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सेहत और स्वाद का शानदार मेल 'लौकी कलाकंद', घर पर बनाएं गर्मियों की खास मिठाई

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। गर्मियों के मौसम में लोग ऐसे खानपान या मिठाइयों की तलाश करते हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी हो। ऐसी ही एक मिठाई का नाम है लौकी कलाकंद, जो न केवल मिठास से भरपूर बल्कि सेहतमंद भी है।

आमतौर पर लौकी का इस्तेमाल सब्जी बनाने में किया जाता है, लेकिन इससे तैयार होने वाला कलाकंद मिठाई प्रेमियों के लिए एक खास विकल्प है। यह मिठाई कम कैलोरी वाली होने के साथ-साथ कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग भी इसे पसंद करते हैं।

लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, जिससे शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है। इसमें फाइबर, पोटैशियम, कैल्शियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, पेट को ठंडक देने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक मानी जाती है। फाइबर, विटामिन ए, पोटैशियम, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

ऐसे में लौकी कलाकंद पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होती है। फाइबर की वजह से कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। कम कैलोरी होने के कारण वजन नियंत्रण में मदद करती है। पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है और दिल को स्वस्थ बनाता है। साथ ही यह त्वचा को चमकदार बनाने और शरीर से विषाक्त तत्व निकालने में भी सहायक है। गर्मियों में यह एनर्जी बनाए रखने में कारगर साबित होती है।

लौकी कलाकंद बनाना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले ताजी लौकी को अच्छे से धोकर छील लें, बीज निकाल दें और कद्दूकस कर लें। कढ़ाई में दो बड़े चम्मच घी गरम करें, उसमें कद्दूकस की हुई लौकी डालकर मध्यम आंच पर लगभग 10-15 मिनट तक भून लें। फिर स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पानी सूखने तक पकाएं।

इसके बाद लौकी में मावा या मिल्क पाउडर और थोड़ा घी डालकर लगातार चलाते हुए भूनें, जब तक पूरा मिश्रण गाढ़ा और दानेदार न हो जाए। आखिर में इलायची पाउडर डालकर अच्छे से मिला लें। मिश्रण को थाली या ट्रे में फैलाकर ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद मनचाहे आकार में काट लें। ऊपर से कटे हुए बादाम, नारियल या पिस्ता से सजाकर परोसें।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Explainer: क्राइम सीन रीक्रिएशन क्या होता है? ट्वीशा शर्मा केस में पुलिस ने क्यों दोबारा दोहराया पूरा घटनाक्रम

Explainer:  ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार (1 जून) को पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर पर क्राइम सीन रीक्रिएशन किया. इस दौरान डमी बॉडी की मदद से पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया गया ताकि यह समझा जा सके कि घटना के समय क्या हुआ था और गवाहों व आरोपियों के बयान कितने सही हैं. दरअसल, क्राइम सीन रीक्रिएशन एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है, जिसमें घटना को उसी तरह दोबारा तैयार किया जाता है जैसे वह हुई थी. इसका मकसद सबूतों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और बयानों का मिलान कर सच्चाई तक पहुंचना होता है. आइए जानते हैं कि क्राइम सीन रीक्रिएशन क्या है और जांच एजेंसियां इसका इस्तेमाल क्यों करती हैं. लेकिन इससे पहले नजर डालते हैं ट्वीशा शर्मा डेथ केस से जुड़े कुछ पहलुओं पर.

ट्वीशा केस में क्राइम सीन रीक्रिएशन क्यों हुआ?

ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर पर क्राइम सीन रीक्रिएशन किया. इस प्रक्रिया का मकसद घटना के समय क्या हुआ था, किसकी क्या भूमिका थी और अब तक दिए गए बयानों में कितनी सच्चाई है, इसका पता लगाना था.

दो घंटे तक चला घटनाक्रम का पुनर्निर्माण

सूत्रों के अनुसार, CBI की टीम दोपहर करीब 12 बजे गिरिबाला सिंह के घर पहुंची. उनके साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी मौजूद थे. करीब दो घंटे तक घर की छत पर घटना का सीन दोबारा तैयार किया गया. जांच एजेंसी ने डमी बॉडी और बोरों की मदद से उस दिन की परिस्थितियों को दोहराया. इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि घटना के समय कौन कहां मौजूद था, किसने क्या किया और क्या यह सब गवाहों और आरोपियों के बयानों से मेल खाता है या नहीं.

