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‘देवदास’ के ‘डोला रे डोला’ गाने की शूटिंग के दौरान 4 महीने की प्रेग्नेंट थीं Madhuri Dixit ? एक्ट्रेस ने 24 साल बाद बताई सच्चाई

Madhuri Dixit on Devdas Song: 'देवदास' फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म की भव्यता, दमदार अभिनय, शानदार म्यूजिक और इमोशनल कहानी ने इसे एक क्लासिक का दर्जा दिलाया. शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन और माधुरी दीक्षित की अदाकारी ने फिल्म को खास बनाया था. वहीं फिल्म का लोकप्रिय गाना 'डोला रे डोला' आज भी दर्शकों की पसंदीदा लिस्ट में शामिल है.

इस गाने में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय बच्चन की शानदार जुगलबंदी देखने को मिली थी. दोनों अभिनेत्रियों के डांस, जेस्चर और स्क्रीन प्रेजेंस की जमकर सराहना हुई थी. हालांकि, फिल्म की रिलीज के समय इस गाने को लेकर एक और चर्चा भी खूब हुई थी. उस दौरान ऐसी अफवाहें सामने आई थीं कि ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के समय माधुरी दीक्षित प्रेग्नेंट थीं. कई सालों तक ये चर्चा लोगों के बीच बनी रही, लेकिन एक्ट्रेस ने इस विषय पर कभी खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी. इसी बीच अब लगभग 24 साल बाद माधुरी दीक्षित ने इन अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी है और साफ शब्दों में स्थिति स्पष्ट कर दी है.

इंटरव्यू में पूछा गया सवाल

हाल ही में माधुरी दीक्षित ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने करियर और फिल्मी सफर से जुड़े कई पहलुओं पर बातचीत की. इसी दौरान उनसे दिवंगत मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान की सहयोगी रुबीना खान के उस दावे के बारे में पूछा गया, जिसमें कहा गया था कि ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के दौरान माधुरी चार महीने की गर्भवती थीं. इस सवाल का जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने बेहद सहज अंदाज में कहा, “आरिन का जन्म 2003 में हुआ था, तो आप खुद हिसाब लगा लीजिए.” माधुरी का ये जवाब काफी हद तक उन सभी अफवाहों को खत्म करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है, जो वर्षों से इस गाने की शूटिंग के दौरान उनकी कथित प्रेग्नेंसी को लेकर फैली हुई थीं.

समयरेखा से स्पष्ट होती है सच्चाई

माधुरी दीक्षित के बड़े बेटे Arin Nene का जन्म 17 मार्च 2003 को हुआ था. दूसरी ओर, फिल्म ‘देवदास’ 12 जुलाई 2002 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इससे पहले 23 मई 2002 को इसका प्रीमियर कांन्स फिल्म फेस्टिवल में भी किया गया था. इन तारीखों को देखते हुए ये स्पष्ट हो जाता है कि ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के दौरान माधुरी के चार महीने की गर्भवती होने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं बैठता. एक्ट्रेस ने भी इसी ओर इशारा करते हुए अफवाहों को खारिज किया.

शूटिंग के दौरान तबीयत जरूर हुई थी खराब

हालांकि, माधुरी ने ये स्वीकार किया कि ‘देवदास’ की शूटिंग के दौरान उनकी तबीयत कुछ समय के लिए खराब हो गई थी. उन्होंने बताया कि उस दौर में उनका शेड्यूल बेहद व्यस्त था और लगातार सफर करने के कारण उन्हें थकान महसूस होती थी. एक्ट्रेस ने कहा कि वो उस समय लगातार एक जगह से दूसरी जगह आ-जा रही थीं. शूटिंग का ज्यादा काम रात के समय होता था, जिसके कारण उनके लिए पर्याप्त आराम कर पाना मुश्किल हो जाता था. इसी वजह से उनकी तबीयत थोड़ी खराब हो गई थी. माधुरी ने स्पष्ट किया कि उनकी तबीयत में आई ये परेशानी सामान्य थी और इसका किसी प्रेग्नेंसी से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने कहा कि वो केवल अत्यधिक व्यस्तता और लगातार यात्रा की वजह से थकान महसूस कर रही थीं.

‘डोला रे डोला’ बना था फिल्म की पहचान

‘देवदास’ के कई गाने लोकप्रिय हुए थे, लेकिन ‘डोला रे डोला’ को विशेष रूप से दर्शकों का प्यार मिला. इस गाने में माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय बच्चन ने पहली बार बड़े स्तर पर साथ डांस किया था. दोनों की प्रेजेंटेशन ने दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया था.

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पंजाब सरकार ने की ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने की रूपरेखा मंजूर, 65 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी होंगे नियमित

Punjab News: पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने राज्य के हजारों कच्चे कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य कैबिनेट की ताजा बैठक में दशकों पुरानी और शोषणकारी मानी जाने वाली ठेकेदारी रोजगार व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त करने का फैसला किया गया है.

