गांधी मेडिकल कॉलेज स्थापना दिवस: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दी बड़ी सौगात, आधुनिक फुटसल स्पोर्ट्स एरीना का किया लोकार्पण
गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल के विद्यार्थियों को अब तनावमुक्त माहौल देने के लिए परिसर में ही आधुनिक खेल सुविधाएं मिलेंगी, वहीं कैंसर मरीजों के सटीक इलाज के लिए विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे। कॉलेज के 71वें स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पूर्व छात्रों के सहयोग से करीब 35 लाख रुपए की लागत से तैयार आधुनिक फुटसल स्पोर्ट्स एरीना का लोकार्पण किया और साथ ही अस्पताल में मल्टी डिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड की शुरुआत भी की। इस गरिमामयी समारोह में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, जीएमसी डीन डॉ. कविता सिंह, हमीदिया अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन, जीएमसी एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गुरुदत्त तिवारी और सचिव डॉ. अजय मेहता सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक, शिक्षक, पूर्व छात्र और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान के पूर्व छात्रों का अपने संस्थान से लगातार जुड़ाव रहना नई पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए हमेशा एक बड़ी प्रेरणा का काम करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वास्थ्य सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसी दिशा में प्रदेश के भीतर चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। सरकार द्वारा एमबीबीएस, पीजी और विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा की सीटों को लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहद मजबूत किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के आम नागरिकों को बेहतर और आधुनिक इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।
उप मुख्यमंत्री का बीमारियों की रोकथाम पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में बढ़ रहे बीमारियों के बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल बीमारी का उपचार कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि प्रिवेंटिव हेल्थ केयर, स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से बीमारी के मूल कारणों को नियंत्रित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अंगदान का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए इसे एक जनआंदोलन बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे पवित्र माध्यम है। अंगदान करने वाले परिवारों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से अंगदाताओं को गार्ड ऑफ ऑनर देने और उनके परिजनों को स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के अवसरों पर सम्मानित करने की महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है।
GMC में शुरू हुआ मल्टी डिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड
कैंसर पीड़ितों के इलाज को और सुगम बनाने के लिए जीएमसी में शुरू किए गए मल्टी डिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड के बारे में डीन डॉ. कविता सिंह ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत कैंसर उपचार से जुड़े अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक एक साथ बैठकर मरीज की वास्तविक स्थिति पर चर्चा करेंगे और उसके उपचार की सर्वश्रेष्ठ रणनीति तय करेंगे। इससे विभिन्न डॉक्टरों की राय में होने वाले संभावित अंतर को खत्म किया जा सकेगा और मरीज को एक ही स्थान पर समन्वित उपचार मिल सकेगा। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत जरूरी मल्टी डिसिप्लिनरी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे मरीजों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनके इलाज में तेजी आएगी।
35 लाख रुपए की लागत से तैयार हुआ स्पोर्ट्स एरीना
जीएमसी एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गुरुदत्त तिवारी ने बताया कि लगभग 9 हजार वर्गफुट क्षेत्र में 35 लाख रुपए की लागत से यह आधुनिक फुटसल स्पोर्ट्स एरीना तैयार किया गया है, जिसे स्थापना दिवस पर कॉलेज को समर्पित किया गया है। यह परिसर विद्यार्थियों में शारीरिक फिटनेस, टीमवर्क और अनुशासन की भावना को बढ़ावा देने के साथ ही उन्हें तनावमुक्त जीवनशैली प्रदान करने में बेहद उपयोगी साबित होगा। एसोसिएशन ने कॉलेज और विद्यार्थियों के हित में भविष्य के विकास कार्यों के लिए करीब एक करोड़ रुपए का एक स्थायी कॉर्पस फंड (एफडी) भी तैयार किया है।
समारोह में मौजूद राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने डॉक्टरों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है और स्वास्थ्य सुविधाओं को तेजी से सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांधी मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश को उत्कृष्ट चिकित्सक और विशेषज्ञ प्रदान कर रहे हैं, इसलिए सभी डॉक्टरों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को सेवा भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए स्वच्छता जागरूकता प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया।
Uncovered With Manoj Gairola: क्या UPI से पेमेंट करना अब भी पूरी तरह फ्री रहेगा, नए Digital Payment कानून के बाद क्या होगा, जानें सबकुछ?
Uncovered With Manoj Gairola: क्या अब आपको UPI से payment करने पर पैसा देना होगा? सरकार का कहना है कि पार्लियामेंट में जो नया बिल पास हुआ है उससे आम आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन क्या वाक़ई में ऐसा है? और अगर नहीं है, तो क्या इसके पीछे विदेशी कंपनियाँ हैं जिन्हें UPI के आने से नुक़सान हुआ है. और क्या अमेरिकन government की नज़र हमारे डिजिटल पेमेंट के क़ानूनों पर बनी हुई हैं. अनकवर्ड में हम आपको बतायेंगे कि UPI के नये क़ानून के पीछे का खेल क्या है?
आपने कहावत तो सुनी होगी कि कान चाहे सीधे पकड़ो, या उल्टे, पकड़ने तो कान ही हैं. कुछ ये ही हाल नये UPI से जुड़े digital पेमेंट क़ानून का है. बिल पास होने के बाद सरकार ने एक बयान जारी किया. इसमें बताया कि आम आदमी को किसी को भी और कहीं भी पेमेंट करने पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगेगा. लेकिन पेमेंट लेने वाले दुकानदार को फ़ीस देनी पड़ेगी, जो कि बहुत कम होगी. और ये फ़ीस भी तब लगेगी जब पेमेंट एक निश्चित सीमा से ऊपर होगा.
