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Explainer: बड़े स्टार, महंगे VFX और 500 करोड़ का बजट भी फेल! आखिर कहां चूक रहा है बॉलीवुड?
Why Big Budget Bollywood Movies Flopping: आज एक्सपेलर में हम बात करेंगे कि बॉलीवुड में 500 करोड़ के बजट वाली फिल्में भी बड़े पर्दे पर कमाल क्यों नहीं पा रही हैं. कई बार आपने गौर किया होगा कि इतने बड़े बजट की फिल्में आखिर हिट क्यों नहीं हो पाती हैं. जहां एक तरफ छोटे बजट की फिल्म भी 500 करोड़ रुपये कमा रही हैं तो बड़े स्टार, मंहगे वीएफएक्स और इतनी मार्केटिंग के बावजूद ये फिल्में फ्लॉप क्यों जाती है. इन सबके पीछे ऐसे कई कारण हैं जिसके बारे में शायद आपने कभी सोचा हो. यहां पर हम आपको इन कारणों के बारे में विस्तार से बताएंगे. आइए शुरू करते हैं.
बड़े स्टार, महंगे VFX और 500 करोड़ का बजट भी फेल!
बॉलीवुड में एक ऐसा भी दौर था जब फिल्म के पोस्टर पर बड़े स्टार का चेहरा दिखते ही ऑडियंस सिनेमाघरों की ओर दौड़ पड़ती थी. फिल्म का बजट 100 करोड़ हो या 300 करोड़, बॉक्स ऑफिस पर सक्सेस तय मानी जाती थी. लेकिन आज के समय में बॉक्स ऑफिस पर हिट और ब्लॉकस्टर का फॉर्मूला पूरी तरह बदल चुका है. अब ऑडियंस सिर्फ बड़े स्टार, महंगे सेट और भारी-भरकम वीएफएक्स देखकर टिकट खरीदने को तैयार नहीं हैं. यही वजह है कि हाल के सालों में कई ऐसी फिल्में आईं, जिन पर सैकड़ों करोड़ रुपये फूंके गए. लेकिन वे बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म नहीं कर सकीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी दौर में कम बजट वाली फिल्मों ने शानदार सफलता हासिल की. इससे साफ हो गया कि आज के दौर में बजट नहीं, बल्कि कंटेंट ही असली स्टार है, जो किसी फिल्म को हिट कराने के लिए अहम चीज है.
स्टोरी कमजोर, चमक-दमक ज्यादा
आज के समय में बॉलीवुड की सबसे बड़ी कमी कंटेंट में दिखाई देती है. कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर यह मान बैठे कि भव्य सेट, फॉरेन की लोकेशन और मॉर्डन वीएफएक्स ऑडियंस को थिएटर ले आएंगे. लेकिन ऑडियंस का जायका बहल चुका है.अब ऑडियंस उन ही फिल्मों से जुड़ती है जिसकी स्टोरी दम हो. ऑडियंस इमोशनली फिल्म से जुड़ना चाहती हैं. उसे ऐसे किरदार चाहिए जिनसे वह खुद को जोड़ सके. जब फिल्म की स्टोरी कमजोर होती है, तो महंगे विजुअल्स भी फिल्म को नहीं बचा पाते. आपके सामने सबसे बड़ा उदाहरण प्रभाष स्टारर आदिपुरुष फिल्म है.
इस फिल्म का बजट करीब 500 से 600 करोड़ रुपये के बताया जाता है. इस फिल्म से लोगों को बहुत उम्मीदे थीं. लेकिन इसके कमजोर डायलॉग, विवादित कटेंट और वीएफएक्स को लेकर उठे सवालों ने फिल्म की इमेज को नुकसान पहुंचाया. जिसका नतीजा यह हुआ कि इतने बड़े बजट की फिल्म भी उम्मीद के मुताबिक सिनेमाघरों में नहीं चल की.
साउथ इंडस्ट्री ने बॉलीवुड का बिगाड़ा खेल
पिछले कुछ सालों में साउथ इंडस्ट्री की फिल्मों ने बॉलीवुड फिल्म का समीकरण बदल दिया है. इसमें 'आरआरआर', 'कांतारा', 'पुष्पा' और इसके बाद आई कई पैन-इंडिया फिल्मों ने साबित किया कि ऑडियंस अब सिर्फ बॉलीवुड तक लिमिटेड नहीं है. साउथ फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने बड़े कैनवस के साथ मजबूत स्टोरी पर भी उतना ही ध्यान दिया. इन फिल्मों में लोकल कल्चर, इमोशन, एक्शन और एंटरनेटमेंट का बैलेंस देखने को मिला.वहीं, दूसरी तरफ बॉलीवुड की कई फिल्में ऑडियंस की स्टोरी साउथ की फिल्मों जितनी मजबूत नहीं दिखी. ऐसे में ऑडियंस समझने लगी कि फिल्म के प्रोड्यूसर इंडियन कल्चर इमोशन को समझने के बजाय केवल ग्लैमर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.यही वजह है कि हिंदी बेल्ट में भी साउथ फिल्मों का प्रभाव लगातार बढ़ता गया.
