चमोली हादसा: टनल के अंदर कैसे भर गया पानी और मलबा? सामने आई बड़ी वजह
Chamoli Incident: उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर टनल के भीतर इतनी तेजी से पानी और मलबा कैसे पहुंचा? शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पहाड़ के भीतर मौजूद पानी और कमजोर भूगर्भीय संरचना इस घटना की अहम वजह मानी जा रही है.
पहाड़ के भीतर जमा पानी बना खतरा
पहाड़ी इलाकों में चट्टानों के बीच प्राकृतिक रूप से पानी जमा रहता है. बारिश के दौरान यह पानी जमीन और चट्टानों के भीतर रिसकर भूमिगत जलधाराओं का हिस्सा बन जाता है. जब किसी निर्माणाधीन टनल की खुदाई इस तरह की जलधारा या पानी से भरी दरार के करीब पहुंचती है, तो अचानक दबाव के साथ पानी टनल के अंदर प्रवेश कर सकता है.
चमोली जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां की चट्टानें कई स्थानों पर टूट-फूट और भूगर्भीय बदलावों से प्रभावित रहती हैं.
मलबा पानी के साथ तेजी से आया
सिर्फ पानी का टनल में प्रवेश करना ही समस्या नहीं था. पानी के दबाव के साथ आसपास की ढीली मिट्टी, चट्टानों के टुकड़े और अन्य मलबा भी अंदर की ओर बह सकता है. यही वजह है कि कुछ ही समय में टनल का रास्ता मलबे से भरने की स्थिति बन गई.
ऐसे हादसों में पानी और मलबे का दबाव बेहद खतरनाक हो सकता है. अचानक रास्ता बंद होने से अंदर मौजूद लोगों के बाहर निकलने का समय भी बहुत कम रह जाता है.
हिमालयी क्षेत्र में निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण
चमोली उत्तराखंड के उन इलाकों में शामिल है जहां भूगर्भीय परिस्थितियां बेहद जटिल हैं. हिमालय अपेक्षाकृत युवा पर्वत श्रृंखला है और यहां चट्टानों में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं. अलग-अलग स्थानों पर चट्टानों की मजबूती, पानी की मौजूदगी और जमीन की संरचना में काफी अंतर हो सकता है.
इसी कारण टनल निर्माण के दौरान केवल ऊपर दिखाई देने वाली चट्टानों को देखकर खतरे का अनुमान लगाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता. पहाड़ के भीतर छिपी दरारें और जलधाराएं अचानक बड़ी चुनौती बन सकती हैं.
बारिश और जलस्तर ने बढ़ाया जोखिम
हादसे के समय मौसम और बारिश की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. लगातार बारिश होने पर पहाड़ के भीतर पानी का रिसाव बढ़ सकता है और भूमिगत जलस्तर ऊपर जा सकता है. इससे चट्टानों के बीच पानी का दबाव बढ़ने की संभावना रहती है.
अगर टनल की खुदाई ऐसे हिस्से तक पहुंच जाए जहां पहले से पानी जमा हो, तो खुदाई के दौरान अचानक पानी का रास्ता खुल सकता है.
सुरक्षा जांच और निगरानी पर उठे सवाल
इस घटना के बाद टनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी हो गई है. विशेषज्ञ आमतौर पर ऐसी परियोजनाओं में भूगर्भीय सर्वे, पानी के संभावित स्रोतों की पहचान, ड्रेनेज सिस्टम और लगातार मॉनिटरिंग को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं.
हालांकि हादसे की अंतिम और आधिकारिक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. शुरुआती परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि पहाड़ के भीतर मौजूद पानी, कमजोर भूगर्भीय संरचना और मलबे के अचानक खिसकने की स्थिति ने मिलकर टनल के अंदर संकट पैदा किया.
राहत अभियान के साथ बढ़ी चिंता
घटना के बाद बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर जमा पानी और मलबे को हटाने की रही. ऐसे मामलों में राहतकर्मियों को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है, क्योंकि ऊपर से और चट्टान या मलबा गिरने का खतरा बना रहता है.
चमोली की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के लिए भूगर्भीय अध्ययन, जल निकासी और रियल टाइम सुरक्षा निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है.
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CM धामी ने चमोली घटना पर गहरी चिंता जताई, राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के पीपलकोटी में मौजूद टीएचडीसी (THDC) टनल के भीतर मलबा एवं पानी आने की घटना पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं. सीएम ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों को तुरंत घटनास्थल पर भेज दिया गया है. जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को समन्वय के साथ त्वरित राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं.
घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वे स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों से निरंतर संपर्क में हैं तथा स्थिति की पल-पल की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी (THDC) टनल के भीतर मलबा एवं पानी आने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं.
बचाव अभियान चलाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों को तत्काल घटनास्थल पर भेज दिया गया है. जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को समन्वय के साथ त्वरित राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि वे स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों से निरंतर संपर्क में हैं तथा स्थिति की पल-पल की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है और इस दिशा में सभी आवश्यक संसाधन लगाए गए हैं.
हर संभव कदम उठाए जा रहे
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए तथा प्रभावित लोगों और उनके परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ईश्वर से सभी लोगों के सकुशल होने की प्रार्थना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है तथा आवश्यकतानुसार हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.
13 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू,बचाव अभियान जारी
जनपद चमोली अंतर्गत मायापुर (पीपलकोटी) में गुरुवार शाम लगभग 7:05 बजे टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की सूचना प्राप्त हुई है. प्रारंभिक सूचना के अनुसार, टनल में कार्य कर रहे 18 से 19 लोगों के फंसने की सूचना है. उक्त निर्माण कार्य एचसीसी कंपनी की ओर किया जा रहा था. घटना की सूचना मिलते ही खोज एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया. अब तक 13 व्यक्तियों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है, वहीं शेष लोगों की तलाश एवं सुरक्षित रेस्क्यू के लिए अभियान लगातार जारी है. घटना की गंभीरता को देखते हुए सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी हैं. वहीं डीआईआरएफ, स्थानीय पुलिस एवं सीआईएसएफ के जवानों द्वारा मौके पर वर्तमान में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. जिला प्रशासन द्वारा घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा बचाव एवं राहत कार्यों के लिए सभी आवश्यक संसाधन मौके पर जुटाए जा रहे हैं.
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