दुनिया में एआई तकनीक को लेकर निवेश का दौर लगातार तेज हो रहा है और अब इसका असर एशियाई बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा जुटाई जाने वाली नई पूंजी का फायदा एशिया की तकनीकी और विनिर्माण कंपनियों को मिल सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरिक्ष तकनीक कंपनी स्पेसएक्स, एआई आधारित कंपनी ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां बड़े स्तर पर धन जुटाने की तैयारी में हैं। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इन कंपनियों के जरिए आने वाले समय में एआई से जुड़े ढांचागत विकास पर भारी निवेश किया जाएगा। इसका सीधा लाभ उन कंपनियों को मिल सकता है जो सर्वर, अर्धचालक, ऊर्जा उपकरण, शीतलन प्रणाली और विशेष तकनीकी सामग्री तैयार करती हैं।
गौरतलब है कि एआई तकनीक को लेकर पहले से ही दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। अनुमान है कि प्रमुख तकनीकी कंपनियों द्वारा 750 अरब डॉलर से अधिक का निवेश पहले ही घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा स्पेसएक्स, ओपनएआई और एंथ्रोपिक की प्रस्तावित पूंजी जुटाने की योजनाओं से करीब 70 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश बाजार में आ सकता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस निवेश का असर एशिया की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल कंपनियों पर सबसे ज्यादा दिखाई दे सकता है। हाल के महीनों में कई एशियाई चिप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माता कंपनियों ने बेहतर मुनाफा दर्ज किया है। इसकी वजह कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से जुड़ी मांग में तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।
दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रो-मैकेनिक्स और जापान की इबिडेन जैसी कंपनियां इस वर्ष एशियाई शेयर बाजारों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल रही हैं। वहीं जापान की टोटो लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि वह चिप निर्माण उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली विशेष सिरेमिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एआई तकनीक के कारण अर्धचालक उद्योग में मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि आपूर्ति श्रृंखला के कई हिस्सों में दबाव दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे नई पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, यह स्थिति और गहरी हो सकती है।
निवेश प्रबंधकों का कहना है कि अब निवेशक केवल बड़ी चिप कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे उन कंपनियों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें एआई तकनीक के विस्तार से सीधे लाभ मिलेगा और जिनकी आय में अभी और बढ़ोतरी की संभावना है।
ताइवान की होन हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री, क्वांटा कंप्यूटर और मीडियाटेक जैसी कंपनियों को भी संभावित लाभार्थियों में गिना जा रहा है। ये कंपनियां सर्वर निर्माण और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
गौरतलब है कि ऊर्जा क्षेत्र को भी एआई तकनीक के विस्तार का बड़ा लाभ मिल सकता है। बड़ी संख्या में डेटा केंद्र स्थापित होने के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से जुड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ रहा है।
दक्षिण कोरिया की एचडी हुंडई एनर्जी सॉल्यूशंस और डेवू इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियों के शेयरों में भी इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़त देखी गई है। वहीं भारत में अडानी समूह की हरित ऊर्जा आधारित डेटा केंद्र परियोजनाओं को भी निवेशकों की नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि अगर भविष्य में एआई तकनीक से अपेक्षित मांग नहीं बनी, तो कंपनियां निवेश घटा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त ढांचागत क्षमता और ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों का मानना है कि एआई तकनीक से जुड़ा निवेश चक्र अभी कई वर्षों तक जारी रहने की संभावना है।
दुनिया में एआई तकनीक को लेकर निवेश का दौर लगातार तेज हो रहा है और अब इसका असर एशियाई बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका की कई बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा जुटाई जाने वाली नई पूंजी का फायदा एशिया की तकनीकी और विनिर्माण कंपनियों को मिल सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरिक्ष तकनीक कंपनी स्पेसएक्स, एआई आधारित कंपनी ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियां बड़े स्तर पर धन जुटाने की तैयारी में हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन कंपनियों के जरिए आने वाले समय में एआई से जुड़े ढांचागत विकास पर भारी निवेश किया जाएगा। इसका सीधा लाभ उन कंपनियों को मिल सकता है जो सर्वर, अर्धचालक, ऊर्जा उपकरण, शीतलन प्रणाली और विशेष तकनीकी सामग्री तैयार करती हैं।
गौरतलब है कि एआई तकनीक को लेकर पहले से ही दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं। अनुमान है कि प्रमुख तकनीकी कंपनियों द्वारा 750 अरब डॉलर से अधिक का निवेश पहले ही घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा स्पेसएक्स, ओपनएआई और एंथ्रोपिक की प्रस्तावित पूंजी जुटाने की योजनाओं से करीब 70 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश बाजार में आ सकता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस निवेश का असर एशिया की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल कंपनियों पर सबसे ज्यादा दिखाई दे सकता है। हाल के महीनों में कई एशियाई चिप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माता कंपनियों ने बेहतर मुनाफा दर्ज किया है। इसकी वजह एआई तकनीक से जुड़ी मांग में तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।
दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रो-मैकेनिक्स और जापान की इबिडेन जैसी कंपनियां इस वर्ष एशियाई शेयर बाजारों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल रही हैं। वहीं जापान की टोटो लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि वह चिप निर्माण उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली विशेष सिरेमिक सामग्री उपलब्ध कराती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार एआई तकनीक के कारण अर्धचालक उद्योग में मांग इतनी तेजी से बढ़ी है कि आपूर्ति श्रृंखला के कई हिस्सों में दबाव दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे नई पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा, यह स्थिति और गहरी हो सकती है।
निवेश प्रबंधकों का कहना है कि अब निवेशक केवल बड़ी चिप कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे उन कंपनियों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें एआई तकनीक के विस्तार से सीधे लाभ मिलेगा और जिनकी आय में अभी और बढ़ोतरी की संभावना है।
ताइवान की होन हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री, क्वांटा कंप्यूटर और मीडियाटेक जैसी कंपनियों को भी संभावित लाभार्थियों में गिना जा रहा है। ये कंपनियां सर्वर निर्माण और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
गौरतलब है कि ऊर्जा क्षेत्र को भी एआई तकनीक के विस्तार का बड़ा लाभ मिल सकता है। बड़ी संख्या में डेटा केंद्र स्थापित होने के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से परमाणु ऊर्जा, सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से जुड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ रहा है।
दक्षिण कोरिया की एचडी हुंडई एनर्जी सॉल्यूशंस और डेवू इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियों के शेयरों में भी इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़त देखी गई है। वहीं भारत में अडानी समूह की हरित ऊर्जा आधारित डेटा केंद्र परियोजनाओं को भी निवेशकों की नजर से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि अगर भविष्य में एआई तकनीक से अपेक्षित मांग नहीं बनी, तो कंपनियां निवेश घटा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त ढांचागत क्षमता और ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों का मानना है कि एआई तकनीक से जुड़ा निवेश चक्र अभी कई वर्षों तक जारी रहने की संभावना है।
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