65 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ

सरकार के इस कदम से विभिन्न सरकारी विभागों में काम कर रहे 65 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा. मुख्यमंत्री की अगुवाई में हुई इस बैठक में कर्मचारियों को नियमित रोजगार के रास्ते पर लाने वाले महत्वपूर्ण प्रस्तावों और दो नए विधेयकों को हरी झंडी दिखाई गई है. इस फैसले के बाद अब निजी ठेकेदारों या बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी और कर्मचारियों का सीधा संबंध सरकार से स्थापित होगा.

ठेकेदारी प्रथा का अंत और नए विधेयकों को मंजूरी

कैबिनेट की बैठक में 'पंजाब स्टेट आउटसोर्स पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026' को मंजूरी दी गई है. इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को सीधे सरकारी व्यवस्था के दायरे में लाना है. इसके साथ ही सरकार ने साल 2016 के पुराने कर्मचारी कल्याण अधिनियम को पूरी तरह से निरस्त करने का निर्णय लिया है, जो अब तक प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रहा था. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के हजारों युवाओं और कर्मचारियों ने बरसों तक बेहद कम वेतन पर सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं. अब समय आ गया है कि उनके अधिकारों की रक्षा की जाए और उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराया जाए.

5 साल की सेवा पर सीधा सरकारी अनुबंध

सरकार की नई नीति के अनुसार, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के वे सभी आउटसोर्स कर्मचारी जिन्होंने लगातार पांच साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सीधे सरकारी अनुबंध यानी कांट्रैक्ट के तहत लाया जाएगा. इसके अलावा, जो कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, उनके प्रति नरम रुख अपनाते हुए सरकार ने इस अवधि को कम करके केवल तीन साल निर्धारित किया है. नए नियमों के मुताबिक, सरकारी अनुबंध के तहत जब कोई कर्मचारी दस साल की सेवा पूरी कर लेगा, तो उसे विभाग में स्वीकृत रिक्त पदों के खिलाफ पूरी तरह से नियमित यानी पक्का करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. इस पूरी योजना से राज्य के 51 अलग-अलग विभागों में कार्यरत कुल 65,048 कर्मचारियों को सीधा फायदा होने की उम्मीद है.

जोखिम वाले कामों में लगे कर्मियों को प्राथमिकता

मान सरकार ने इस नीति में उन कर्मचारियों को विशेष प्राथमिकता दी है जो विपरीत और खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं. इनमें मुख्य रूप से फायर सर्विस के जांबाज कर्मी, बिजली विभाग के लाइनमैन, सीवर की सफाई करने वाले जांबाज, शहरी निकायों के सफाई कर्मचारी, कचरा प्रबंधन से जुड़े लोग और फील्ड में काम करने वाला शिकायत निवारण स्टाफ शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इन लोगों ने समाज और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है, इसलिए इन्हें सबसे पहले सुरक्षा मिलनी चाहिए. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारी, स्थानीय निकाय विभाग के 8,436 कर्मचारी और स्कूल शिक्षा विभाग के 7,704 कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य, परिवहन और कृषि विभागों के कर्मचारी भी इस दायरे में आएंगे.

वेतन और सुविधाओं की पूरी गारंटी

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को कई अन्य बड़ी सहूलियतें भी मिलेंगी. अब ठेकेदार उनका वेतन नहीं रोक पाएंगे, क्योंकि कर्मचारियों का पूरा वेतन सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा. इसके साथ ही महिला कर्मचारियों को प्रसूति लाभ मिलेगा और सभी कर्मचारियों को हर साल दस दिन की कैजुअल छुट्टी भी दी जाएगी. कर्मचारियों के कामकाज की निगरानी के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली को अनिवार्य किया गया है. सेवा सुरक्षा की गारंटी देते हुए सरकार ने प्रावधान किया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना लिखित कारण बताए और बिना सुनवाई का मौका दिए नौकरी से बाहर नहीं निकाला जा सकेगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट की मंजूरी के 45 दिनों के भीतर इस पूरे फैसले को जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

विशेष अदालतों का गठन और डीए समीक्षा

कर्मचारियों से जुड़े फैसलों के अलावा कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी मुहर लगाई है. संशोधित वेतन, पेंशन और महंगाई भत्ते से जुड़े पुराने बकाया मामलों की बारीकी से समीक्षा करने के लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति का पुनर्गठन किया गया है. यह समिति लंबित वित्तीय मामलों का अध्ययन कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. वहीं, राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगाने और उनका तेजी से निपटारा करने के लिए सात नई विशेष अदालतें स्थापित करने का फैसला भी लिया गया है. ये अदालतें मोहाली, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में खुलेंगी, जिससे मामलों की सुनवाई जल्दी पूरी हो सकेगी.

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