'मेरे अंडरआर्म्स सूंघते हैं और...', गौहर खान के साथ अजीब हरकत करते हैं जैद दरबार, एक्ट्रेस ने खोली पति की पोल
Gauahar Khan on Zaid Darbar: बॉलीवुड और टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस गौहर खान इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में हैं. एक्ट्रेस हाल ही में अपने पति और डांसर-कोरियोग्राफर जैद दरबार के साथ चैट शो ‘डबल डेट’ में पहुंचीं. इस शो को एक्ट्रेस नेहा धूपिया और उनके पति अंगद बेदी होस्ट करते हैं. शो के दौरान गौहर और जैद ने अपनी पहली मुलाकात, उम्र के अंतर और शादीशुदा जिंदगी से जुड़े कई मजेदार किस्से शेयर किए.
इसी बातचीत के दौरान गौहर खान ने पति जैद दरबार की एक ऐसी अजीब आदत का खुलासा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए. गौहर ने बताया कि जैद को उनके अंडरआर्म्स छूने और उन्हें सूंघने की आदत है. इतना ही नहीं, जैद को उनकी खुशबू इतनी पसंद है कि वो इस बात का जिक्र अपनी बहन के सामने भी कर देते हैं. चलिए हम आपको इसके बारे में सब कुछ डिटेल में बताते हैं.
गौहर ने बताया जैद की अजीब आदत
चैट शो के दौरान जब कपल से एक-दूसरे की अजीब आदतों के बारे में पूछा गया तो गौहर ने जैद की एक खास आदत का खुलासा किया. गौहर ने बताया कि जैद को उनके अंडरआर्म्स छूने और सूंघने की आदत है. एक्ट्रेस के मुताबिक, जैद को लगता है कि उनके अंडरआर्म्स से हमेशा अच्छी खुशबू आती है और इसी वजह से वो बिना किसी झिझक के ऐसा करते हैं. गौहर ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जैद सिर्फ खुद ही ऐसा नहीं करते, बल्कि कभी-कभी अपनी बहन को भी ये बताने लगते हैं कि उनकी पत्नी से कितनी अच्छी खुशबू आ रही है. एक्ट्रेस के मुताबिक, जैद कहते हैं कि उनके अंडरआर्म्स हमेशा फ्रेश महकते हैं और उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं होती कि इस हरकत को देखकर सामने वाला क्या सोचेगा.
‘देख कितनी अच्छी खुशबू आ रही है’
गौहर ने इस पूरे वाकये को याद करते हुए बताया कि जैद कभी-कभी अपनी बहन से भी कहते हैं, ‘देख कितनी अच्छी खुशबू आ रही है.’ जैद की इस हरकत पर उनकी बहन का रिएक्शन भी काफी मजेदार होता है. गौहर के मुताबिक, जैद की बहन उन्हें देखकर कहती हैं, ‘तुम दोनों क्या बकवास कर रहे हो?’ वहीं शो में गौहर ने ये किस्सा हंसते हुए सुनाया.
कोविड के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
शो में गौहर और जैद ने अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी सुनाया. दोनों ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात कोविड-19 महामारी के दौरान हुई थी. गौहर के मुताबिक, दोनों की मुलाकात एक सुपरमार्केट में हुई थी. उस समय शायद ही दोनों ने सोचा होगा कि ये छोटी सी मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल जाएगी और दोनों शादी कर लेंगे. सुपरमार्केट में मुलाकात के बाद जैद ने सोशल मीडिया पर गौहर से संपर्क करने की कोशिश की. उन्होंने एक्ट्रेस को इंस्टाग्राम पर डीएम किया.
