वैभव बोले- IPL में परिस्थिति के हिसाब से खेलना सीखा:अब फिटनेस पर ध्यान दूंगा; मैच के बाद शास्त्री-गावस्कर से बातचीत की
राजस्थान रॉयल्स के 15 साल के ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने कहा- 'इस सीजन में मैंने सीखा कि दबाव वाले मैचों में कैसे खेला जाता है। साथ ही परिस्थिति के हिसाब से अपने खेल को कैसे बदला जाता है।' वैभव रविवार को अहमदाबाद में फाइनल के बाद अवॉर्ड लेने पहुंचे थे। वैभव को टूर्नामेंट का 'मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर' (MVP) चुना गया। इस दौरान उन्होंने सुनील गावस्कर और स्टार स्पोर्ट्स के अन्य एक्सपर्ट्स के साथ बात-चीत की। वैभव ने कहा- हर मैच को एक ही मोड में नहीं खेल सकते वैभव ने कहा- 'आप हर मैच को एक ही मोड में नहीं खेल सकते। आपको खेल की स्थिति को पढ़ना होगा और जरूरत के अुनसार बल्लेबाजी करनी होगी। प्लेऑफ के मैचों में मुझे यह बात गहराई से सीखने को मिली।' 15 साल के वैभव ने क्वालिफायर-2 में गुजरात के खिलाफ अपने स्वाभाविक के विपरीज बल्लेबाजी की थी। उन्होंने 47 बॉल पर 96 रन बनाए थे। उन्होंने शुरुआती 2 विकेट जल्दी गंवाने के बाद रवींद्र जडेजा के साथ अर्धशतकीय साझेदारी करके पारी को संभाला था। हालांकि, वे अपनी टीम को फाइनल में नहीं पहुंचा सके थे। वैभव सूर्यवंशी की खास बातें- वैभव ने ऑरेंज कैप समेत 5 अवॉर्ड जीते वैभव ने 16 पारियों में 48.50 के औसत और 237.30 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए। इसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल रहे। वे इस सीजन के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे। उन्हें ऑरेंज कैप मिली। साथ ही उन्हें मोस्ट वैल्युएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर और सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन समेत कुल 5 अवॉर्ड मिले। इनसे उन्हें 40 लाख रुपए और एक कार मिली। वहीं, गुजरात के कगिसो रबाडा ने 29 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम की। -------------------------------------------------------------- IPL से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. बेंगलुरु लगातार दूसरी बार IPL चैंपियन; गुजरात को 5 विकेट से हराया रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने लगातार दूसरी बार IPL जीत लिया है। उसने रविवार को फाइनल में गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराया। विराट कोहली ने 18वें ओवर की आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टीम को जीत दिलाई। कोहली 75 रन पर नाबाद लौटे। विराट को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पढ़ें पूरी खबर 2. चैंपियन बेंगलुरु को ₹20 करोड़; गुजरात को ₹12.50 करोड़ मिले; वैभव को 5 अवॉर्ड रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने रविवार को IPL का खिताब अपने नाम कर लिया। टीम लगातार दूसरे सीजन चैंपियन बनी है। उसने अहमदाबाद में गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराया। चैंपियन बनने पर RCB को ट्रॉफी के साथ 20 करोड़ रुपए की प्राइज मनी मिली, जबकि रनर-अप गुजरात टाइटंस को 12.5 करोड़ रुपए से संतोष करना पड़ा। पढ़ें पूरी खबर 3. रजत ने फाइनल जीतने के बाद ट्रॉफी चूम ली; कोहली को गले लगाया RCB के कप्तान रजत पाटीदार ने ट्रॉफी उठाने से पहले उसे चूमकर अपनी खुशी जाहिर की। वहीं विराट कोहली ने कप्तान को गले लगाकर बधाई दी। