सांवलिया सेठ धाम में दिखा अलौकिक वैभव, 90 दिन की मेहनत से तैयार हुई करोड़ों की पिछवाई, भक्तों की लगी भीड़
Udaipur Sanwaliya Seth Mandir: राजस्थान के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में स्थापित की गई भव्य पिछवाई इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. इस अद्वितीय कलाकृति को तैयार करने में लगभग 20 किलो सोना और 120 किलो चांदी का उपयोग किया गया है, जबकि इसके निर्माण में करीब 90 दिनों का समय लगा. मंदिर प्रशासन और कुशल कारीगरों की मेहनत से तैयार हुई यह पिछवाई धार्मिक आस्था, कला और शिल्प का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है. इसकी बारीक नक्काशी, आकर्षक डिजाइन और भव्यता श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है. दर्शन के लिए आने वाले भक्त न केवल भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि इस अनूठी कलाकृति को भी निहारने के लिए विशेष रूप से रुक रहे हैं.
250 साल पहले सुल्तानपुर का तीन सूबा इलाहाबाद का था हिस्से, इस संधि में शुजाउद्दौला को मिला, जाने इतिहास
मुगल काल के बाद जब नवाबों का शासन अवध क्षेत्र समेत पूरे उत्तर प्रदेश सूबे में हुआ तो उस समय सफदरजंग यहां का सूबेदार बनाया गया. सफदरजंग की जब मृत्यु हुई तो नवाब सुजाउद्दौला अवध और इलाहाबाद का सूबेदार बनाया गया. सुझाव दौला के पास काम करने का कोई अनुभव नहीं था. मो. कुली इलाहाबाद सूबे का नायब सूबेदार था.उसने स्वयं शुजाउद्दौला को अवध के सिंहासन से हटाने का प्रयास किया लेकिन उसे सद्बुद्धि आई जिसकी वजह से उसे इलाहाबाद की सूबेदारी मिल गई. जब सन 1759 ई. में दिल्ली के सुलतान आलमगीर द्वितीय की हत्या हो गई
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