जैद ने इंस्टाग्राम पर किया था डीएम
जैद ने गौहर को इंस्टाग्राम पर मैसेज करते हुए लिखा था, ‘हाय, मेरे पास तुम्हें बताने के लिए कुछ बहुत जरूरी बात है.’ इस मैसेज ने गौहर का ध्यान अपनी ओर खींचा. हालांकि, शुरुआत में दोनों की बातचीत बिल्कुल नार्मल तरीके से शुरू हुई थी. धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे और उनकी दोस्ती रिश्ते में बदल गई. गौहर और जैद ने अपने रिश्ते को ज्यादा समय तक छिपाकर नहीं रखा और जल्द ही दोनों की डेटिंग की खबरें सामने आने लगीं.
उम्र को लेकर हुई थी गलतफहमी
शो में कपल ने अपनी उम्र के अंतर को लेकर भी खुलकर बात की. गौहर ने बताया कि जब उनकी जैद से बातचीत शुरू हुई थी, तब जैद ने अपनी उम्र 24-25 साल के आसपास बताई थी. ये सुनकर गौहर को लगा कि दोनों के बीच उम्र का अंतर काफी ज्यादा है. एक्ट्रेस ने जैद से बातचीत बंद करने के लिए भी कह दिया था. लेकिन जैद इस रिश्ते को लेकर गंभीर थे. इसलिए उन्होंने गौहर को अपनी असली उम्र साबित करने के लिए अपना पासपोर्ट तक भेज दिया.
जैद ने चैट में भेज दी थी पासपोर्ट की फोटो
गौहर ने बताया कि जैद ने घबराकर उन्हें अपने पासपोर्ट की तस्वीर भेज दी थी. पासपोर्ट देखने के बाद गौहर को पता चला कि जैद की उम्र उतनी कम नहीं थी, जितनी उन्होंने पहले बताई थी. जैद रियल में 29 साल के थे. इस खुलासे के बाद दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और उनका रिश्ता मजबूत होता गया.
उम्र को लेकर खबरों से नाराज हैं गौहर
गौहर खान ने शो में अपनी उम्र को लेकर मीडिया में लिखी जाने वाली खबरों पर भी नाराजगी जताई. एक्ट्रेस ने कहा कि अक्सर उनकी और जैद की उम्र गलत तरीके से बताई जाती है. उन्होंने बताया कि कई जगह दोनों की उम्र 30 और 42 साल लिखी जाती है, जिसके आधार पर उनके बीच 12 साल का एज गैप बताया जाता है. गौहर ने साफ किया कि ये जानकारी सही नहीं है. उनके मुताबिक, दोनों की उम्र में करीब 7 साल का अंतर है.
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पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एफएसएसएआई को फटकारा
नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने अधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लागू करने में देरी को लेकर गुरुवार को केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से अदालत के पहले के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। पीठ ने सवाल किया कि सरकार सख्त पोषण संबंधी चेतावनियां लागू करने से क्यों हिचक रही है और अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा।
पीठ ने एफएसएसएआई से पूछा, क्या आप नहीं चाहते कि इस देश के लोग, खासकर बढ़ते बच्चे, स्वस्थ रहें?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह सामान्य जानकारी होती है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में चीनी, वसा और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, लेकिन पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी होने से उन्हें उत्पाद खरीदने से पहले बेहतर और सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
अदालत ने चेतावनी लेबल से निर्माताओं के कारोबार पर असर पड़ने की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि किसी उत्पाद को खरीदना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला उपभोक्ता का होता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक हितों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
पीठ ने कहा, यह नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। निर्माता ऐसे मामलों में नीति तय नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी विशेष उत्पाद को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को इस बात की पूरी जानकारी हो कि वे क्या खा रहे हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र ने दलील दी थी कि पैकेजिंग और पोषण संबंधी चेतावनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था बनाने में व्यावहारिक चुनौतियां हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि भारत मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों में देरी के लिए विदेशी मानकों का हवाला नहीं दे सकता।
अदालत ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए और कमजोर नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को तय करना होगा कि वह प्रस्तावित लेबलिंग व्यवस्था को स्वेच्छा से लागू करती है या फिर न्यायिक निर्देश का सामना करती है।
पीठ ने इसे सरकार का अंतिम अवसर बताते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वह मामले में अपना फैसला सुना देगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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