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी जब अपना अवॉर्ड लेने मंच पर पहुंचे, तब स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। फाइनल में जीत के बाद खिलाड़ियों का परिवार के साथ जश्न और ट्रॉफी के साथ यादगार तस्वीरें जैसे कई पल IPL 2026 को हमेशा के लिए खास बना गए। आइए नजर डालते हैं सीजन के ऐसे ही 26 सबसे यादगार मोमेंट्स पर…पढ़ें पूरी खबर 4. कोहली की फास्टेस्ट फिफ्टी, सूर्यवंशी ने सीजन में सबसे ज्यादा 72 सिक्स लगाए; टॉप-15 रिकॉर्ड्स IPL 2026 रिकॉर्ड्स वाला सीजन साबित हुआ। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लगातार दूसरी बार ट्रॉफी जीतकर इतिहास रचा। कप्तान रजत पाटीदार ने महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा के खास क्लब में जगह बना ली। वे लगातार दो ट्रॉफी जीतने वाले तीसरे कप्तान बने। आइए नजर डालते हैं IPL 2026 के 15 सबसे बड़े रिकॉर्ड्स पर…पढ़ें पूरी खबर 5. बेंगलुरु को दोबारा चैंपियन बनाने वाले टॉप-5 फैक्टर; टीम में 8 मैच विनर 18 साल तक ट्रॉफी का इंतजार... फिर लगातार दो खिताब। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL में अपनी कहानी ही बदल दी है। जिस टीम को कभी 'अंडरअचीवर' कहा जाता था, वही अब लगातार दूसरी बार चैंपियन बन गई है। RCB के टाइटल जीतने के 5 फैक्टर्स…पढ़ें पूरी खबर
‘हमारे पहलवान मजबूत, लेकिन तकनीकी रूप से पीछे’:भारत के कुश्ती कोच बोले- मुझे 40 मेहनती चाहिए, जो देश के लिए कुछ करें
‘हमारे खिलाड़ी शारीरिक रूप से बहुत मजबूत हैं, लेकिन वे तकनीकी रूप से पिछड़ जाते हैं। अमन जैसे बेहतरीन पहलवान भी जब मैच हारते हैं, तो वह विरोधी के बेहतर होने से नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी गलतियों की कमी के कारण हारते हैं। मैं 4 कनेक्टिंग फ्लाइट बदलकर यहां आया। थक गया हूं। ऐसे ही खिलाड़ी भी थक जाते हैं।’ यह कहना है भारतीय पुरुष की फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के मुख्य कोच एमजारियोस बेंटिनिडिस (शाको) का। मुख्य कोच बनने के बाद शाको भारत लौटते तो 31 मई, रविवार को लखनऊ में चल रहे एशियन गेम्स के ट्रायल में पहुंचे। दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने उनसे बातचीत की। उन्होंने अनुशासन, पहलवानों की कमियों और भारतीय कोचिंग सिस्टम पर बेबाकी से अपनी राय रखी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 'यहां की यात्रा व्यवस्था पर कुश्ती संघ से बात करूंगा' शाको ने लखनऊ में कैंप होने और यहां की यात्रा व्यवस्था पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा- मैं इस बारे में भारतीय कुश्ती संघ (WFI) से बात करूंगा। मैं खुद जॉर्जिया से 17 घंटे की फ्लाइट और 4 कनेक्टिंग फ्लाइट्स बदलकर आया हूं। थक चुका हूं। एक पहलवान की भी ऊर्जा ऐसे यात्रा