डमी बॉडी के जरिए दोहराया गया पूरा घटनाक्रम

सीबीआई ने जांच के दौरान ट्विशा शर्मा की डमी बॉडी का इस्तेमाल किया. पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भी मौके पर बुलाया गया था. जांच एजेंसी के सामने गिरिबाला सिंह ने यह दिखाया कि उन्होंने कथित तौर पर बेल्ट को कैसे काटा था. वहीं समर्थ सिंह ने यह बताया कि उन्होंने बॉडी को किस तरह उठाया था. जांच के दौरान परिवार के रिश्तेदार स्वराज सिंह को भी बुलाया गया और उनसे भी पूछताछ की गई. सीबीआई और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर मौजूद हर छोटी-बड़ी बात का बारीकी से निरीक्षण किया और कई अहम बिंदुओं पर जांच की.

गिरिबाला सिंह और समर्थ से पूछे गए अहम सवाल

क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे. एजेंसी यह जानना चाहती थी कि ट्विशा को सबसे पहले किसने देखा था. उसे नीचे किसने उतारा और पुलिस को सबसे पहले सूचना किसने दी थी. इसके अलावा यह भी पूछा गया कि पास के अस्पताल ले जाने के बजाय दूसरा विकल्प क्यों चुना गया. क्या उस समय ट्विशा की सांस चल रही थी? क्या उसे CPR देने की कोशिश की गई थी? शरीर पर मिले चोट के निशानों और दहेज से जुड़े आरोपों को लेकर भी कई सवाल किए गए.

क्या होता है क्राइम सीन रीक्रिएशन?

क्राइम सीन रीक्रिएशन एक वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है. इसमें घटना कब हुई, कैसे हुई, कहां हुई, किसने की और उसके पीछे क्या कारण था, इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पूरे घटनाक्रम को दोबारा तैयार किया जाता है. जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर एक संभावित घटनाक्रम तैयार करती हैं. फिर उसी के अनुसार घटनास्थल पर पूरी प्रक्रिया को दोहराया जाता है. इस दौरान हर संभावित एंगल को जांचा जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-सा घटनाक्रम तथ्यों और सबूतों से सबसे ज्यादा मेल खाता है.

क्यों किया जाता है क्राइम सीन रीक्रिएशन?

कई बार कोई घटना पहली नजर में जैसी दिखाई देती है, असलियत उससे बिल्कुल अलग होती है. ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां सच्चाई तक पहुंचने के लिए क्राइम सीन रीक्रिएशन का सहारा लेती हैं. मान लीजिए किसी व्यक्ति की मौत सड़क दुर्घटना में हुई दिखाई देती है. लेकिन बाद में परिवार आरोप लगाता है कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी और शव को वाहन के नीचे रखकर हादसे का रूप दिया गया. ऐसी स्थिति में जांच एजेंसी घटनास्थल पर पूरे घटनाक्रम को दोबारा तैयार करती है. फॉरेंसिक जांच और सीन रीक्रिएशन के जरिए यह पता लगाया जाता है कि वास्तव में क्या हुआ था. कई मामलों में इसी प्रक्रिया से हत्या, आत्महत्या या दुर्घटना के बीच का अंतर स्पष्ट हो जाता है.

क्राइम सीन रीक्रिएशन कैसे किया जाता है?

इस प्रक्रिया की शुरुआत पीड़ित, गवाहों और आरोपियों के बयानों से होती है. यदि पीड़ित की मौत हो चुकी हो तो घटनास्थल पर मौजूद लोगों और अन्य गवाहों से पूछताछ की जाती है. इसके बाद घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाती है. वहां मौजूद हर सबूत को सुरक्षित रखा जाता है और उसकी वैज्ञानिक जांच कराई जाती है. फॉरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल का गहराई से अध्ययन करते हैं और फिर पूरे मामले का विश्लेषण कर एक संभावित थ्योरी तैयार करते हैं.

