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Fact Check: वाराणसी में सेक्स रैकेट की छापेमारी के नाम पर बिहार का वीडियो वायरल

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें चेहरा ढकी हुई युवतियों को पुलिस पकड़कर ले जाते हुए दिख रही है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रहीं लड़कियां सेक्स […]

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Independence Day 2026: चेहरे पर तिरंगा बनाने का प्लान कर रहे हैं? जान लें पहले सही तरीका और जरूरी नियम

Flag Paint on Face on Independence Day: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लोग तिरंगे फहराते हैं. कुछ लोग तिरंगा अपने फेस पर भी बनवाते हैं. हालांकि, ऐसा करने पर कोई मनाही नहीं है लेकिन कुछ नियमो का पालन करना होता है. दरअसल, तिरंगा भारतवासियों के लिए सर्वोपरी होता है. इसका मान-सम्मान बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है. तिरंगे को कभी भी शरीर के ऐसे हिस्से पर नहीं बनवाना चाहिए, जहां से उसके सम्मान पर आंच आए. वहीं, जो महिलाएं तिरंगे से मेकअप करने वाली हैं उन्हें भी रंगों और उसके क्रम का खास ध्यान देने की जरूरत है. कई बातों पर विशेष रूप से ध्यान रखना होता है. आइए जानते हैं 15 अगस्त के मौके पर फेस पर तिरंगा बनाने के सही तरीके और नियमों के बारे में.

क्या चेहरे पर तिरंगा बना सकते हैं?

चेहरे पर तिरंगे के रंगों से फेस पेंट करना और राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल करना एक जैसी बात नहीं होती है. भारत के Flag Code of India, 2002 में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसके प्रदर्शन को लेकर नियम निर्धारित किए गए हैं. इसलिए, चेहरे पर रंग लगाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि तिरंगे का अपमान या गलत प्रस्तुति न हो.

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फेस पर तिरंगा बनाने के नियम

  • फेस पर तिरंगा पेंट करते समय चेहरे पर केसरिया, सफेद और हरे रंगों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना व्यक्त करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसे इस तरह नहीं बनाया जाना चाहिए कि राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा प्रभावित हो.
  • तिरंगे के रंग लगाते समय आपको रंगों के क्रम को सही रखना होता है. सबसे पहले केसरिया, फिर सफेद और अंत में हरा रंग लगाएं. इसके बीच में अशोक चक्र होता है. इस चिन्ह की गरिमा को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है. 
  • आमतौर पर जब चेहरे पर तिरंगा बनाया जाता है तो उसमें बीच में अशोक चक्र नहीं चिन्हित किया जाता है.

चेहरे या शरीर पर इस तरन न बनाएं तिरंगा

शरीर पर तिरंगा बनाने वाले हैं तो ध्यान रहे कि कमर से नीचे के शरीर में ध्वज नहीं बनवाते हैं.

चेहरे पर ध्वज बनाने वाले हैं तो आपको उसके बाद मुंह धोते हुए या पसीना आते समय भी ध्यान रखना चाहिए कि रंग निकलकर जमीन पर न आ जाए. ऐसी स्थिति में चेहरे को रूमाल से साफ कर सकते हैं. अंत में इसे सही तरीके से पानी और रूमाल या फेस वाइप्स की मदद से साफ करना चाहिए.

तिरंगा स्टिकर लगाने के नियम

आजकल तिरंगे के छोटे-छोटे स्टिकर्स भी मिलने लगे हैं. लोग इन्हें भी गालों पर चिपकाते हैं. अगर आप ऐसा कुछ करने वाले हैं तो ध्यान रहे कि फेस से निकलकर स्टिकर फर्श में या कुड़े में न जाएं. उसे फाड़ना नहीं चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि किसी के पैर के नीचे तिरंग न आ सके.

प्लास्टिक के तिरंगे लगाने से बचें

15 अगस्त के दौरान बाजार में छोटे-छोटे प्लास्टिक के तिरंगे भी बड़ी संख्या में मिलते हैं. राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बनाए रखने के लिए लोगों को ऐसे तिरंगों को इस्तेमाल करने के बाद सड़क, कूड़ेदान या जमीन पर फेंकने से बचना चाहिए. यदि तिरंगा इस्तेमाल किया है तो उसका सम्मानपूर्वक निपटारा करें. मगर सलाह दी जाती है कि ऐसे ध्वज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

तिरंगा मेकअप करते समय इन बातों का ख्याल रखें

तिरंगा बनाने के लिए चेहरे पर पेंट का इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपका स्किन कंसर्न क्या है? आप तिरंगा पेंट करने के लिए ऑयल पेंटिंग कलर, फैब्रिक पेंटिंग कलर या फिर पोस्टर कलर्स का यूज कर रहे हैं तो ये स्किन के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. इससे हमारी त्वचा खराब हो सकती है. इसलिए, आपको तिरंगा पेंट करने के लिए अच्छे मेकअप और कलरफुल शेड्स की जरूरत है. मेकअप करने से पहले स्किन पर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, खुजली, लालिमा या सूजन जैसी समस्या महसूस हो तो उसे चेहरे पर इस्तेमाल न करें. आंखों में कलर न जाए, इस बात का खासतौर पर ध्यान दें. अगर फेस पर कहीं कट लगा है, चोट या खरोंच है तो वहां मेकअप अप्लाई न करें. कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से उस जगह पर जलन बढ़ सकती है.

