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Uttarakhand Weather: 14 से 17 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट, सभी जिलों को किया गया सतर्क

उत्तराखंड में बारिश का दौर अभी थमने वाला नहीं है। मौसम विभाग ने 14 से 17 अगस्त के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में बारिश बेहद तेज हो सकती है, जबकि आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है। खासतौर पर भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों, नदी-नालों और दूसरे संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने को कहा गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से 13 अगस्त को जारी पूर्वानुमान के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों से कहा है कि भारी बारिश की स्थिति में राहत और बचाव के इंतजाम पहले से तैयार रखें।

14 अगस्त: चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट

14 अगस्त को देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में ऑरेंज अलर्ट रहेगा। इन जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक के साथ कुछ जगह बेहद तेज बारिश का दौर भी देखने को मिल सकता है।

चम्पावत, टिहरी, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश की संभावना है। अन्य जिलों में भी तेज बारिश और गरज-चमक को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

15 अगस्त: पूरे उत्तराखंड में येलो अलर्ट

स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट रहेगा। देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, नैनीताल, चम्पावत और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी जिलों में आकाशीय बिजली के साथ तेज बारिश की आशंका है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

16 अगस्त: नैनीताल समेत तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

16 अगस्त को चम्पावत, बागेश्वर और नैनीताल में ऑरेंज अलर्ट रहेगा। यहां भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बेहद तेज बारिश हो सकती है।देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, चमोली, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। कई दूसरे जिलों में तेज बारिश और आकाशीय बिजली को लेकर येलो अलर्ट रहेगा।

17 अगस्त: देहरादून और टिहरी में भारी बारिश की चेतावनी

17 अगस्त को देहरादून और टिहरी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दोनों जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान आकाशीय बिजली और बेहद तेज बारिश का दौर भी देखने को मिल सकता है। बाकी जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज बारिश की आशंका को देखते हुए येलो अलर्ट रहेगा।

यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेने की सलाह

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान गैरजरूरी यात्रा से बचने की अपील की है। खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और चट्टान गिरने वाले स्थानों से दूर रहने को कहा गया है।

लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाली जलधाराओं के पास नहीं जाने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान पहाड़ों पर सड़कें बंद होने, जलभराव और नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने जैसी स्थिति बन सकती है। आकाशीय बिजली के समय खुले स्थान या पेड़ के नीचे खड़े होने के बजाय सुरक्षित पक्के भवन में रहने की सलाह दी गई है।

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चमोली हादसा: टनल के अंदर कैसे भर गया पानी और मलबा? सामने आई बड़ी वजह

Chamoli Incident: उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टनल के भीतर इतनी तेजी से पानी और मलबा कैसे पहुंचा? शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पहाड़ के भीतर मौजूद पानी और कमजोर भूगर्भीय संरचना इस घटना की अहम वजह मानी जा रही है.

पहाड़ के भीतर जमा पानी बना खतरा

पहाड़ी इलाकों में चट्टानों के बीच प्राकृतिक रूप से पानी जमा रहता है. बारिश के दौरान यह पानी जमीन और चट्टानों के भीतर रिसकर भूमिगत जलधाराओं का हिस्सा बन जाता है. जब किसी निर्माणाधीन टनल की खुदाई इस तरह की जलधारा या पानी से भरी दरार के करीब पहुंचती है, तो अचानक दबाव के साथ पानी टनल के अंदर प्रवेश कर सकता है.

चमोली जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां की चट्टानें कई स्थानों पर टूट-फूट और भूगर्भीय बदलावों से प्रभावित रहती हैं.

मलबा पानी के साथ तेजी से आया

सिर्फ पानी का टनल में प्रवेश करना ही समस्या नहीं था. पानी के दबाव के साथ आसपास की ढीली मिट्टी, चट्टानों के टुकड़े और अन्य मलबा भी अंदर की ओर बह सकता है. यही वजह है कि कुछ ही समय में टनल का रास्ता मलबे से भरने की स्थिति बन गई.

ऐसे हादसों में पानी और मलबे का दबाव बेहद खतरनाक हो सकता है. अचानक रास्ता बंद होने से अंदर मौजूद लोगों के बाहर निकलने का समय भी बहुत कम रह जाता है.

हिमालयी क्षेत्र में निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण

चमोली उत्तराखंड के उन इलाकों में शामिल है जहां भूगर्भीय परिस्थितियां बेहद जटिल हैं. हिमालय अपेक्षाकृत युवा पर्वत श्रृंखला है और यहां चट्टानों में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं. अलग-अलग स्थानों पर चट्टानों की मजबूती, पानी की मौजूदगी और जमीन की संरचना में काफी अंतर हो सकता है.