स्टार्स की फीस भी बन रही बड़ी समस्या
बॉलीवुड स्टार्स की फीस भी फिल्मों को फ्लॉप कराने में एक बड़ी वजह है. कई फिल्मों में कुल बजट का बड़ा हिस्सा कलाकारों की फीस में खर्च हो जाता है. मान लीजिए किसी फिल्म का बजट 300 करोड़ रुपये है. ऐसे में अगर उसमें से 100 से 150 करोड़ रुपये लीड एक्टर की फीस में चले जाएं, तो फिल्म के स्क्रिप्ट, टेक्निशियन टीम, रिसर्च और अन्य जरूरी चीजों के लिए उतना बजट नहीं मिल पाता है. इसका पूरा असर फिल्म की स्टोरी पर पड़ता है.कई एक्सपर्ट का मानना है कि बॉलीवुड को हॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की तरह प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल की ओर बढ़ना होगा, जहां कलाकार सक्सेस के साथ कमाई करते हैं, न कि पूरी रकम पहले ही ले लेते हैं.
रीमेक और सीक्वल पर जरूरत से ज्यादा भरोसा
एक दौर था जब रीमेक फिल्में सक्सेस की गारंटी मानी जाती थीं. लेकिन अब ऑडियंस पहले से ज्यादा अवेयर हो चुकी है. ऐसे में अगर कोई फिल्म साउथ या हॉलीवुड फिल्म का रीमेक है, तो ऑडियंस अक्सर उसे देखना ज्यादा पसंद करते हैं. इसी तरह कई सीक्वल फिल्मों में केवल पुराने ब्रांड का फायदा उठाने की कोशिश की गई, लेकिन स्टोरी पर ज्यादा मेहनत की जाती है. इसका नतीजा यह हुआ कि ऑडियंस ने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स को नकार दिया जिनमें सिर्फ फ्रेंचाइजी का नाम था, लेकिन नई स्टोरी में दम नहीं था.
हाल के वर्षों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स ने इंडस्ट्री को दिया झटका
आदिपुरुष
आदिपुरुष में बॉलीवुड एक्टर भी नजर आए थे. यह फिल्म करीब 500-600 करोड़ रुपये के बजट बनी थी. इसे उस समय इंडियन सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्म में गिना गया था. लेकिन रिलीज के बाद ऑडियंस ने इसे नकार दिया था.
बड़े मियां छोटे मियां
अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ जैसी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म ऑडियंस को खुश नहीं कर सकी. यह मूवी लगभग 350 करोड़ रुपये के बजट तैयार हुई थी. बॉक्स ऑफिस पर इसे भारी नुकसान झेलना पड़ा. इसका सबसे बड़ा कारण कमजोर स्टोरी और इमोशनली लोगों से जुड़ नहीं पाई.
मैदान
अजय देवगन स्टारर मैदान फिल्म की क्रिटिक्स ने तारीफ की थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वैसी भीड़ नहीं जुटी जिसकी उम्मीद की जा रही थी. जिससे साफ पता चलता है कि अच्छी फिल्म होने के बावजूद ऑडियंस तक सही तरीके से पहुंचना भी जरूरी है.
आगे की राह क्या है?
आज के समय के बदलते ट्रेंड को देखते हुए बॉलीवुड को अपनी रणनीति बदलनी होगी. केवल बड़ा बजट सक्सेस की गारंटी नहीं है. फिल्म की स्क्रिप्ट ज्यादा ध्यान देने की जरूर है. स्क्रिप्ट डेवलपमेंट पर टाइम और पैसा खर्च करना होगा. स्टार फीस और प्रोडक्शन लागत के बीच बैलेंस बनाना होगा. साथ ही ऑडियंस की बदलती पसंद को समझना होगा.
सबसे जरूरी बात यह है कि इंडियन ऑडियंस आज भी अच्छी फिल्मों को थिएटर देखना पसंद करते हैं. इसका सबसे ताजा उदाहरण रणवीर सिंह की धुरंधर फ्रेचाइजी फिल्म है. ऐसे में समस्या ऑडियंस में नहीं, बल्कि उन फिल्मों में है जो यह मानकर बनाई जाती हैं कि बजट ही सक्सेस हथियार है. एक समझनी होगी कि करोड़ों रुपये खर्च करके ऑडियंस को थिएटर तक बुलाया जा सकता है, लेकिन उन्हें सीट पर बांधे रखने का काम आज भी सिर्फ एक मजबूत स्टोरी ही करती है.
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