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  Sports

Galle Test: टीम इंडिया के सामने Playing 11 की पहेली, 3 स्पिनर या पेसर्स पर कोच Morne Morkel का बड़ा बयान

गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले पहले टेस्ट से दो दिन पहले सबसे ज्यादा चर्चा पिच को लेकर हो रही है। आमतौर पर गॉल की पिच को स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। पिच पर जमकर पानी डाला गया है और फिलहाल यह सूखी या पहले ही दिन से गेंद को तेजी से घुमाने वाली सतह नहीं दिख रही है।

भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने भी पिच को अच्छी बताया है। उनका मानना है कि मैच आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव आएगा और गेंदबाजों को बाद के दिनों में अधिक मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम ने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयारी की है और अब सबसे जरूरी चीज मानसिक मजबूती, लंबे समय तक बल्लेबाजी करना और सही जगह पर गेंद डालना है।

मोर्केल के मुताबिक, अगर भारत पहले बल्लेबाजी करता है तो उसे बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा। वहीं पहले गेंदबाजी करने की स्थिति में गेंदबाजों को लगातार सही क्षेत्र में गेंद डालकर दबाव बनाना होगा। उनका मानना है कि गॉल में परंपरागत तौर पर पहले दो दिन बल्लेबाजों के लिए बेहतर होते हैं, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम के लिए फैसला काफी अहम रहेगा।

यही स्थिति भारतीय टीम के सामने अंतिम ग्यारह को लेकर भी बड़ी पहेली खड़ी कर रही है। तीन स्पिन गेंदबाजों के साथ उतरना फिलहाल ज्यादा मजबूत विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इससे टीम को बल्लेबाजी में भी गहराई मिलती है। हेड कोच गौतम गंभीर आमतौर पर गेंदबाजी संयोजन के लिए बल्लेबाजी की मजबूती से समझौता करना पसंद नहीं करते हैं।

मौजूदा समीकरण में रवींद्र जडेजा प्रमुख हरफनमौला खिलाड़ी के तौर पर लगभग तय माने जा रहे हैं, जबकि मोहम्मद सिराज तेज गेंदबाजी की अगुआई कर सकते हैं। कुलदीप यादव का खेलना भी लगभग तय माना जा रहा है। दूसरे तेज गेंदबाज के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ के बीच मुकाबला है, जिसमें प्रसिद्ध कृष्णा फिलहाल थोड़ा आगे दिखाई दे रहे हैं।

मोर्ने मोर्केल ने कहा कि कुलदीप यादव आक्रामक गेंदबाज हैं, जबकि रवींद्र जडेजा अपने अनुभव और सटीक गेंदबाजी के कारण बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनके मुताबिक तीनों की गेंदबाजी शैली अलग है और जरूरत के हिसाब से कप्तान शुभमन गिल उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।

गौरतलब है कि गॉल में पिछला टेस्ट जून 2025 में श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेला गया था। उस मुकाबले में दोनों टीमों ने 450 से ज्यादा रन के स्कोर बनाए थे। चार शतक और चार अर्धशतक भी लगे थे। श्रीलंका के प्रमुख स्पिनर प्रभात जयसूर्या पहली पारी में 48 ओवर गेंदबाजी करने के बावजूद एक भी विकेट नहीं ले सके थे और दूसरी पारी में भी उन्हें केवल एक विकेट मिला था।

भारत ए की पिछले महीने इसी मैदान पर हुई दो मुकाबलों की श्रृंखला से भी बल्लेबाजों के लिए अच्छी परिस्थितियों के संकेत मिले थे। तेज गेंदबाजों को भी यहां गेंदबाजी में मदद मिली थी। गुरनूर बराड़ ने दूसरे मुकाबले में 10 विकेट लेकर खासा प्रभावित किया था। उन्होंने अगस्त के पहले सप्ताह में टीम से जुड़ने के बाद अभ्यास में लगातार तेज गेंदबाजी की है और टेस्ट पदार्पण के करीब पहुंच गए हैं।

हालांकि, फिलहाल उनका इंतजार थोड़ा और बढ़ सकता है। गॉल में मुकाबला शुरू होने से पहले सभी की नजर टॉस पर रहेगी। इस मैदान पर हाल के वर्षों में पहली और चौथी पारी के स्कोर में बड़ा अंतर देखने को मिला है। ऐसे में पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर बनाना भारत और श्रीलंका दोनों के लिए सफलता का सबसे अहम मंत्र हो सकता है, क्योंकि जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ेगा, स्पिनरों के लिए पिच पर गेंद पकड़ने और ज्यादा घूमने की संभावना बढ़ सकती है।
Fri, 14 Aug 2026 20:32:26 +0530

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