Chamoli Landslide: चमोली में बड़ा हादसा, अचानक टनल धंसने के कारण कई लोग फंसे, अब तक 10 लोगों को बचाया
उत्तराखंड के चमोली जिले में एक बड़ा सामने आया है. यहां पीपलकोटी में THDC जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग अचानक धंस गई. इस हादसे के वक्त टनल के अंदर मजदूरों के फंसे होने की आशंका है. इलाके में हड़कंप मच गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब टनल के अंदर कुल 20 से 25 मजदूर काम कर रहे थे. इसके दौरान अचालक सुरंग के धसने से अफरा-तफरी मच गई. इस हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव दल तुरंत हरकत में आ गया. राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है. अब 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.
रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का निर्देश दिया गया है
कई लोगों को बचाने के लिए काम जारी है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हादसे की गंभीरता को देखते हुए हालात का जायजा ले रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सूचना दी कि पीपलकोटी स्थित THDC टनल के अंदर मलबा और पानी आने की खबर मिली है. मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने का प्रयास हो रहा है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर भेज दिया गया है. जिला प्रशासन और अन्य सभी संबंधित एजेंसियों को युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का निर्देश दिया गया है.
#WATCH | Chief Minister’s Office- Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami has expressed deep concern over the incident of debris and water entering the THDC tunnel at Pipalkoti in Chamoli district and directed officials to conduct relief and rescue operations on a war… pic.twitter.com/DXhaSKhbUO
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 13, 2026
राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर
सीएम पुष्कर सिंह धामी लगातार अधिकारियों के संपर्क में बनाए हुए हैं. पल-पल के अपडेट ले रहे हैं. अपडेट सामने आ रहे हैं. प्रशासन के अनुसार, उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता टनल के अंदर फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है. शासन और प्रशासन की टीमें मौके पर डटी हुई हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी ताकत से चलाया जा रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी (THDC) टनल के भीतर मलबा एवं पानी आने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं.
अभियान चलाने के निर्देश दिए गए
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों को तत्काल घटनास्थल पर भेज दिया गया है. जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों एवं एजेंसियों को समन्वय के साथ त्वरित राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. धामी ने कहा कि वे स्वयं वरिष्ठ अधिकारियों से निरंतर संपर्क में हैं तथा स्थिति की पल-पल की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है और इस दिशा में सभी आवश्यक संसाधन लगाए गए हैं.
मानसून सत्र में संसद का कामकाज हुआ बेहद कम, लोकसभा में 19 तो राज्यसभा में महज 39 फीसदी हुए काम
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ समाप्त हो गया. पूरे सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला. लगातार हंगामे और नारेबाजी का असर संसद के कामकाज पर भी पड़ा. आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में सिर्फ 17 घंटे 33 मिनट और राज्यसभा में 37 घंटे 21 मिनट काम हुआ. लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की करीब 39 प्रतिशत रही.
पहले दिन से ही बना रहा गतिरोध
मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी, लेकिन शुरुआती दिनों से ही सदन में विपक्ष के विरोध और हंगामे का सिलसिला देखने को मिला. विपक्षी दल अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे थे.
इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी. नतीजा यह रहा कि कई दिनों तक लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज के लिए सीमित समय ही उपलब्ध हो पाया.
प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं चल सके
इस मानसून सत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह रही कि लोकसभा में एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल सामान्य रूप से नहीं चल सका. विपक्ष के लगातार विरोध के कारण सदन की निर्धारित कार्यवाही प्रभावित हुई.
लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल चलने देने और विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने की अपील की, लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हो पाया.
संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित; दोनों सदनों से पारित हुए 12 विधेयक
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) August 13, 2026
➡️सत्र के दौरान 25 दिनों की अवधि में कुल 19 बैठकें हुईं।
➡️सत्र के दौरान, लोक सभा में 11 विधेयक और राज्य सभा में 02 विधेयक पुर:स्थापित किए गए
➡️लोक सभा द्वारा 12 विधेयक और राज्य सभा द्वारा 12… pic.twitter.com/EAR1qa3fh9
28 जुलाई को मिला चर्चा का सबसे लंबा मौका
पूरे सत्र में 28 और 29 जुलाई को लोकसभा में अपेक्षाकृत सामान्य माहौल देखने को मिला. 28 जुलाई को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर करीब 9 घंटे 6 मिनट चर्चा हुई.
29 जुलाई को भी लोकसभा में लगभग 2 घंटे 17 मिनट काम हुआ. यह सत्र के उन चुनिंदा मौकों में रहा, जब सदन में विधायी कामकाज और चर्चा अपेक्षाकृत सुचारु तरीके से आगे बढ़ी.
लोकसभा से कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित
हंगामे के बावजूद मानसून सत्र में लोकसभा ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी. इनमें खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ करने वाला विधेयक और सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या से संबंधित संशोधन विधेयक शामिल रहे.
इसके अलावा कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक भी पारित हुआ. वहीं, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को 12 अगस्त को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC को भेजने का प्रस्ताव भी लोकसभा ने मंजूर किया.
परीक्षा सुधार और ‘वंदे मातरम्’ विधेयक भी चर्चा में
29 जुलाई को लोकसभा ने परीक्षा में अनुचित साधनों पर रोक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार से संबंधित संशोधन विधेयक पारित किया. यह कदम नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना गया.
इसके अलावा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान से जुड़े प्रावधानों वाला विधेयक भी विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित किया गया.
अंतिम दिन ‘वंदे मातरम्’ से हुआ समापन
13 अगस्त को लोकसभा की बैठक शुरू होते ही अध्यक्ष ने सदस्यों से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान में खड़े होने को कहा. इसके बाद इसके सभी छह अंतरों की रिकॉर्डिंग सुनाई गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विभिन्न दलों के नेता सदन में मौजूद रहे. राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी.
राज्यसभा में भी व्यवधान का असर
राज्यसभा में भी हंगामे और व्यवधान का असर दिखाई दिया. पूरे सत्र में सदन केवल 37 घंटे 21 मिनट काम कर सका और इसकी उत्पादकता करीब 39 प्रतिशत रही.
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सत्र के समापन पर व्यवधान को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लगातार बाधित हुई कार्यवाही के कारण राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हुआ.
संसद के कामकाज पर फिर उठे सवाल
मानसून सत्र के आंकड़े एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं कि राजनीतिक गतिरोध का असर संसदीय कामकाज पर किस हद तक पड़ रहा है. महत्वपूर्ण विधेयक पारित होने के बावजूद प्रश्नकाल और शून्यकाल का प्रभावी ढंग से न चल पाना तथा बार-बार कार्यवाही स्थगित होना लोकतांत्रिक बहस के लिए चिंता का विषय बना रहा.
कुल मिलाकर, 2026 का मानसून सत्र राजनीतिक टकराव, सीमित संसदीय कामकाज और कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के लिए याद किया जाएगा. लोकसभा की 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत उत्पादकता बताती है कि इस बार संसद में विधायी कामकाज के लिए उपलब्ध समय का बड़ा हिस्सा हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ गया.
यह भी पढ़ें - संसद का मानसून सत्र खत्म, रिजिजू बोले- 12 बिल हुए पास, विपक्ष पर साधा निशाना...
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