इसी कारण टनल निर्माण के दौरान केवल ऊपर दिखाई देने वाली चट्टानों को देखकर खतरे का अनुमान लगाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता. पहाड़ के भीतर छिपी दरारें और जलधाराएं अचानक बड़ी चुनौती बन सकती हैं.

बारिश और जलस्तर ने बढ़ाया जोखिम

हादसे के समय मौसम और बारिश की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. लगातार बारिश होने पर पहाड़ के भीतर पानी का रिसाव बढ़ सकता है और भूमिगत जलस्तर ऊपर जा सकता है. इससे चट्टानों के बीच पानी का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है.

अगर टनल की खुदाई ऐसे हिस्से तक पहुंच जाए जहां पहले से पानी जमा हो, तो खुदाई के दौरान अचानक पानी का रास्ता खुल सकता है.

सुरक्षा जांच और निगरानी पर उठे सवाल

इस घटना के बाद टनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी हो गई है. विशेषज्ञ आमतौर पर ऐसी परियोजनाओं में भूगर्भीय सर्वे, पानी के संभावित स्रोतों की पहचान, ड्रेनेज सिस्टम और लगातार मॉनिटरिंग को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं.

हालांकि हादसे की अंतिम और आधिकारिक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. शुरुआती परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि पहाड़ के भीतर मौजूद पानी, कमजोर भूगर्भीय संरचना और मलबे के अचानक खिसकने की स्थिति ने मिलकर टनल के अंदर संकट पैदा किया.

राहत अभियान के साथ बढ़ी चिंता

घटना के बाद बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर जमा पानी और मलबे को हटाने की रही. ऐसे मामलों में राहतकर्मियों को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है, क्योंकि ऊपर से और चट्टान या मलबा गिरने का खतरा बना रहता है.

चमोली की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के लिए भूगर्भीय अध्ययन, जल निकासी और रियल टाइम सुरक्षा निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है.

यह भी पढ़ें - CM धामी चमोली घटना पर गहरी चिंता जताई, राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश

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  Sports

पहली बार महिला-पुरुष हॉकी वर्ल्डकप एक साथ होंगे:32 टीमों में 50 मुकाबले; भारत-पाकिस्तान मैच 19 अगस्त को; जानिए सब कुछ

