो एक ही स्थान पर सबसे बड़े परियोजनाओं में से एक है।

वहीं अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 71,779 करोड़ रुपए की निर्माणाधीन ट्रांसमिशन परियोजनाओं के साथ 1 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का आंकड़ा भी पार कर लिया है।

कंपनी के बयान के अनुसार, अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड का कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम वित्त वर्ष 2025-26 में 11 प्रतिशत बढ़कर 500.8 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) पहुंच गया।

इसके अलावा कंपनी ने दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया की एनक्यूएक्सटी का अधिग्रहण भी पूरा किया, जिसकी क्षमता 50 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

Who is Sairaj Bahutule: 630 विकेट झटके, अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताया, कौन हैं साईराज बहुतुले, जिनकी टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ में हुई एंट्री

Who is Sairaj Bahutule: पूर्व भारतीय ऑलराउंडर साईराज बहुतुले भारत की सीनियर मेंस क्रिकेट टीम के स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त किए गए हैं. बहुतुले सभी फॉर्मेट में भारत के अगली पीढ़ी के स्पिनर्स का मार्गदर्शन करेंगे. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग का अच्छा-खासा अनुभव हासिल करने के बाद बहुतुले इस भूमिका में आए हैं. फर्स्ट क्लास में उनके नाम 630 विकेट भी हैं. Tue, 2 Jun 2026 21:07:43 +0530

  Videos
See all

CM Yogi In Kushinagar: Pakistan को लेकर ये क्या बोल गए सीएम योगी? #hindinews #latestnews #topnews #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-02T16:12:48+00:00

Aaj Ki Taaja Khabar: UP की दिनभर की बड़ी खबरें | Surya Murder Case | Ghaziabad | CM Yogi | Top News #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-02T16:05:16+00:00

Iran America War Live: ईरानी सेना ने अमेरिकी जहाज को उड़ाया | Hormuz Crisis | IRGC | Trump | N18G #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-02T16:13:55+00:00

Poochta Hai Bharat: Surya Murder के बाद गुस्से में CM Yogi! | Asad Encounter | Mafia | Akhilesh #tmktech #vivo #v29pro
2026-06-02T16:10:15+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers

A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: Attempt to read property "author_list" on null

Filename: front/post_detail.php

Line Number: 408

Backtrace:

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/views/front/post_detail.php
Line: 408
Function: _error_handler

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/controllers/Web.php
Line: 161
Function: view

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/controllers/Web.php
Line: 296
Function: show_page

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/index.php
Line: 319
Function: require_once

A PHP Error was encountered

Severity: Warning

Message: foreach() argument must be of type array|object, null given

Filename: front/post_detail.php

Line Number: 408

Backtrace:

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/views/front/post_detail.php
Line: 408
Function: _error_handler

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/controllers/Web.php
Line: 161
Function: view

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/application/controllers/Web.php
Line: 296
Function: show_page

File: /home/ezenews/htdocs/www.ezenews.in/public/index.php
Line: 319
Function: require_once