में खपेगी तो वह कैसे जीतेगा? इतनी लंबी और थकाऊ यात्रा करके प्रतियोगिता में जाएगा, तो वह जीतने की ऊर्जा कहां से लाएगा? दिल्ली से फ्लाइट्स कनेक्ट करना ज्यादा आसान है। ‘देश के लिए जान लगाने वाले 40 एथलीट चाहिए’ शाको ने कहा- मेरे लिए अनुशासन से बढ़कर कुछ नहीं है। मुझे कैंप में 300 ऐसे एथलीट नहीं चाहिए जो गंभीर न हों। मुझे सिर्फ 40 ऐसे मेहनती पहलवान चाहिए जो देश के लिए कुछ करना चाहते हों। कुछ खिलाड़ी दूसरों को भी भटकाते हैं, वह सब अब मेरे रहते नहीं चलेगा। पहलवान खुद की गलतियों से हारते हैं, प्रतिभा की कमी नहीं है। 'ट्रेनिंग प्रोग्राम में बदलाव जरूरी' हर वजन श्रेणी (जैसे 50 किलो या 55 किलो) के खिलाड़ी के लिए एक ही ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं हो सकता। हर खिलाड़ी की मानसिक और शारीरिक जरूरत के हिसाब से अलग ट्रेनिंग होगी। 74 किलो, 97 किलो और 125 किलो जैसी भारी वजन श्रेणियों में भारत के खराब प्रदर्शन पर कहा कि भूल जाइए कि हम भारी वजन में कमजोर हैं। जब आप रोज-रोज कहेंगे कि हमें समस्या है, तो खिलाड़ी के दिमाग में डर बैठ जाता है। हम समस्या पर नहीं, सिर्फ जीतने और समाधान पर बात करेंगे। 'सुजीत के खेल में शानदार संतुलन' शाको ने ओलंपिक पर कहा कि सुशील- बजरंग के बाद अब सुजीत कलकल की बारी है, लेकिन ओलंपिक अलग दुनिया है। 65 किलोग्राम वर्ग में देश के उभरते सितारे सुजीत की तारीफ करते हुए कहा कि सुजीत अद्भुत खिलाड़ी हैं। सुजीत में ताकत, तकनीक और डिफेंस का शानदार मिश्रण है। सुशील कुमार अपने समय के सर्वश्रेष्ठ पहलवान थे, वे दिल से बाघ थे। उनके बाद बजरंग आए और अब सुजीत हैं। सुजीत अंडर-23 विश्व चैंपियन हैं, लेकिन ओलंपिक एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई है। दुनिया में 6-6 बार के विश्व चैंपियन भी ओलंपिक में एक छोटी सी गलती वजन न घटाने के कारण पदक से चूक जाते हैं। इसलिए सुजीत को कदम-कदम पर मेरी गाइडेंस की जरूरत होगी। बजरंग के पदक को भगवान का आशीर्वाद बताया बजरंग पुनिया के साथ उनके सफर के अंत पर कोच शाको भावुक दिखे। उन्होंने कहा दुनिया का कोई ऐसा कोच या पहलवान यहां तक कि अब्दुलराशिद सादुलेव भी नहीं थे, जो 4 साल में कभी न हारा हो। कजाकिस्तान में बजरंग के साथ रेफरी ने बेइमानी की। ओलंपिक से ठीक पहले उन्हें बहुत गंभीर चोट लगी थी। बावजूद इसके हमें जो कांस्य पदक मिला, वह भगवान का भेजा हुआ आशीर्वाद था। इतिहास सिर्फ ओलंपिक पदक से बनता है और बजरंग ने वह बनाया। ------------------------ यह खबर भी पढ़िए- अमन, दीपक और सुजीत ने एशियन गेम्स किया क्वालीफाई : जापान में खेला जाएगा, कुश्ती में फ्री स्टाइल और ग्रीकोरोमन टीम घोषित लखनऊ स्थित साई सेंटर में रविवार को एशियन गेम्स-2026 के लिए कुश्ती का ट्रायल हुआ। फ्री स्टाइल और ग्रीकोरोमन वर्ग की भारतीय टीम घोषित कर दी गई। करीब 10 घंटे तक चले मैराथन ट्रायल में देशभर के चुनिंदा पहलवानों ने अपनी ताकत और तकनीक का प्रदर्शन किया। ट्रायल में जीते पहलवान एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। (पूरी खबर पढ़िए)
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