क्या है UPI फ्री पेमेंट की सीमा
ये सीमा क्या है, यह बिल में तो नहीं है. लेकिन जो बात चल रही थी वो 2000 रुपए की थी. इसका मतलब यह है कि अगर आपने 2000 रुपए या उससे ज़्यादा का सामान ख़रीदा तो उस दुकानदार को फ़ीस देनी पड़ेगी. यानी सरकार का बयान पड़ कर आपको लगेगा कि आपकी जेब पर तो इस क़ानून का कोई असर नहीं होगा. लेकिन सच्चाई कुछ और है. और आप इसे ऐसे समझिए.
अगर आप 4000 रुपए का राशन ख़रीद कर UPI से पेमेंट करते हैं, तो नये क़ानून के मुताबिक़ इस ख़रीद पर दुकानदार को चार्ज देना होगा. ये तो अभी तक डिसाइड नहीं हुआ कि कितना पैसा देना पड़ेगा. अगर हम माने कि यह चार्ज कुल ख़रीद का 0.5% है, तो 4000 रुपए के पेमेंट पर दुकानदार को 20 रुपए देने होंगे.
कैश खरीद में कोई फायदा होगा?
हां. अगर खरीद आप cash से करते हैं तो दुकानदार पर 20 रुपए का चार्ज नहीं लगेगा. ऐसे में दुकानदार आपसे कैश पेमेंट करने के लिए ही कहेगा. अगर आप पेमेंट UPI से करते हैं तो वो 20 रुपए आप से ही लेगा. ये एक simple और commonsense की बात है. अगर दुकानदार यह चार्ज आपसे सीधे नहीं लेगा तो तो समान महंगा कर देगा. वो अपना नुक़सान तो सहन नहीं करेगा. यानी, ये बात साफ़ है कि चार्ज किसी पर भी लगे, पेमेंट तो अख़िरकार ग्राहक को ही करना होगा.…….
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना और फ्री UPI पेमेंट की सर्विस देना - इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. इसमें कोई शक नहीं कि फ्री UPI सर्विस से हमारी ज़िंदगी आसान हो गई है. जब UPI सर्विसेज़ नहीं थी, तो सारा cashless ट्रांजेक्शन क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से ही होता था. और इसके लिए 1.5-3% तक चार्ज लगता है. वैसे तो ये कार्ड बैंक्स इशू करते हैं, लेकिन इनके पीछे दो अमेरिकी कंपनियों हैं - मास्टर कार्ड और वीसा. ये कंपनियाँ ट्रांज़ेशन प्रोसेसिंग का काम करती हैं.
UPI से अमेरिकी कंपनियों के plans चौपट हो गये
लेकिन जब से फ्री UPI सर्विसेज़ आयी हैं तो इन दोनों अमेरिकी कंपनियों के plans चौपट हो गये हैं. आपको एक आँकड़ा बताते है. UPI अब कितनी बड़ी चीज़ बन चुकी है ये आपको इस बात से पता चल जाएगा कि 2025 में UPI के ज़रिए जितनीं बार पेमेंट हुए, उतने तो मास्टर कार्ड और वीसा ने पूरे संसार में भी नहीं किए.
अब आपको कुछ डेटा बताते हैं. आज हमारे देश में जितने भी कैशलेस ट्रांजेक्शन होते हैं उन्मे से 70% से ज़्यादा UPI के ज़रिए होते हैं. इसी जुलाई के महीने में UPI से 2400 करोड़ ट्रांजैक्शंस हुए थे. और इनकी टोटल वैल्यू 30 लाख करोड़ रुपए थी. इससे आपको पता चल गया होगा कि इन अमेरिकी कंपनियों के हाथ से कितना बड़ा बिज़नेस निकल गया.
सिर्फ़ RuPay क्रेडिट कार्ड ही UPI से लिंक
UPI की कामयाबी के बाद अमेरिकी क्रेडिट कार्ड कंपनियाँ अपनी सरकार से भारत की policies के ख़िलाफ़ शिकायत कर रही थी. आज हमारी पालिसी ये है कि सिर्फ़ RuPay क्रेडिट कार्ड को ही UPI से लिंक कर सकते हैं. अमेरिकी सरकार चाहती है कि मास्टर कार्ड और वीसा को भी ये फैसिलिटी मिले. यानी UPI ने जो cashless ट्रांजैक्शंस का जो मार्केट बनाया है उसमे इनको भी हिस्सा मिले.
आपको बता दें कि भारत के UPI की ही तरह, ब्राज़ील में भी उनका अपना डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. इसका नाम है पिक्स. अमेरिका को पिक्स से भी बहुत परेशानी है क्यों की वहाँ भी अमेरिकी क्रेडिट कार्ड कंपनियों का बिज़नेस चौपट हो चुका है. इसलिए अमेरिकन गवर्नमेंट ने जब ब्राज़ील पर 25% टैरिफ लगाया तो उसकी एक वजह पिक्स को भी बताया गया. और भारत की भी ट्रेड डील की बातचीत अभी चल ही रही है.
सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि UPI और अन्य डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर जानता कि भलाई की services हैं. और हमे इसे इसी तरह देखना चाहिए. इसके लिए अगर subsidy भी देनी हो तो इसमें कोई ग़लत बात नहीं है.
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