15 अगस्त से हॉकी वर्ल्ड कप की शुरुआत हो रही है। पहली बार महिला और पुरुष के टूर्नामेंट एक साथ हो रहे हैं। बेल्जियम और नीदरलैंड मिलकर इसकी मेजबानी कर रहे हैं। भारतीय पुरुष टीम वेल्स के खिलाफ टूर्नामेंट का पहला मैच खेलेगी। यह मैच दोपहर 4:30 बजे शुरू होगा। इससे पहले महिलाओं का पहला मैच ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच दोपहर 1:30 बजे से होगा। 16 दिन चलेंगे टूर्नामेंट, 2 वेन्यू पर मुकाबले शनिवार से शुरू होने वाले टूर्नामेंट 16 दिन तक चलेंगे। दोनों टूर्नामेंट में कुल 50 मैच खेले जाएंगे। इनका आयोजन 2 फेज में होगा। पहला ग्रुप स्टेज, क्रॉसओवर पूल। फिर सेमीफाइनल और फाइनल मैच होंगे। सभी मैच 2 वेन्यू पर आयोजित होंगे। कुल 32 टीमें हिस्सा ले रहीं मेंस और विमेंस वर्ल्ड कप में 16-16 टीमें (कुल 32 टीमें) हिस्सा लेंगी। ग्रुप स्टेज में 16 टीमें 4 ग्रुप (ए, बी, सी, डी) में बंटेंगी और हर टीम 3 मैच खेलेगी। हर ग्रुप से टॉप-2 टीम क्रॉसओवर राउंड में जाएगी। इन 8 टीमों को 2 ग्रुपों में बांटा जाएगा। इस राउंड में हर टीम तीन और मैच खेलेगी। ये मुकाबले उन टीमों से होंगे, जिनसे उसका मैच नहीं हुआ है। यहां से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल पहुंचेंगी। 29-30 अगस्त को फाइनल होंगे फाइनल मैच 29 और 30 अगस्त को खेले जाएंगे। महिला वर्ल्ड कप का फाइनल 29 अगस्त को खेला जाएगा। जबकि, पुरुष वर्ल्ड कप का खिताबी मुकाबला 30 अगस्त को रात 8:00 बजे से शुरू होगा। दोनों फाइनल के दिन ब्रॉन्ज मेडल मैच भी होंगे। बेल्जियम में पहली बार वर्ल्ड कप हरमनप्रीत और सलीमा भारत के कप्तान पुरुष टीम : गोलकीपर्स: मोहित एच.एस., सूरज करकेरा। डिफेंडर्स: हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच। मिडफील्डर्स: मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलाकंता शर्मा, राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालगे। फॉरवर्ड्स: मंदीप सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा। महिला टीम: गोलकीपर्स: सविता पूनिया, बिशू देवी खरीबाम। डिफेंडर्स: ईशिका चौधरी, सुशीला चानु पुखरंबम, लालथंटलुआंगी, ज्योति, शिल्पी डबास। मिडफील्डर्स: सलीमा टेटे (कप्तान), निक्की प्रधान, साक्षी राणा, सुनेलिता टोप्पो, नेहा, दीपिका सोरेंग। फॉरवर्ड्स: लालरेमसियामी, रुतुजा दादासो पिसाल, नवनीत कौर, दीपिका सहरावत, ईशिका, बलजीत कौर, ब्यूटी डुंगडुंग। ईनामी राशि नहीं, ट्रॉफी और मेडल मिलेंगे हॉकी वर्ल्ड कप में ईनामी राशि नहीं है। इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन (FIH) वर्ल्ड कप या प्रो लीग जैसे वर्ल्ड लेवल टूर्नामेंट्स में ट्रॉफी और मेडल्स देते हैं। नीदरलैंड ने सभी वर्ल्ड कप खेले भारत, नीदरलैंड और स्पेन जैसी टीमों ने सभी पुरुष वर्ल्ड कप खेले हैं। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अर्जेंटीना 15-15 बार यह ग्लोबल टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। पाकिस्तान ने 14 और बेल्जियम ने 8 बार हिस्सा लिया है। वहीं, नीदरलैंड, अर्जेंटीना और जर्मनी ने विमेंस कैटेगरी के सभी वर्ल्डकप खेले हैं। ऑस्ट्रेलिया 14, इंग्लैंड-स्पेन 13-13, चीन 10 और भारत ने 9 बार यह टूर्नामेंट खेला है। भारत ने 1975 में पहला वर्ल्ड कप जीता था भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 1971 में शुरू हुए पहले हॉकी वर्ल्ड कप से ही इस टूर्नामेंट में खेलना शुरू कर दिया था। टीम ने अब तक 15 बार टूर्नामेंट में भाग लिया और केवल एक बार वर्ल्ड कप जीता है। भारतीय हॉकी टीम ने 1975 में कुआलालंपुर, मलेशिया में खेले गए वर्ल्ड कप के फाइनल में पाकिस्तान को हराकर यह खिताब अपने नाम किया था। भारतीय महिला हॉकी टीम ने अब तक कोई वर्ल्ड कप नहीं जीता है। टीम ने 1974 में अपने पहले वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था। जंग के कारण पाकिस्तान से छिनी पहले वर्ल्ड कप की मेजबानी हॉकी वर्ल्ड कप कराने का विचार सबसे पहले पाकिस्तान एयर मार्शल नूर खान के दिमाग में आया था। मार्च 1969 में FIH की बैठक में भारत और पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से टूर्नामेंट कराने का प्रस्ताव रखा। इसी बीच 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग शुरू हो गई। पाकिस्तान ने भारत को खेलने का न्योता तो दिया, लेकिन वहां के कुछ राजनेताओं और क्रिकेट खिलाड़ी अब्दुल हफीज कारदार के नेतृत्व में लोगों ने भारत की भागीदारी का हिंसक विरोध शुरू कर दिया। मैच शुरू होने से चंद महीने पहले मार्च 1971 में FIH ने सुरक्षा कारणों से इस मेगा इवेंट को पाकिस्तान से हटाकर एक न्यूट्रल यूरोपीय देश स्पेन (बार्सिलोना) में शिफ्ट कर दिया था। हालांकि, पाकिस्तान ने पहला टाइटल जीता था। --------------------------------------------------------- हॉकी वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… भारतीय गोलकीपर सविता पुनिया बोले- विमेंस हॉकी में किसी को भी हरा सकता है भारत, मेडल जीतने की काबिलियत भारतीय गोलकीपर सविता पुनिया लगातार तीसरा वर्ल्ड कप खेलेंगी। विमेंस हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पुनिया ने कहा है कि भारत वर्ल्ड कप 2026 में पोडियम फिनिश कर सकता है। जियोहॉस्टार से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत किसी भी टीम को हरा सकता है। पढ़ें पूरी खबर Thu, 13 Aug 2026 23:48:00

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