उदाहरण से समझिए

यदि किसी व्यक्ति को गोली लगी हो और यह स्पष्ट न हो कि उसने आत्महत्या की है या उसकी हत्या हुई है, तो ऐसी स्थिति में क्राइम सीन रीक्रिएशन किया जाता है. जांच के दौरान खून के धब्बों, गोली चलने की दिशा, शूटर और पीड़ित के बीच की दूरी, गोलियों के निशान और अन्य साक्ष्यों की विस्तार से जांच की जाती है. इसी तरह फांसी के मामलों में फंदे की लंबाई, मृतक की ऊंचाई, छत की दूरी, गले पर बने निशान और घटनास्थल पर मौजूद अन्य सबूतों का विश्लेषण किया जाता है. इन सभी तथ्यों को जोड़कर जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करती है कि मौत की असली वजह क्या थी. यही कारण है कि ट्विशा शर्मा मामले में भी CBI ने क्राइम सीन रीक्रिएशन का सहारा लिया है, ताकि घटना से जुड़ी हर कड़ी को जोड़कर सच्चाई तक पहुंचा जा सके.

यह भी पढ़ें- Twisha Sharma Case: ट्विशा मर्डर केस में सामने आया 'पति-पत्नी और वो' का एंगल, समर्थ को प्रेगनेंसी पर भी शक

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  Sports

ICC का बड़ा एक्शन: भ्रष्टाचार के आरोपों पर Cricket Canada सस्पेंड, लेकिन Players खेलेंगे मैच

क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आई, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट कनाडा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। अहमदाबाद में आयोजित आईसीसी बोर्ड की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। आईसीसी के अनुसार क्रिकेट कनाडा ने सदस्यता से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया है, जिसके चलते यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

बता दें कि पिछले कुछ महीनों से क्रिकेट कनाडा विवादों में घिरा हुआ था। अप्रैल में कनाडाई प्रसारण निगम द्वारा प्रसारित एक वृत्तचित्र में संगठन के भीतर कथित भ्रष्टाचार, मैचों में हेरफेर और कुछ खिलाड़ियों व अधिकारियों से जुड़े हिंसा तथा धमकी के आरोपों को उजागर किया गया था। इसके बाद क्रिकेट कनाडा की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे थे।

मौजूद जानकारी के अनुसार आईसीसी बोर्ड ने फैसला लेते समय कनाडा के खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि निलंबन के बावजूद कनाडा की राष्ट्रीय पुरुष और महिला टीमें आईसीसी के सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हिस्सा ले सकेंगी। आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों को संगठनात्मक समस्याओं की वजह से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

गौरतलब है कि निलंबन के दौरान भी क्रिकेट कनाडा को आर्थिक सहायता मिलती रहेगी। हालांकि यह सहायता सीधे नहीं दी जाएगी, बल्कि आईसीसी प्रबंधन की निगरानी में नियंत्रित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। यह राशि केवल राष्ट्रीय टीमों के स्वीकृत कार्यक्रमों और गतिविधियों पर ही खर्च की जा सकेगी।

आईसीसी ने यह भी बताया कि क्रिकेट कनाडा को सदस्यता बहाल कराने के लिए कुछ विशेष शर्तें पूरी करनी होंगी। इन शर्तों का उद्देश्य संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है। इन सुधारों की निगरानी आईसीसी की सामान्यीकरण समिति और प्रबंधन टीम द्वारा की जाएगी। सभी शर्तों के पूरी तरह संतोषजनक तरीके से लागू होने के बाद ही सदस्यता बहाल करने पर विचार किया जाएगा।

इसी बैठक में आईसीसी बोर्ड ने खेल से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलावों को भी मंजूरी दी है। खराब रोशनी के कारण खेल प्रभावित होने की समस्या को कम करने के लिए टेस्ट क्रिकेट में लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद के इस्तेमाल का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि इसके लिए दोनों टीमों की सहमति जरूरी होगी। साथ ही मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के सहयोग से बेहतर प्रकाश व्यवस्था पर भी शोध किया जाएगा।

इसके अलावा अब निर्धारित पेय विराम के दौरान मुख्य प्रशिक्षक या उनके प्रतिनिधि मैदान में जाकर खिलाड़ियों से चर्चा कर सकेंगे। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 15 मिनट का अनिवार्य मध्यांतर भी लागू किया जाएगा। वहीं संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की जांच के दौरान मैच अधिकारियों को तकनीकी आंकड़ों तक पहुंच देने का भी फैसला लिया गया है।

क्रिकेट जानकारों का मानना है कि आईसीसी का यह कदम वैश्विक क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। साथ ही नए नियमों से खेल को अधिक आधुनिक और सुचारु बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
Mon, 01 Jun 2026 21:47:18 +0530

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